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बिजली कर्मी दूसरे दिन भी रहें हड़ताल पर चारो ओर मचा रहा हाहाकार
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मऊ। निजीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलित बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने पर दूसरे दिन मंगलवार को शहर से लेकर देहात तक हाहाकार मचा था। फिलहाल सोमवार की रात पूरा शहर ब्लैक आउट रहा। पैसे वालों ने जनरेटर के सहारे रात बिताई, जबकि समान्य जनता के समक्ष पेयजल का भी संकट छाया रहा। इसके अलावा कारोबार से लेकर कुटीर उद्योग भी ठप रहा। सोमवार की देर रात तक जिला और पुलिस प्रशासन ने बिजली आपूर्ति बाहल करने के लिए प्रयास भी किया। लेकिन घंटो मशक्कत के बाद भी उन्हे सफलता नहीं मिली। दूसरी तरफ कर्मचारी मंगलवार को दुगने उत्साह से धरना-प्रदर्शन करते नजर आए।
निजीकरण को लेकर एक सितंबर से आंदोलित बिजली कर्मचारी है। लेकिन जब उनकी मांगों पर सुनवाई और विचार नहीं किया गया, तो बीते सोमवार से कर्मचारी पूरी तरह से कार्य बहिष्कार कर दिए। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के दौरान कर्मचारियों ने फाल्ट कर दिया, इससे बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। सोमवार की सुबह से ठप हुई आपूर्ति मंगलवार को दूसरे दिन भी देर शाम तक बहाल नहीं हुई। इसका परिणाम रहा कि मंगलवार की शाम 36 घंटा पूरा होने पर भी आपूर्ति ठप रही।
इस दौरान मंगलवार की सुबह से लोग पानी के लिए परेशान दिखे। आलम यह था कि हैंडपंप पर लंबी लाइनें लगी थी। इसके अलावा मऊ शहर का मुख्य साड़ी बुनाई का कारोबार भी प्रभावित रहा। इस दौरान बुनकर घुमते दिखे। इसीक्रम में बिजली से चलने वाला उपकरण भी मंगलवार को पूरी तरह से ठप रहा। अन्य व्यपार भी बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण मंदी के दौर से गुजरे।
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नगर पालिका का दावा भी नजर आया फेल
मऊ। बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने पर नगर पालिका ने डीएम से वादा किया कि वो जनरेटर की व्यवस्था कर शहर में पानी की आपूर्ति को बहाल रखेंगे। लेकिन सोमवार की सुबह से आपूर्ति ठप होने के बाद भी नगर पालिका का दावा कही नजर नहीं आया। मंगलवार को तो लोगों की हालत उस वक्त और बुरी हो गई, जब घर में स्टोर किए गए पानी के साथ इवर्टर जबाब दे दिया।
पचास रुपया बोतल बिका पानी
मऊ। बिजली न रहने से सबसे बड़ी पानी की समस्या और उसमें भी पेय जल की समस्या उत्पन्न हुई। इस दौरान आरो प्लांट से पचास रुपया प्रति बोतल पानी बिका। सोमवार की रात से आरओ प्लांट पर पेय जल के लिए जो लाइन लगी, वह मंगलवार को भी जारी रही।
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निजीकरण को लेकर एक सितंबर से आंदोलित बिजली कर्मचारी है। लेकिन जब उनकी मांगों पर सुनवाई और विचार नहीं किया गया, तो बीते सोमवार से कर्मचारी पूरी तरह से कार्य बहिष्कार कर दिए। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के दौरान कर्मचारियों ने फाल्ट कर दिया, इससे बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। सोमवार की सुबह से ठप हुई आपूर्ति मंगलवार को दूसरे दिन भी देर शाम तक बहाल नहीं हुई। इसका परिणाम रहा कि मंगलवार की शाम 36 घंटा पूरा होने पर भी आपूर्ति ठप रही।
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इस दौरान मंगलवार की सुबह से लोग पानी के लिए परेशान दिखे। आलम यह था कि हैंडपंप पर लंबी लाइनें लगी थी। इसके अलावा मऊ शहर का मुख्य साड़ी बुनाई का कारोबार भी प्रभावित रहा। इस दौरान बुनकर घुमते दिखे। इसीक्रम में बिजली से चलने वाला उपकरण भी मंगलवार को पूरी तरह से ठप रहा। अन्य व्यपार भी बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण मंदी के दौर से गुजरे।
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नगर पालिका का दावा भी नजर आया फेल
मऊ। बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने पर नगर पालिका ने डीएम से वादा किया कि वो जनरेटर की व्यवस्था कर शहर में पानी की आपूर्ति को बहाल रखेंगे। लेकिन सोमवार की सुबह से आपूर्ति ठप होने के बाद भी नगर पालिका का दावा कही नजर नहीं आया। मंगलवार को तो लोगों की हालत उस वक्त और बुरी हो गई, जब घर में स्टोर किए गए पानी के साथ इवर्टर जबाब दे दिया।
पचास रुपया बोतल बिका पानी
मऊ। बिजली न रहने से सबसे बड़ी पानी की समस्या और उसमें भी पेय जल की समस्या उत्पन्न हुई। इस दौरान आरो प्लांट से पचास रुपया प्रति बोतल पानी बिका। सोमवार की रात से आरओ प्लांट पर पेय जल के लिए जो लाइन लगी, वह मंगलवार को भी जारी रही।