{"_id":"63bef93ce121cb7202703060","slug":"development-budget-will-not-be-returned-if-work-is-not-done-payment-will-be-done-through-pfms-mau-news-vns693245654","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: काम न होने पर विकास का बजट नहीं होगा वापस, पीएफएमएस से होगा भुगतान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: काम न होने पर विकास का बजट नहीं होगा वापस, पीएफएमएस से होगा भुगतान
विज्ञापन
विभिन्न विभागों को मिलने वाला बजट काम न होने पर 31 मार्च को वापस चला जाता था। अब नई व्यवस्था के अनुसार यह बजट वापस नहीं जाएगा। कारण यह कि कोषागार का हस्तक्षेप अब समाप्त कर दिया गया है। बजट खर्च करने के लिए पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट (पीएफएमएस) के तहत भुगतान किया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों का बजट अभी तक जिला कोषागार में आता था। अक्सर देखने में आता था कि 31 मार्च तक बजट खर्च न हो पाने के कारण विभाग का बजट खत्म हो जाता था। यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब विभाग का अलग से बैंक में खाता खुलेगा, जिसमें धनराशि जाएगी। इसके जरिए विभाग कार्यदायी संस्था को भुगतान करेगा। उसे पीएफएमएस सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के तहत भुगतान करना अनिवार्य होगा। इससे काम कराने वाली संस्था के खाते में धन चला जाएगा। कोषागार से भुगतान होने पर महीनों बिल लटका रह जाता था। कभी बिल पर कमी निकाल कर भुगतान को रोक दिया जाता था। इसमें कई बार अनावश्यक टिप्पणी के कारण भी भुगतान लटक जाता था। इसके होने से सहूलियत मिलेगी। वहीं विभिन्न विभागों का बजट आने के कारण अक्सर यह देखने को मिलता था कि कोषागार पर काफी बोझ हो जाता था। वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में कर्मचारी दिन-रात एक कर काम करते थे और चंद दिनों में ही लाखों रुपये का भुगतान करते थे। अब कोषागार से केवल पेंशन आदि का भुगतान होगा। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना था कि सरकारी योजनाओं का धन विभाग के खोले गए बैंक खाते में पीएफएमएस के तहत ट्रांसफर होगा। योजनाओं का भुगतान पीएफएमएस से करने की प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन
लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों का बजट अभी तक जिला कोषागार में आता था। अक्सर देखने में आता था कि 31 मार्च तक बजट खर्च न हो पाने के कारण विभाग का बजट खत्म हो जाता था। यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब विभाग का अलग से बैंक में खाता खुलेगा, जिसमें धनराशि जाएगी। इसके जरिए विभाग कार्यदायी संस्था को भुगतान करेगा। उसे पीएफएमएस सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के तहत भुगतान करना अनिवार्य होगा। इससे काम कराने वाली संस्था के खाते में धन चला जाएगा। कोषागार से भुगतान होने पर महीनों बिल लटका रह जाता था। कभी बिल पर कमी निकाल कर भुगतान को रोक दिया जाता था। इसमें कई बार अनावश्यक टिप्पणी के कारण भी भुगतान लटक जाता था। इसके होने से सहूलियत मिलेगी। वहीं विभिन्न विभागों का बजट आने के कारण अक्सर यह देखने को मिलता था कि कोषागार पर काफी बोझ हो जाता था। वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में कर्मचारी दिन-रात एक कर काम करते थे और चंद दिनों में ही लाखों रुपये का भुगतान करते थे। अब कोषागार से केवल पेंशन आदि का भुगतान होगा। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना था कि सरकारी योजनाओं का धन विभाग के खोले गए बैंक खाते में पीएफएमएस के तहत ट्रांसफर होगा। योजनाओं का भुगतान पीएफएमएस से करने की प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन