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दोस्तों ने ही इंद्रजीत को मार दी थी गोली
Updated Tue, 01 May 2018 11:52 PM IST
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हलधरपुर थाना क्षेत्र के मेउड़ी के पास 29 अप्रैल की शाम को एक युवक को गोली मारने की घटना का खुलासा पुलिस ने मंगलवार को कर दिया। ठेकेदारी के दौरान हुए लेन देन को लेकर दोस्तों ने ही युवक को मौत की नींद सुलाने की नियत से गोली मार दिया था। हमलावरों का मानना था कि सीने में गोली लगने के बाद घायल मर जाएगा। इसी सोच से हमलावरों ने इंद्रजीत को गोली मारने के बाद स्कार्पियो सवारों द्वारा गोली मारने की झूठी कहानी गढ़ दिया और बिना पुलिस को सूचना दिए और एंबुलेंस बुलाए ही अपनी बाइक पर ही घायल इंद्रजीत को लादकर जिला अस्पताल पहुंचाया। लेकिन पुलिस ने 48 घंटों के अंदर ही हमलावरों को जेल भेजकर घटना का खुलासा कर दिया। अपर पुलिस अधीक्षक शिवाजी शुक्ला ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।
एएसपी ने बताया कि सरायलखंसी थाना क्षेत्र के पनियरा गोहटा गांव निवासी इंद्रजीत यादव पुत्र चंद्रिका और हरपुर गांव निवासी उमेश यादव पुत्र राम प्रकाश बिजली विभाग में ठेकेदारी करते थे। इस दौरान दोनों के बीच रुपयों के लेन देन को लेकर विवाद हो गया था। तभी से उमेश इंद्रजीत को ठिकाने लगाना चाहता था। 27 अप्रैल को उमेश की मौसी की लड़की की ससुराल बढ़या गांव में शादी थी। उसी शादी में जाने के लिए उमेश ने इंद्रजीत को तैयार किया। इसके पहले उमेश ने बलिया जिले के भीमपुरा थाना क्षेत्र के औराई कला गांव निवासी सतेंद्र यादव पुत्र श्रीकिशुन को भी शामिल कर लिया। 20 अप्रैल की शाम को मेउड़ी के पास काफी मात्रा में शराब पिलाने के बाद उमेश ने इंद्रजीत के सीने और कमर में गोली मार दिया। इसके बाद दोनों ने अपनी योजना के अनुसार यह सोचकर कि मऊ पहुंचने से पहले इंद्रजीत मर जाएगा, बाइक पर लादकर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने उसे वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान हलधरपुर पुलिस ने घटना के खुलासे के लिए अपने मुखबिरों का जाल बिछा दिया। मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उमेश और सतेंद्र से कड़ाई से पूछताछ किया। पुलिस की पूछताछ में इस घटना में दोनों की सक्रियता उजागर हुई। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त पिस्टल और मोटरसाइकिलें बरामद कर लिया। इस खुलासे पर डीआईजी आजमगढ़ ने पुलिस टीम को दस हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
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एएसपी ने बताया कि सरायलखंसी थाना क्षेत्र के पनियरा गोहटा गांव निवासी इंद्रजीत यादव पुत्र चंद्रिका और हरपुर गांव निवासी उमेश यादव पुत्र राम प्रकाश बिजली विभाग में ठेकेदारी करते थे। इस दौरान दोनों के बीच रुपयों के लेन देन को लेकर विवाद हो गया था। तभी से उमेश इंद्रजीत को ठिकाने लगाना चाहता था। 27 अप्रैल को उमेश की मौसी की लड़की की ससुराल बढ़या गांव में शादी थी। उसी शादी में जाने के लिए उमेश ने इंद्रजीत को तैयार किया। इसके पहले उमेश ने बलिया जिले के भीमपुरा थाना क्षेत्र के औराई कला गांव निवासी सतेंद्र यादव पुत्र श्रीकिशुन को भी शामिल कर लिया। 20 अप्रैल की शाम को मेउड़ी के पास काफी मात्रा में शराब पिलाने के बाद उमेश ने इंद्रजीत के सीने और कमर में गोली मार दिया। इसके बाद दोनों ने अपनी योजना के अनुसार यह सोचकर कि मऊ पहुंचने से पहले इंद्रजीत मर जाएगा, बाइक पर लादकर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने उसे वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान हलधरपुर पुलिस ने घटना के खुलासे के लिए अपने मुखबिरों का जाल बिछा दिया। मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उमेश और सतेंद्र से कड़ाई से पूछताछ किया। पुलिस की पूछताछ में इस घटना में दोनों की सक्रियता उजागर हुई। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त पिस्टल और मोटरसाइकिलें बरामद कर लिया। इस खुलासे पर डीआईजी आजमगढ़ ने पुलिस टीम को दस हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
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