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Mau News: डिहाइड्रेशन और नमक की अधिकता से बढ़ा बीपी के मरीजों का ग्राफ
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जिला अस्पताल की ओपीडी में रजिस्ट्रेशन के लिए लगी लाइन।संवाद
गर्मी में डिहाइड्रेशन और अत्यधिक नमक के सेवन से बीपी के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। एनसीडी क्लीनिक और फिजिशियन ओपीडी में रोजाना 30 से अधिक मरीज इस समस्या की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में पहले यह संख्या 20 से कम थी, लेकिन अब यह लगभग दोगुनी हो गई है। वहीं, निजी क्लीनिकों में भी उच्च रक्तचाप और किडनी संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उनकी ओपीडी में बृहस्पतिवार को 35 मरीज इस समस्या के साथ पहुंचे थे। इनमें 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 10 से अधिक तथा 36 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 15 से अधिक मरीज शामिल थे।
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उन्होंने बताया कि 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग के मरीजों की जांच में उनका रक्तचाप 130 से 150 एमएमएचजी तक पाया गया। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि ये लोग अपने भोजन में अधिक नमक का सेवन कर रहे हैं। इसके अलावा इनके दैनिक खानपान में स्नैक्स, नमकीन, फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि कई युवाओं का रक्तचाप 180 एमएमएचजी से अधिक भी पाया जा रहा है। जबकि 150 से अधिक रक्तचाप आने पर भी कई युवा इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
उनके अनुसार 180 एमएमएचजी से अधिक रक्तचाप होने पर लकवा और ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है। आईसीयू में किए गए अवलोकन में उन्होंने पाया कि वहां आने वाले लकवा और ब्रेन हेमरेज के 28 प्रतिशत मरीजों में रक्तचाप 180 एमएमएचजी से अधिक था।
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बढ़े हुए बीपी से हार्ट और किडनी संबंधी जोखिम
मऊ। नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि एनसीडी क्लीनिक की ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें हृदय रोग से पीड़ित 65 प्रतिशत मरीजों का रक्तचाप बढ़ा हुआ मिला। ऐसे मरीजों में 38 प्रतिशत युवा हैं।
उन्होंने बताया कि बढ़ा हुआ रक्तचाप कार्डिएक अरेस्ट और किडनी संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। पूछताछ में कई युवाओं में धूम्रपान की लत और मोटापा पाया गया। नौकरी, पढ़ाई तथा अन्य कारणों से तनाव का स्तर भी बढ़ा हुआ मिला। मरीजों को नमक का सेवन कम करने, धूम्रपान छोड़ने और नियमित व्यायाम के माध्यम से फिटनेस सुधारने की सलाह दी जा रही है।
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जिला अस्पताल में पहले यह संख्या 20 से कम थी, लेकिन अब यह लगभग दोगुनी हो गई है। वहीं, निजी क्लीनिकों में भी उच्च रक्तचाप और किडनी संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उनकी ओपीडी में बृहस्पतिवार को 35 मरीज इस समस्या के साथ पहुंचे थे। इनमें 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 10 से अधिक तथा 36 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 15 से अधिक मरीज शामिल थे।
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उन्होंने बताया कि 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग के मरीजों की जांच में उनका रक्तचाप 130 से 150 एमएमएचजी तक पाया गया। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि ये लोग अपने भोजन में अधिक नमक का सेवन कर रहे हैं। इसके अलावा इनके दैनिक खानपान में स्नैक्स, नमकीन, फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि कई युवाओं का रक्तचाप 180 एमएमएचजी से अधिक भी पाया जा रहा है। जबकि 150 से अधिक रक्तचाप आने पर भी कई युवा इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
उनके अनुसार 180 एमएमएचजी से अधिक रक्तचाप होने पर लकवा और ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है। आईसीयू में किए गए अवलोकन में उन्होंने पाया कि वहां आने वाले लकवा और ब्रेन हेमरेज के 28 प्रतिशत मरीजों में रक्तचाप 180 एमएमएचजी से अधिक था।
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बढ़े हुए बीपी से हार्ट और किडनी संबंधी जोखिम
मऊ। नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि एनसीडी क्लीनिक की ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें हृदय रोग से पीड़ित 65 प्रतिशत मरीजों का रक्तचाप बढ़ा हुआ मिला। ऐसे मरीजों में 38 प्रतिशत युवा हैं।
उन्होंने बताया कि बढ़ा हुआ रक्तचाप कार्डिएक अरेस्ट और किडनी संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। पूछताछ में कई युवाओं में धूम्रपान की लत और मोटापा पाया गया। नौकरी, पढ़ाई तथा अन्य कारणों से तनाव का स्तर भी बढ़ा हुआ मिला। मरीजों को नमक का सेवन कम करने, धूम्रपान छोड़ने और नियमित व्यायाम के माध्यम से फिटनेस सुधारने की सलाह दी जा रही है।