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Mau News: बढ़ते तापमान के कारण बेहोशी चिड़चिड़ापन की समस्या बढ़ी

Sun, 15 Jun 2025 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jun 2025 12:10 AM IST
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Due to rising temperatures, problems of unconsciousness and irritability have increased
मऊ। भीषण गर्मी से युवा चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक और मनोरोग विभाग में रोजाना 20 से अधिक मरीज आ रहे हैं। जबकि पहले यह संख्या 10 से 12 थी। इसके पीछे डॉक्टर गर्मी की वजह से बायोपुलर मूड डिसऑर्डर होना बता रहे है।
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इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिर दर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक से चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है।
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सीएमएस डॉ. धनज्जय कुमार ने बताया कि गर्मी में घबराहट, बेचैनी, दिल की धड़कन बढ़ना और चिड़चिड़ा होने को हल्के में न लें। यह मानसिक बीमारी भी हो सकती है। बताया कि जिला अस्पताल में डायरिया, बुखार, उल्टी, दस्त के साथ तापमान में इजाफा होने से अवसाद और कन्वर्जन डिसऑर्डर हिस्टीरिया से पीड़ित मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
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बताया कि वर्तमान में एनसीडी क्लीनिक और मनारोग चिकित्सक के पास बायोपुलर मूड डिसऑर्डर के मरीज बढ़ रहे हैं। इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिर दर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलने लगते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक से चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है। मनोरोग की ओपीडी में रोजाना इन मरीजों की संख्या आठ से दस थी, लेकिन अब यह 20 तक पहुंच जा रही है।

भरपूर नींद लें, न करें लापरवाही

मऊ। अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रवीशंकर पांडेय ने बताया कि जब हमारा शरीर उच्च तापमान के संपर्क में आता है, तो वह पसीने का उत्पादन करके और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके स्वयं को ठंडा करने की कोशिश करता है। जब आप लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहते हैं तो यह मस्तिष्क के रसायनों जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के काम करने के तरीके को भी बदल सकती है। ये स्थिति हमारे मूड को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि गर्मियों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा आने, चिंता-तनाव जैसे विकारों के मामले काफी बढ़ जाते हैं। इसके अलावा गर्मी के कारण थायराइड हार्मोन का उत्पादन को प्रभावित हो सकता है, जिससे थकान, अवसाद और स्पष्ट रूप से सोचने में समस्या हो सकती है।
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