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मऊः कोरोना संक्रमण की मार, पचास फीसदी तक घट गया साड़ी का कारोबार, डेढ़ लाख बुनकरों के रोजी-रोटी पर संकट

Fri, 23 Apr 2021 06:13 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 23 Apr 2021 06:13 PM IST
सार

करीब 500 करोड़ का सालाना कारोबार होता है मऊ की साड़ियों का, महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, तमिलनाडु में की जाती हैं पसंद , कोरोना की दूसरी लहर से मार्च के दूसरे हफ्ते से ही कारोबार पर लगा ब्रेक
 

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Corona infection hit, sari business reduced by fifty percent, crisis on livelihood of 1.5 lakh weavers in mau
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संक्रमण बढ़ने से मऊ जिले के साड़ी उद्योग को काफी नुकसान पहुंचा है। पहले से मिले आर्डर अब निरस्त होने लगे हैं। वर्तमान में आर्डर मिलना बंद हो गए हैं। इससे साड़ी उत्पादन में 50 फीसदी तक गिरावट आ गई है। जो उत्पादन हो रहा है वह डंप पड़ा है। ऐसे में पावरलूम में काम करने वाले करीब डेढ़ लाख बुनकरों और उद्योग से जुड़े अन्य लोगों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है।

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नगर सहित जिले के मुहम्मदाबादगोहना, घोसी, कोपागंज, अदरी, पूराघाट में बनी साड़ियां महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, तमिलनाडु में पसंद की जाती हैं। यहां की साड़ियों का करीब 500 करोड़ का सालाना कारोबार होता है। गत वर्ष कोरोना संक्रमण तथा लॉकडाउन से कारोबार पर विपरीत असर पड़ा था। दो से तीन महीने से कारोबार रफ्तार पकड़ ही रहा था कि इसी बीच कोरोना की दूसरी लहर आने के चलते मार्च के दूसरे हफ्ते से ही साड़ी कारोबार पर ब्रेक लग गया है। अब पहले के आर्डर निरस्त होने लगे हैं।

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Corona infection hit, sari business reduced by fifty percent, crisis on livelihood of 1.5 lakh weavers in mau
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

कारोबारियों का आना खत्म हो गया है। अनिश्चय की स्थिति उत्पन्न होने लगी है। घरेलू बाजार में अचानक मांग कम होने से  उत्पादन में भी तेजी से गिरावट आई है। आर्डर निरस्त होने से कारोबारियों और लूम संचालकों पर दोहरी मार पड़ रही है। बुनकरों को पर्याप्त काम न मिलने के चलते बुनकरों को भरपेट भोजन मयस्सर नहीं हो पा रहा है। 
 
साड़ी कारोबारी बोले, आर्डर हो रहे निरस्त
कोरोना काल में मंदी के दौर से गुजर रहे साड़ी कारोबारी चिंतित हैं। साड़ी कारोबारी गिरधर अग्रवाल ने कहा कि अब आर्डर मिलना बंद हो गया है। जो पहले के आर्डर मिले थे, अब निरस्त होने लगे हैं। अनिश्चय की  स्थिति पैदा होने लगी है। बाहर से पेमेंट भी नहीं आ पा रहा है। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। साड़ी कारोबारी साजिद अनवर ने कहा कि गत वर्ष लाकडाउन तथा बंदी के चलते काफी नुकसान हुआ था। अब कारोबार पटरी पर आने लगा था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर से कारोबार लगभग बंद की  स्थिति में पहुुंच गया है। जो थोड़ा उत्पादन हो भी रहा है वह भी डंप पड़ा है।  

धागा व्यवसायी नफीस ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते कच्चे माल की बिक्री 20 से 25 प्रतिशत पर आ गई है। कारोबार पर विपरीत असर पड़ने लगा है। मुहम्मदाबादगोहना कस्बा के साड़ी कारोबारी आफताब अहमद ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के चलते मार्च के दूसरे सप्ताह से कारोबार पर असर  पड़ने लगा है। माल डंप पड़ा है। अब पहले के आर्डर निरस्त होने लगे हैं। हालत जल्दी न सुधरी तो स्थिति भयावह हो सकती है।

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