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बजट खपाने में जुटे रहे अधिकारी
Sun, 31 Mar 2019 11:58 PM IST
पवन सिंह
mau
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Published by: पवन सिंह
Updated Sun, 31 Mar 2019 11:58 PM IST
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कलेक्ट्रेट स्थित ट्रेजरी विभाग में रविवार को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन काम करते कर्मचारी।
- फोटो : mau
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वित्तीय वर्ष का आखिरी दिन रविवार का अवकाश होने के बाद भी अधिकांश सरकारी विभागों में बजट खपाने की होड़ मची रही। रविवार विभिन्न विभागों के सरकारी तथा गैर सरकारी कार्यालय देर शाम तक खुले रहे। कोषागार में सुबह से ही अधिकारी, कर्मचारी कार्यालय आकर अपने कार्य को पूरा करने में जुटे रहे।
जिला योजना समिति से वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिले के 42विभागों को अलग-अलग विकास कार्यो के लिए दो अरब 68 करोड़ 58 लाख जारी किया गया था। लेकिन अभी तक 50 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है।
बजट वापस जाने के डर से ही बजट को खपाने के लिए अधिकारी, कर्मचारी शनिवार की शाम से ही योजना बनाने में जुटे रहे। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को रविवार का अवकाश था, लेकिन अवकाश के बाद भी अधिकांश सरकारी कार्यालयों के अधिकारी तथा कर्मचारी अधूरे कार्यो को पूरा करने के लिए सुबह से अपनी सीट पर बैठ गए। देर शाम तक सरकारी कार्यालय खुले रहे।
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अंतिम तिथि पर योजनाओं के लाभांवित लोगों को लाभ देने तथा कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए कोषागार कार्यालय भी खुले रहे। कोषागार में कार्य का बोझ बढ़ने के चलते अधिकारी, कर्मचारी कार्यालय देर शाम तक कंप्यूटर पर नजर गड़ाए रहे। आरटीओ ने वाहनों के बकाया टैक्स जमा किए। सभी बैंकों में देर रात तक क्लोजिंग का कामकाज हुआ।
सरकारी लेन-देन वाली बैंक शाखाएं खुली थीं। बिजली विभाग में बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए सरचार्ज माफी योजना की 31 मार्च अंतिम तिथि के चलते उपभोक्ताओं की भारी भीड़ रही। जमा बिल का मिलान करने में अधिकारी कर्मचारी देर शाम तक लगे रहे। उधर नगर के कई मुहल्लों में सड़कों की पिचिंग करने का काम चलता रहा।
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जिला योजना समिति से वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिले के 42विभागों को अलग-अलग विकास कार्यो के लिए दो अरब 68 करोड़ 58 लाख जारी किया गया था। लेकिन अभी तक 50 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है।
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बजट वापस जाने के डर से ही बजट को खपाने के लिए अधिकारी, कर्मचारी शनिवार की शाम से ही योजना बनाने में जुटे रहे। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को रविवार का अवकाश था, लेकिन अवकाश के बाद भी अधिकांश सरकारी कार्यालयों के अधिकारी तथा कर्मचारी अधूरे कार्यो को पूरा करने के लिए सुबह से अपनी सीट पर बैठ गए। देर शाम तक सरकारी कार्यालय खुले रहे।
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अंतिम तिथि पर योजनाओं के लाभांवित लोगों को लाभ देने तथा कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए कोषागार कार्यालय भी खुले रहे। कोषागार में कार्य का बोझ बढ़ने के चलते अधिकारी, कर्मचारी कार्यालय देर शाम तक कंप्यूटर पर नजर गड़ाए रहे। आरटीओ ने वाहनों के बकाया टैक्स जमा किए। सभी बैंकों में देर रात तक क्लोजिंग का कामकाज हुआ।
सरकारी लेन-देन वाली बैंक शाखाएं खुली थीं। बिजली विभाग में बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए सरचार्ज माफी योजना की 31 मार्च अंतिम तिथि के चलते उपभोक्ताओं की भारी भीड़ रही। जमा बिल का मिलान करने में अधिकारी कर्मचारी देर शाम तक लगे रहे। उधर नगर के कई मुहल्लों में सड़कों की पिचिंग करने का काम चलता रहा।