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कोतवाल और एसओ कोर्ट में तलब
mau
Updated Sat, 29 Sep 2018 11:45 PM IST
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Court
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न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने एनसीआर की विवेचना में दिए गए आदेश के अनुपालन में विवेचना में कोई प्रगति न होने को गंभीरता से लेते हुए कोतवाल मुहम्मदाबाद गोहना और थानाध्यक्ष हलधरपुर को कोर्ट में तलब किया है। साथ ही समस्त कागजात के साथ कोर्ट में 16 अक्तूबर को उपस्थित होने को कहा है। उन्हें स्पष्टीकरण भी देना है कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। ऐसा न करने पर न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही की जाएगी। जेएम ने नोटिस की प्रति पुलिस अधीक्षक और डीआईजी आजमगढ को भी भेजा है। न्
यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किए गए नोटिस में उल्लेख किया गया है कि कोतवाल मुहम्मदाबादगोहना को कुल दस तथा थानाध्यक्ष रानीपुर को तीन एनसीआर की विवचेना का आदेश विभिन्न तिथियों में दिया गया। जिसके बावत कोर्ट ने विवेचना के बावत थाना से प्रगति आख्या मांगी थी । लेकिन थाना से विवेचना के बावत भ्रामक रिपोर्ट न्यायालय में दी गई। जिस पर चार मई 2017 को पुलिस अधीक्षक मऊ को संबंधित विवेचक के विरुद्व कार्यवाही कर आख्या मांगी गई। इसके बाद कई बार कोर्ट से आख्या मांगी गई लेकिन कोई आख्या पेश नहीं की गई। छह मई 2017 को दोनो थानों के तत्कालीन पैरोकार और वर्तमान पैरोकार को एनसीआर से संबंधित आदेश की प्रति विवेचना के लिए प्राप्त कराई गई थी । इसके बाद पैरोकार के बताने पर आदेश की प्रति दूबारा प्राप्त कराई गई। बावजूद इसके विवेचना में कोई प्रगति नहीं हुई। जिससे स्पष्ट है कि जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है।
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यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किए गए नोटिस में उल्लेख किया गया है कि कोतवाल मुहम्मदाबादगोहना को कुल दस तथा थानाध्यक्ष रानीपुर को तीन एनसीआर की विवचेना का आदेश विभिन्न तिथियों में दिया गया। जिसके बावत कोर्ट ने विवेचना के बावत थाना से प्रगति आख्या मांगी थी । लेकिन थाना से विवेचना के बावत भ्रामक रिपोर्ट न्यायालय में दी गई। जिस पर चार मई 2017 को पुलिस अधीक्षक मऊ को संबंधित विवेचक के विरुद्व कार्यवाही कर आख्या मांगी गई। इसके बाद कई बार कोर्ट से आख्या मांगी गई लेकिन कोई आख्या पेश नहीं की गई। छह मई 2017 को दोनो थानों के तत्कालीन पैरोकार और वर्तमान पैरोकार को एनसीआर से संबंधित आदेश की प्रति विवेचना के लिए प्राप्त कराई गई थी । इसके बाद पैरोकार के बताने पर आदेश की प्रति दूबारा प्राप्त कराई गई। बावजूद इसके विवेचना में कोई प्रगति नहीं हुई। जिससे स्पष्ट है कि जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है।
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