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बारिश के लिए धूप में हुई दुआख्वानी

Sun, 15 Jul 2018 12:28 AM IST
mau
mau Updated Sun, 15 Jul 2018 12:28 AM IST
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Duakwani in the sun to rain
मधुबन नगर पंचायत क्षेत्र के पांती रोड स्थित खेल के मैदान में तपती धूप में बारिश के लिए दुआखानी करते मुस्लिम बंधु। - फोटो : mau
 इलाकाई मुसलमानों ने शनिवार को भरी दोपहर में बारिश के लिए दुआख्वानी का आयोजन किया। रब के आगे हाथ उठा कर बारिश की गुहार लगाई। काफी संख्या में आयोजन के लिए जुटे मुसलमानों ने अल्लाह तआला की बारगाह में गर्मी और उमस से निजात दिलाने के लिए दुआ को हाथ उठाए। सामान्य तौर पर 15 जून से बारिश की शुरुआत होती है। लेकिन जुलाई महीने का आधा समय बीत जाने के बाद भी तीखी धूप से लोगों को राहत नहीं मिल रही है। आषाढ़ महीने में जेठ सी गर्मी पड़ रही है। गर्मी से निजात और बारिश के लिए शनिवार को मुसलमान पांती रोड के खेल मैदान में जुटे और अल्लाह की बारगाह में हाथ उठा दिए।  
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मौलाना नसीरुद्दीन मिसबाही, मु. शहाबुद्दीन, हाफिज अब्बास, मौलाना महबूब शाह, हाफिज एकराम, हाफिज एहसान आदि की की देखरेख में दुआख्वानी की गई। मौलाना नसीरुद्दीन ने कहा कि अब खुदा के दरबार में गुहार लगाने के सिवा कोई रास्ता नहीं। वह अपने परेशानहाल बंदों की सुनता है। उम्मीद है वह गर्मी और उमस से निजात दिलाने के लिए बरसात जरूर कराएगा। मौलाना ने कहा कि हम सब अल्लाह की नाफरमानी पर उतर आए हैं यही वजह है कि हम परेशानियांें से घिरते जा रहे हैं। अभी भी समय है कि हम सब उसकी रजा के लिए तैयार हो और उसकी इबादत में कोताही न करें। कहा कि अल्लाह अपने बंदों की हर परेशानी से वाकिफ है और समय-समय पर उनका इम्तेहान भी लेता है। ऐसे में हमें सचेत होना होगा और खुदा के बताए एहकाम को समझना होगा ताकि उसकी रजा हासिल हो सके और उसकी रहमत मिल सके।
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उधर, गांव-गांव में इंद्रदेव को खुश करने के लिए तरह-तरह के टोटके शुरू हो गए हैं। समय से धान की रोपाई कार्य शुरू न होने से धान के उत्पादन में कमी होने की चिंता सताने लगी है। बड़े काश्तकार तो किसी तरह धान की रोपाई निजी संसाधन से करा ले रहे हैं। छोटे किसान बारिश के सहारे हैं। उनका कहना है कि विभ्ााग की लापरवाही के चलते उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही। नहीं तो अब तक नहरों में पानी आ जाता तो उन्हें सिंचाई में दिक्कतें न आती। ग्रामीणों ने कहा कि इस बार मानसून तो आए लेकिन जमकर बरस नहीं सके। जिससे फसल को लेकर वह चिंतित हैं। छोटे किसानों की तो कमर ही टूटा जाएगी। अब बस बरसात हो जाए ताकि उनके खेत लहलहा उठे।
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