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महिला की हत्या में वकील को उम्रकैद
Updated Tue, 10 Oct 2017 11:31 PM IST
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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक आदिल आफताब अहमद ने मकान के विवाद को लेकर महिला अलमा खातून की छह वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में शनिवार को दोषी पाए गए अधिवक्ता असलम अली उर्फ नन्हे को सुनवाई के बाद मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अधिवक्ता पर 50 हजार रुपया अर्थदंड भी निर्धारित किया।
मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बुनकर कालोनी का है। अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा निजामुद्दीन पुत्र अब्दुल क्यूम की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई। वादी का आरोप था कि 17 जुलाई 2011 को मकान के विवाद को लेकर उसकी पत्नी अलमा खातून की मारपीटकर हत्या कर दी गई। मामले में शहर कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा मुहल्ला निवासी अधिवक्ता असलम अली उर्फ नन्हे पुत्र अहमद को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी श्रीप्रकाश यादव ने वादी सहित कुल नौ गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष की तरफ से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी असलम अली को हत्या का दोषी पाया था । अर्थदंड की राशि में से 80 प्रतिशत मृतका के पति निजामुद्दीन को देने का आदेश दिया गया।
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मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बुनकर कालोनी का है। अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा निजामुद्दीन पुत्र अब्दुल क्यूम की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई। वादी का आरोप था कि 17 जुलाई 2011 को मकान के विवाद को लेकर उसकी पत्नी अलमा खातून की मारपीटकर हत्या कर दी गई। मामले में शहर कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा मुहल्ला निवासी अधिवक्ता असलम अली उर्फ नन्हे पुत्र अहमद को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी श्रीप्रकाश यादव ने वादी सहित कुल नौ गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष की तरफ से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी असलम अली को हत्या का दोषी पाया था । अर्थदंड की राशि में से 80 प्रतिशत मृतका के पति निजामुद्दीन को देने का आदेश दिया गया।
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