{"_id":"64ce625c7984e7e1deca71dcd327f71c","slug":"chaos-was-seen-in-public-hospitals-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी अस्पतालों में देखी गई अव्यवस्था ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी अस्पतालों में देखी गई अव्यवस्था
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Fri, 08 May 2015 11:37 PM IST
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी अस्पताल व नर्सिंग होम बंद रहने से जिला अस्पताल में शुक्रवार को मरीजों की संख्या काफी ज्यादा रही।
लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई बेहतर व्यवस्था नहीं की गई दिखी। जिला अस्पताल में कई ओपीडी खुले तो रहे, लेकिन चिकित्सक नदारद रहे। परेशान मरीजों को चिकित्सकों का इंतजार कर बैरंग लौटना पड़ा।
जिला अस्पताल सहित जिले में तीन प्राथमिक, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 36 नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम के बंद रहने के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
अधिकांश निजी चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से जिला अस्पताल सहित सरकारी अस्पताल में रोज की अपेक्षा मरीजों की संख्या में काफी इजाफा रहा। लेकिन अव्यवस्था का बोलबाला रहा।
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एंटीबायोटिक दवाओं व सुविधाओं का अकाल रहा। कागज में सभी सुविधाएं दी जा रही हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही रही। सरकारी चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित दिनचर्या से मरीज परेशान दिख रहे थे।
सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं पर नजर डाला जाए तो जिला अस्पताल में ओपीडी नंबर दो खुली थी, लेकिन चिकित्सक नदारद रहे। यही हाल ओपीडी नंबर पांच का रहा।
ओपीडी कक्ष के सामने कोई सूचना चस्पा न होने से मरीज चिकित्सक का इंतजार करते रहे। अंत में थक हारकर मरीजों को बैरंग घर जाना पड़ा। इस संबंध में नगर के सदर चौक से आए जर्नादन पांडेय, मालती देवी, पिपरीडीह से आए श्यामलाल शर्मा, गुड्डू यादव, वंदना सिंह का कहना था कि निजी अस्पताल बंद रहने के चलते जिला अस्पताल आना पड़ा, लेकिन यहां सुविधा के नाम पर शून्य है।
चिकित्सकों के न आने की सूचना भी चस्पा नहीं की जाती है। रतनपुरा से आई कुंती देवी, सावित्री यादव ने बताया कि ‘रतनपुरा सरकारी अस्पतलवा में कउनो सुविधा न हउवे अस्पताल मेें एक दो ही डक्टर रहेले गंभीर बीमारी कह के जिला अस्पताल रेफर कर देहलें ’।
सबसे बुरी स्थिति ग्रामीण इलाकों की रही। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की रही। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 112 चिकित्सकों की तैनाती की गई है।
लेकिन सीएचसी व पीएचसी दो, तीन चिकित्सकों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। निजी चिकित्सकों की हड़ताल के बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए बेहतर इंतजाम नहीं किया जा सका था।
इस बाबत सीएमओ डा. नंदलाल यादव के मोबाइल पर अपराह्न एक बजे संपर्क किया गया तो उनके स्टेनो ने मोबाइल रिसीव किया। बताया कि निजी चिकित्सकों के हड़ताल की जानकारी नहीं है। अभी तक पहले ही जैसे व्यवस्था है।
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लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई बेहतर व्यवस्था नहीं की गई दिखी। जिला अस्पताल में कई ओपीडी खुले तो रहे, लेकिन चिकित्सक नदारद रहे। परेशान मरीजों को चिकित्सकों का इंतजार कर बैरंग लौटना पड़ा।
जिला अस्पताल सहित जिले में तीन प्राथमिक, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 36 नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम के बंद रहने के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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अधिकांश निजी चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से जिला अस्पताल सहित सरकारी अस्पताल में रोज की अपेक्षा मरीजों की संख्या में काफी इजाफा रहा। लेकिन अव्यवस्था का बोलबाला रहा।
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एंटीबायोटिक दवाओं व सुविधाओं का अकाल रहा। कागज में सभी सुविधाएं दी जा रही हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही रही। सरकारी चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित दिनचर्या से मरीज परेशान दिख रहे थे।
सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं पर नजर डाला जाए तो जिला अस्पताल में ओपीडी नंबर दो खुली थी, लेकिन चिकित्सक नदारद रहे। यही हाल ओपीडी नंबर पांच का रहा।
ओपीडी कक्ष के सामने कोई सूचना चस्पा न होने से मरीज चिकित्सक का इंतजार करते रहे। अंत में थक हारकर मरीजों को बैरंग घर जाना पड़ा। इस संबंध में नगर के सदर चौक से आए जर्नादन पांडेय, मालती देवी, पिपरीडीह से आए श्यामलाल शर्मा, गुड्डू यादव, वंदना सिंह का कहना था कि निजी अस्पताल बंद रहने के चलते जिला अस्पताल आना पड़ा, लेकिन यहां सुविधा के नाम पर शून्य है।
चिकित्सकों के न आने की सूचना भी चस्पा नहीं की जाती है। रतनपुरा से आई कुंती देवी, सावित्री यादव ने बताया कि ‘रतनपुरा सरकारी अस्पतलवा में कउनो सुविधा न हउवे अस्पताल मेें एक दो ही डक्टर रहेले गंभीर बीमारी कह के जिला अस्पताल रेफर कर देहलें ’।
सबसे बुरी स्थिति ग्रामीण इलाकों की रही। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की रही। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 112 चिकित्सकों की तैनाती की गई है।
लेकिन सीएचसी व पीएचसी दो, तीन चिकित्सकों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। निजी चिकित्सकों की हड़ताल के बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए बेहतर इंतजाम नहीं किया जा सका था।
इस बाबत सीएमओ डा. नंदलाल यादव के मोबाइल पर अपराह्न एक बजे संपर्क किया गया तो उनके स्टेनो ने मोबाइल रिसीव किया। बताया कि निजी चिकित्सकों के हड़ताल की जानकारी नहीं है। अभी तक पहले ही जैसे व्यवस्था है।