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चंद्रशेखर आजाद, नेताजी भ्ाी आए थे इस कुटिया में
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Fri, 23 Jan 2015 11:22 PM IST
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ब्लाक के देवकली विशुनपुर गांव के समीप स्थित साध्वी की कुटिया आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों की शरणस्थली रही।
इस कुटिया में चंद्रशेखर आजाद, नेताजी भ्ाी क्रांतिकारियों से मिलने आए थे। यह कुटिया खंडहर के रूप में आज भी विद्यमान है।
यहां के लोगों ने इसे शहीद स्मारक के रूप में स्थापित करने की मांग की है। इसके लिए लोगों ने पीएम को पत्र भी भेजा है।
देवकली विशुनपुर गांव के बगल में घने पेड़ों से घिरी साध्वी की कुटिया का अपना अलग अस्तित्व है। सन् 1942 में यह कुटिया क्रांतिकारियों की शरणस्थली रही थी।
क्रांतिकारी रामलोचन राय, झारखंडे राय, सरजू पांडेय, अलगू राय शास्त्री आदि यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाते थे।
इस कुटिया में चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोष जैसे बडे़ क्रांतिकारी भी आए थे। घने पेड़ों से घिरा होने के कारण अंग्रेजों की निगाह से कुटिया बची रही।
गांव के ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नागदेव राय के अनुसार अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान में इस गांव की अति सक्रियता के कारण तत्कालीन जिलाधिकारी आजमगढ़ ने गांव के क्रांतिकारियों को बलपूर्वक दबाने का आदेश दिया था।
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अंग्रेजों ने शरणस्थली बनी कुटिया को जला दिया, लेकिन यहां के क्रांतिकारियों ने लड़ाई से अपने कदम पीछे नहीं खींचे। इस गांव के ही क्रांतिकारी रामलोचन राय ने नेताजी से प्रेरित होकर अंग्रेजों को लगान देना बंद करवा दिया।
जानकारी होने पर अंग्रेजों को देवकली विशुनपुर आना पड़ा। कुछ दिन बाद अंग्रेजों ने धोखे से रामलोचन राय को गिरफ्तार कर लिया।
अनेक यातनाएं देने के बाद भी उन्होंने अपना मिशन बंद नहीं किया। देश आजाद होने के बाद रामलोचन राय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन लेने मना कर दिया।
उन्होंने अपनी जमीन देकर क्षेत्र के गरीब बच्चों के लिए स्कूल खुलवाया। इस संबंध में गांव के पीयूष राय, नेवेंद्र राय, अवधेश राय, वृजकिशोर राय, रजनीश राय का कहना है कि गांव के क्रांतिकारियों पर हम लोगों को गर्व है।
अमर शहीदों की शरण स्थली रही कुटिया पर शहीद स्मारक बनाए जाने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा गया बावजूद आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।
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इस कुटिया में चंद्रशेखर आजाद, नेताजी भ्ाी क्रांतिकारियों से मिलने आए थे। यह कुटिया खंडहर के रूप में आज भी विद्यमान है।
यहां के लोगों ने इसे शहीद स्मारक के रूप में स्थापित करने की मांग की है। इसके लिए लोगों ने पीएम को पत्र भी भेजा है।
देवकली विशुनपुर गांव के बगल में घने पेड़ों से घिरी साध्वी की कुटिया का अपना अलग अस्तित्व है। सन् 1942 में यह कुटिया क्रांतिकारियों की शरणस्थली रही थी।
क्रांतिकारी रामलोचन राय, झारखंडे राय, सरजू पांडेय, अलगू राय शास्त्री आदि यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाते थे।
इस कुटिया में चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोष जैसे बडे़ क्रांतिकारी भी आए थे। घने पेड़ों से घिरा होने के कारण अंग्रेजों की निगाह से कुटिया बची रही।
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गांव के ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नागदेव राय के अनुसार अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान में इस गांव की अति सक्रियता के कारण तत्कालीन जिलाधिकारी आजमगढ़ ने गांव के क्रांतिकारियों को बलपूर्वक दबाने का आदेश दिया था।
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अंग्रेजों ने शरणस्थली बनी कुटिया को जला दिया, लेकिन यहां के क्रांतिकारियों ने लड़ाई से अपने कदम पीछे नहीं खींचे। इस गांव के ही क्रांतिकारी रामलोचन राय ने नेताजी से प्रेरित होकर अंग्रेजों को लगान देना बंद करवा दिया।
जानकारी होने पर अंग्रेजों को देवकली विशुनपुर आना पड़ा। कुछ दिन बाद अंग्रेजों ने धोखे से रामलोचन राय को गिरफ्तार कर लिया।
अनेक यातनाएं देने के बाद भी उन्होंने अपना मिशन बंद नहीं किया। देश आजाद होने के बाद रामलोचन राय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन लेने मना कर दिया।
उन्होंने अपनी जमीन देकर क्षेत्र के गरीब बच्चों के लिए स्कूल खुलवाया। इस संबंध में गांव के पीयूष राय, नेवेंद्र राय, अवधेश राय, वृजकिशोर राय, रजनीश राय का कहना है कि गांव के क्रांतिकारियों पर हम लोगों को गर्व है।
अमर शहीदों की शरण स्थली रही कुटिया पर शहीद स्मारक बनाए जाने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा गया बावजूद आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।