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केवट संवाद प्रसंग का मंचन देख भाव-विभोर हुए श्रद्धालु 18-08-54
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अमिला (मऊ)। श्री ठाकुर द्वारा रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रहे रामलीला मंचन के पांचवें दिन सोमवार की रात राम केवट संवाद सहित विभिन्न लीलाओ का मंचन किया गया। केवट संवाद प्रसंग का मंचन देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए। रामलीला में सुमंत ने प्रभु श्रीराम से 14 दिन बाद घर जाने के लिए आग्रह किया तो राम ने मना कर दिया। यह सुनकर राम आगे बढ़े सुमंत वापस अयोध्या को आ गए। उधर, भगवान श्री राम सरयू नदी किनारे खड़े केवट से नदी पार करने के लिए नाव में बिठाने का आग्रह करने लगे।
केवट प्रभु श्री राम के पास आया और बोला कि आप कौन हैं कहां से हैं और कहां जा रहे हैं। अपना परिचय दीजिए। प्रभु श्री राम ने केवट को अपना परिचय दिया तो केवट वहां से भाग कर दूर हो गया और कहा कि आप वही राम हैं जिनके छूते ही पत्थर की शिला आसमान में उड़ गई। मेरी नाव काठ की है यह तो छूमंतर हो जाएगी। मैं अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करूंगा। उधर, अयोध्या में श्रीराम को छोड़ सुमंत जी के पहुंचते ही राम को वापस नहीं आने की खबर राजा दशरथ को मिलते ही राम राम कहते ही प्राण त्याग देते हैं जिसे देख दर्शक द्रवित हो गए। इसके बाद भरत, शत्रुघ्न ननिहाल से सूचना के बाद आयोध्या आते हैं।
भगवान के वनवास की लीलाओं का देख दर्शक भावुक
दोहरीघाट। रामलीला समिति दोहरीघाट की तरफ से कस्बे में चल रही रामलीला में सोमवार की रात राम वन गमन, राजा दशरथ के प्राण त्यागने सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान राम का वनवास की लीलाओं का मंचन देख दर्शक भावुक हो गए।
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दासी मंथरा के समझाने पर कैकेई ने राजा दशरथ को दो वरदान याद दिलाते हुए भरत का राज तिलक तथा भगवान राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। अचानक भगवान राम के राज्याभिषेक की खुशियां गम में बदल गई। भगवान राम मंत्री सुमंत को समझाकर अयोध्या वापस जाने को कहते हैं। सुमंत बहुत मनुहार करते हैं, लेकिन श्रीराम नहीं मानते। गंगा पार करने के दौरान राम की मुलाकात केवट से होती है। राम-केवट संवाद में भक्तिरस का खूबसूरत अहसास समां बांध देते हैं। मंत्री सुमंत के बिना रामलखन के अयोध्या वापस आते ही राजा दशरथ की आखिरी उम्मीद भी टूट जाती है। आखिरकार वह राम को पुकारते-पुकारते दम तोड़ देते हैं। मुख्य अतिथि अनिल गोंड उप्र बड़ोदा बैंक प्रबंधक, मीना गोंड, विशिष्ट अतिथि भुवाल सिंह, गिरीश राय आदि शामिल रहे।
हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी तुम देखी सीता मृगनयनी
कुसुम्हा। गोठा रामलीला समिति की तरफ से चल रही रामलीला में सोमवार की रात सीता हरण सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। राम विलाप देख दर्शकों की आंखे नम हो गई। रामलीला में पंचवटी में के समीप से एक दिन सुपर्णखा गुजर रही थी। वह लक्ष्मण जी को देख कर मोहित हो जाती है। वह विवाह का प्रस्ताव देती है। लक्ष्मण क्रोधित उसका नाक कान काट देते है। वह रोती बिलखती खर दूषण के पास पहुंची। भगवान राम ने दोनों को मार दिया। इसके बाद सुपर्णखा रावण के पास जाती है। रावण बदला लेने के लिए अपने मामा मारीच के पास पहुंचता है। मारीच सोने का मृग बनकर पंचवटी के चारों ओर घूमता है। राम उसका आखेट करने के लिए चल देते है। मारीच ने प्रभु श्री राम की आवाज में लक्ष्मण को पुकार लगाई। सीता जी के बार-बार आग्रह पर लक्ष्मण जी कुटिया के द्वार पर एक रेखा खींच देते हैं और सीता जी को रेखा से बाहर ना आने किसी की हिदायत देते हुए प्रभु श्री राम की सहायता के लिए चल देते हैं। उधर कुटी को सूनी पाकर रावण सीता का हरण कर लेता है। राम पशु पक्षी से पूछते है हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी तुम देखी सीता मृग नैनी। राम विलाप देख दर्शकों की आंखे नम हो गई।
नारद मोह से चिरैयाकोट की राम लीला प्रारंभ
चिरैयाकोट। नगर की प्रसिद्ध रामलीला सोमवार की देर शाम को मुकुट पूजन और नारद मोह के मंचन के साथ प्रारंभ हुई। रामलीला समिति की तरफ से लगभग दो सौ वर्षो से आयोजित प्राचीन रामलीला की शुरुआत सोमवार की देर शाम से हुई। इस मंचन में नारद का बंदर रूप देख मौजूद दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए। नारद की भूमिका में प्रेम मौर्य के अभिनय को काफी सराहा गया। रानीपुर ब्लॉक के मनाजीत ग्राम सभा के ग्राम प्रधान पति जयप्रताप यादव ने फीता काटकर रामलीला का शुभारंभ किया। इस मौके पर रामजी पांडेय, सुवास चंद जायसवाल, सुनील यादव, गणेश मद्धेशिया, राजकुमार मौर्य, भूपेंद्र मौर्य, उमेश मौर्य, सोहन लाल आदि लोग रहे
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केवट प्रभु श्री राम के पास आया और बोला कि आप कौन हैं कहां से हैं और कहां जा रहे हैं। अपना परिचय दीजिए। प्रभु श्री राम ने केवट को अपना परिचय दिया तो केवट वहां से भाग कर दूर हो गया और कहा कि आप वही राम हैं जिनके छूते ही पत्थर की शिला आसमान में उड़ गई। मेरी नाव काठ की है यह तो छूमंतर हो जाएगी। मैं अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करूंगा। उधर, अयोध्या में श्रीराम को छोड़ सुमंत जी के पहुंचते ही राम को वापस नहीं आने की खबर राजा दशरथ को मिलते ही राम राम कहते ही प्राण त्याग देते हैं जिसे देख दर्शक द्रवित हो गए। इसके बाद भरत, शत्रुघ्न ननिहाल से सूचना के बाद आयोध्या आते हैं।
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भगवान के वनवास की लीलाओं का देख दर्शक भावुक
दोहरीघाट। रामलीला समिति दोहरीघाट की तरफ से कस्बे में चल रही रामलीला में सोमवार की रात राम वन गमन, राजा दशरथ के प्राण त्यागने सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान राम का वनवास की लीलाओं का मंचन देख दर्शक भावुक हो गए।
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दासी मंथरा के समझाने पर कैकेई ने राजा दशरथ को दो वरदान याद दिलाते हुए भरत का राज तिलक तथा भगवान राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। अचानक भगवान राम के राज्याभिषेक की खुशियां गम में बदल गई। भगवान राम मंत्री सुमंत को समझाकर अयोध्या वापस जाने को कहते हैं। सुमंत बहुत मनुहार करते हैं, लेकिन श्रीराम नहीं मानते। गंगा पार करने के दौरान राम की मुलाकात केवट से होती है। राम-केवट संवाद में भक्तिरस का खूबसूरत अहसास समां बांध देते हैं। मंत्री सुमंत के बिना रामलखन के अयोध्या वापस आते ही राजा दशरथ की आखिरी उम्मीद भी टूट जाती है। आखिरकार वह राम को पुकारते-पुकारते दम तोड़ देते हैं। मुख्य अतिथि अनिल गोंड उप्र बड़ोदा बैंक प्रबंधक, मीना गोंड, विशिष्ट अतिथि भुवाल सिंह, गिरीश राय आदि शामिल रहे।
हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी तुम देखी सीता मृगनयनी
कुसुम्हा। गोठा रामलीला समिति की तरफ से चल रही रामलीला में सोमवार की रात सीता हरण सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। राम विलाप देख दर्शकों की आंखे नम हो गई। रामलीला में पंचवटी में के समीप से एक दिन सुपर्णखा गुजर रही थी। वह लक्ष्मण जी को देख कर मोहित हो जाती है। वह विवाह का प्रस्ताव देती है। लक्ष्मण क्रोधित उसका नाक कान काट देते है। वह रोती बिलखती खर दूषण के पास पहुंची। भगवान राम ने दोनों को मार दिया। इसके बाद सुपर्णखा रावण के पास जाती है। रावण बदला लेने के लिए अपने मामा मारीच के पास पहुंचता है। मारीच सोने का मृग बनकर पंचवटी के चारों ओर घूमता है। राम उसका आखेट करने के लिए चल देते है। मारीच ने प्रभु श्री राम की आवाज में लक्ष्मण को पुकार लगाई। सीता जी के बार-बार आग्रह पर लक्ष्मण जी कुटिया के द्वार पर एक रेखा खींच देते हैं और सीता जी को रेखा से बाहर ना आने किसी की हिदायत देते हुए प्रभु श्री राम की सहायता के लिए चल देते हैं। उधर कुटी को सूनी पाकर रावण सीता का हरण कर लेता है। राम पशु पक्षी से पूछते है हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी तुम देखी सीता मृग नैनी। राम विलाप देख दर्शकों की आंखे नम हो गई।
नारद मोह से चिरैयाकोट की राम लीला प्रारंभ
चिरैयाकोट। नगर की प्रसिद्ध रामलीला सोमवार की देर शाम को मुकुट पूजन और नारद मोह के मंचन के साथ प्रारंभ हुई। रामलीला समिति की तरफ से लगभग दो सौ वर्षो से आयोजित प्राचीन रामलीला की शुरुआत सोमवार की देर शाम से हुई। इस मंचन में नारद का बंदर रूप देख मौजूद दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए। नारद की भूमिका में प्रेम मौर्य के अभिनय को काफी सराहा गया। रानीपुर ब्लॉक के मनाजीत ग्राम सभा के ग्राम प्रधान पति जयप्रताप यादव ने फीता काटकर रामलीला का शुभारंभ किया। इस मौके पर रामजी पांडेय, सुवास चंद जायसवाल, सुनील यादव, गणेश मद्धेशिया, राजकुमार मौर्य, भूपेंद्र मौर्य, उमेश मौर्य, सोहन लाल आदि लोग रहे