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इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी सहन कर रहे किसान मजदूर
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मऊ। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शनिवार को जिले में किसान सम्मान दिवस कार्यक्रम में किसान नेताओं ने कहा कि आजादी के बाद मजदूर-किसान इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी का सामना कर रहे हैं। यह मुसीबत सरकारों ने उन पर थोपी है। वक्ताओं ने कहा कि लॉक डाउन की बंदी के चलते लोगों की आर्थिक दशा बिगड़ चुकी है।
आज सरकारों के मदद न करने का परिणाम है कि प्रवासी मजदूर अपने घरों को जाने के लिए पैदल ही चल पड़े हैं। केंद्र और प्रदेश की सरकारें संवेदनहीन हो गई हैं, उन्हें गरीब प्रवासी मजदूरों का दुख दर्द नहीं दिख रहा है। वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिनों 20 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, जबकि दुनिया के देशों ने अपने नागरिकों के खातों में नगद रुपया देने का काम किया है। कर्ज के रुपए को राहत पैकेज का नाम दे रही है जो एक सफेद झूठ है।
देश को अगर इस संकट से बाहर निकालना है तो देश के आम गरीब मजदूर और किसानों के खाते में सीधे-सीधे कोरोना भत्ता के नाम पर 20-20 हजार रुपए खाते में देना होगा। वक्ताओं ने सरकार से 20 लाख करोड़ पैकेज में किसानों के कर्जे माफ करने, लागत का डेढ़ गुना दाम देने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने, किसानों को 18 हजार रुपये एकमुश्त मदद करने, बर्बाद फसलों को 35000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजे का भुगतान देने की मांग की। कार्यक्रम में शारीरिक दूरी का पूरा ध्यान रखा गया इस मौके पर उत्तर प्रदेश किसान सभा के रामकुमार भारतीय, अर्चना उपाध्याय, वीरेंद्र कुमार, राम अवतार सिंह, कैलाश चौहान,बसंत कुमार डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु, किसान संग्राम समिति के रामू प्रसाद,सुवाष आदि शामिल रहे।
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आज सरकारों के मदद न करने का परिणाम है कि प्रवासी मजदूर अपने घरों को जाने के लिए पैदल ही चल पड़े हैं। केंद्र और प्रदेश की सरकारें संवेदनहीन हो गई हैं, उन्हें गरीब प्रवासी मजदूरों का दुख दर्द नहीं दिख रहा है। वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिनों 20 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, जबकि दुनिया के देशों ने अपने नागरिकों के खातों में नगद रुपया देने का काम किया है। कर्ज के रुपए को राहत पैकेज का नाम दे रही है जो एक सफेद झूठ है।
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देश को अगर इस संकट से बाहर निकालना है तो देश के आम गरीब मजदूर और किसानों के खाते में सीधे-सीधे कोरोना भत्ता के नाम पर 20-20 हजार रुपए खाते में देना होगा। वक्ताओं ने सरकार से 20 लाख करोड़ पैकेज में किसानों के कर्जे माफ करने, लागत का डेढ़ गुना दाम देने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने, किसानों को 18 हजार रुपये एकमुश्त मदद करने, बर्बाद फसलों को 35000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजे का भुगतान देने की मांग की। कार्यक्रम में शारीरिक दूरी का पूरा ध्यान रखा गया इस मौके पर उत्तर प्रदेश किसान सभा के रामकुमार भारतीय, अर्चना उपाध्याय, वीरेंद्र कुमार, राम अवतार सिंह, कैलाश चौहान,बसंत कुमार डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु, किसान संग्राम समिति के रामू प्रसाद,सुवाष आदि शामिल रहे।
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