विद्युत कर्मचारियों ने बुधवार से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे पूर्व अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया और आगे की रणनीति तय की गई। उधर, हड़ताल से निपटने के लिए प्रशासनिक अधिकारी भी कमर कसे रहे। जिले में 50 विद्युत उपकेंद्र हैं। यहां तैनात बिजलीकर्मियों तथा अभियंताओं के बुधवार से कार्यबहिष्कार तथा हड़ताल के मद्देनजर जिला प्रशासन की तरफ से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो आउटसोर्सिंग कंपनी के 750 बिजलीकर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही आईटीआई, पाॅलिटेक्निक के प्रशिक्षुओं तथा इलेक्ट्रिकल के शिक्षकों, अनुदेशकों की ड्यूटी लगाई गई है। तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी मानीटरिंग करेंगे। इसके साथ ही प्रत्येक विद्युत उपकेंद्रों पर जिलास्तरीय अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट नीतीश कुमार सिंह ने बताया कि विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी उपाय किए गए हैं। उधर बिजलीकर्मियों तथा अभियंताओं ने कार्य बहिष्कार शुरु कर दिया। उन्होंने नारेबाजी के बीच प्रदर्शन कर अपनी मांगों को जायज बताया। साथ ही आंदोलन को तेज करने के लिए रणनीति तय की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन की हठवादिता के चलते बिजलीकर्मियों पर हड़ताल थोपी जा रही है। कहा कि तीन दिसंबर 2022 को हुए समझौते में से 15 दिन का समय मांगा गया था। अब 112 दिन हो गए हैं। समझौते के प्रमुख बिन्दुओं के क्रियान्वयन की दिशा में कुछ भी कदम नहीं उठाया जा रहा है। संघर्ष समिति के संयोजक सूर्यदेव पांडेय ने कहा कि 16 मार्च की रात 10 बजे से 72 घंटे की सांकेतिक हड़ताल होगी। बिजली कर्मियों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। प्रदर्शन करने वालों में सूर्यदेव पांडेय,प्रदीप सिंह, देवेंद्र उपाध्याय, प्रकाश सिंह, कमलेश श्रीवास्तव, अमित गुप्ता, संजय मणि त्रिपाठी, रामप्रवेश सिंह, रविंद्र कुमार आदि शामिल रहे।