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Mau News: निर्जला व्रत रख संतान की दीर्घायु के लिए की पूजा
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नगर के मड़ैयाघाट पर जीवित्पुत्रिका व्रत में पूजन अर्चन करतीं व्रती महिलाएं।संवाद
मऊ। म पुत्रों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना को लेकर शनिवार को नगर सहित जिले के ग्रामीण अंचलों में महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद देर शाम महिलाओं ने घरों, नदी-तालाबों और अन्य पूजन स्थलों पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान दीप और वस्त्र दान किए गए।नगर के मठिया टोला, हरिकेशपुरा, सहादतपुरा, निजामुद्दीनपुरा, ब्रह्मस्थान, चांदमारी इमिलिया, पावरहाउस कालोनी, भीटी सहित विभिन्न मुहल्लों की महिलाएं घरों, ब्रह्मस्थान, मड़इया घाट, भीटी तमसा तट सहित विभिन्न तालाबों, पोखरों सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर एकत्र होकर गौरी गणेश की पूजा की। उधर, बाजारों में चढ़ावे के लिए महिलाओं ने फलों और मिठाइयों की खरीदारी कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। निराजल व्रती महिलाओं ने अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना किया।
साथ ही धार्मिक लोक कथाएं सुनकर धर्म की महत्ता को स्थापित करने का प्रयास किया। बताया जाता है कि पर्व के मनाने के पीछे अभिज्ञान शाकुंतलम में ‘पुत्र पिंड परिपालनो नाम उपवास’ का उल्लेख है। इसमें यह दर्शाया गया है कि जीवित्पुत्रिका का व्रत देवी गौरी का व्रत है। इसमें शिवा की पूजन का विधान है। देहाती और लोक ख्याति में शिवा को सियामाई कहा जाता है। इस व्रत में जीमूतवाहन की पूजा का भी प्रावधान है।
चिरैयाकोट: कस्बे सहित विभिन्न इलाकों में पुत्र की मंगल कामना के लिए महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। व्रती महिलाओं ने नगर के थाना परिसर स्थित तालाब, छठपोखरा , मनाजीत विश्वकर्मा पोखरा, सरकारी बस स्टैंड के पास सहित विभिन्न तालाबों के किनारे महिलाओं ने जाकर विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
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जीवित्पुत्रिका की कथा सुनकर पुत्रों की मंगल कामना की। दोहरीघाट /कुसुम्हा: कस्बा सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में जीवित्पुत्रिका व्रत श्रद्धापूर्ण वातावरण में मनाया गया। राम जानकी घाट, गोंठा रामशाला, मंडी प्रांगण, फरसरा, पतनई, बीबीपुर, गौरीडीह, कोरौली, बेलौली,उसरा सहित विभिन्न इलाकोें में जीवित्पुत्रिका व्रत रखकर शाम को पूजन किया।
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साथ ही धार्मिक लोक कथाएं सुनकर धर्म की महत्ता को स्थापित करने का प्रयास किया। बताया जाता है कि पर्व के मनाने के पीछे अभिज्ञान शाकुंतलम में ‘पुत्र पिंड परिपालनो नाम उपवास’ का उल्लेख है। इसमें यह दर्शाया गया है कि जीवित्पुत्रिका का व्रत देवी गौरी का व्रत है। इसमें शिवा की पूजन का विधान है। देहाती और लोक ख्याति में शिवा को सियामाई कहा जाता है। इस व्रत में जीमूतवाहन की पूजा का भी प्रावधान है।
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चिरैयाकोट: कस्बे सहित विभिन्न इलाकों में पुत्र की मंगल कामना के लिए महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। व्रती महिलाओं ने नगर के थाना परिसर स्थित तालाब, छठपोखरा , मनाजीत विश्वकर्मा पोखरा, सरकारी बस स्टैंड के पास सहित विभिन्न तालाबों के किनारे महिलाओं ने जाकर विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
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जीवित्पुत्रिका की कथा सुनकर पुत्रों की मंगल कामना की। दोहरीघाट /कुसुम्हा: कस्बा सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में जीवित्पुत्रिका व्रत श्रद्धापूर्ण वातावरण में मनाया गया। राम जानकी घाट, गोंठा रामशाला, मंडी प्रांगण, फरसरा, पतनई, बीबीपुर, गौरीडीह, कोरौली, बेलौली,उसरा सहित विभिन्न इलाकोें में जीवित्पुत्रिका व्रत रखकर शाम को पूजन किया।