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जलनिकासी की व्यवस्था न होने से 11 हजार एकड़ भूमि हो जाती है बेकार

Wed, 30 Dec 2020 10:47 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2020 10:47 PM IST
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Due to lack of drainage, 11 thousand acres of land becomes useless
मऊ। जनपद के रतनपुरा ब्लाक में गाढ़ा और इटौरा तालों का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। दोनों तालों का क्षेत्रफल लगभग 11 हजार एकड़ है। यह जिले के तीसरे बड़े ताल हैं। इस ताल में आसपास के 12 गांवों के किसानों की भूमि है। ताल से पानी के निकास की स्थाई व्यवस्था न होने से ताल साल भर पानी से भरे रहते हैं और किसानों की खेती योग्य भूमि बेकार पड़ी रह जाती है। ताल से जुड़े तीन नाले हैं लेकिन विभाग की ओर से इन नालों की नियमित रूप से सफाई नहीं हो पाती है।
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किसानों का कहना है कि खोहिया नाला जो बसनही नाला भी कहा जाता है, का पानी आकर गाढ़ा ताल में भर जाता है। इस ताल से निकलने वाली गाढ़ा नगवा ड्रेन जो आगे जाकर सरायभारती के पास एमजे बंधे के पास तमसा नदी में गिरता है। लेकिन इस ड्रेन की सफाई करीब 15 सालों से नहीं हुई।
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रतनपुरा ब्लाक के दक्षिणी छोर पर जनपद गाजीपुर की सीमा के पास स्थित गाढ़ा ताल इटौरा ताल का क्षेत्रफल लगभग 11 हजार एकड़ है। लेकिन इस क्षेत्र के किसानों का दुर्भाग्य है कि पिछले 15 सालों से गाढ़ा नगवा नाला जो ताल के पानी के निकास का मुख्य स्रोत है, की सफाई कराई ही नहीं गई। भाजपा से जुड़े किसान नेता राकेश सिंह इस नाले की सफाई के लिए जिलाधिकारी से लेकर कमिश्नर और मुख्यमंत्री तक प्रार्थनापत्र भेजते रहे लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। नगवां गांव निवासी इंद्रदेव भारती कहते हैं कि यदि नालों की सफाई हर साल सही तरीके से कराई जाती रहे तो ताल के किसानों को खेती करने का मौका मिल सकता है।
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सिधवल गांव निवासी रमाकांत यादव कहते हैं कि विभागीय उपेक्षा के चलते इस ताल में हमेशा पानी भरा रहता है। जिससे खेती नहीं हो पाती। गाढ़ा गांव निवासी परशुराम सिंह कहते हैं कि यदि नगवा गाढ़ा नाले की सफाई होती रहे और खड़िया नाला को भी उससे जोड़ दिया जाए तो ताल से जलजमाव की समस्या पर निजात पाई जा सकती है।
किसानों ने चंदा लगाकर कराई थी सफाई:
तीन साल पहले किसान नेता राकेश सिंह की पहल पर कुछ किसानों ने चंदा एकत्र कर जेसीबी से इस नाले की खुदाई कराया था तो किसानों को दो साल खेती करने का अवसर मिला था। लेकिन अब हालत जस के तस हो गए हैं।
नालों को जोड़ कर होती रहे सफाई तो किसानों को मिलेगी राहत:
मऊ। किसानों का कहना है कि यदि खड़िया और गाढ़ा नगवा नाले को आपस में जोड़ दिया जाए और इनकी नियमित रूप से सफाई होती रहे तो तालों में जलजमाव की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है।
पहले यह था बलिया सिंचाई विभाग में
गाढा ताल से जलनिकासी के लिए गाढ़ा नगवा ड्रेन और खड़िया ड्रेन की सफाई का जिम्मा पहले बलिया जनपद में था। अब इसे सिंचाई विभाग मऊ में लाने की प्रक्रिया चल रही है।
गाढ़ा और इटौरा तालों की जलनिकासी की जिम्मेदारी पहले सिंचाई खंड़ बलिया में थी अब इसे मऊ जनपद में कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अब इन ड्रेनों की बेहतर तरीके से सफाई कराई जाएगी। वीरेंद्र सरोज, अधिशासी अभियंता, मऊ।

इन गांवों के किसानों को मिलता लाभ:
नालों की सही तरीके से सफाई होने से गाढ़,खालिसपुर, जोगापुर दतौड़ा, मुबारकपुर, नगवां, बीबीपुर, बिलौंवां,सिधवल, बीबीपुर, इटौरा, खूंटी पृथ्वीपुर, मखना, अरदौना, इसहाकपुर, मुस्तफाबाद, सेबहरपुर, मड़ैली और पिल्खी वरुना गांवों के किसानों को लाभ मिलता।
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