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बसपा ने पहली बार महिला को बनाया प्रत्याशी
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मधुबन (मऊ)। जिले में यूं तो अभी सभी दलों ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं किया है। लेकिन बसपा ने चारों विधान सभा क्षेत्रों के लिए प्रभारियों की घोषणा कर दिया है। इसमें पार्टी ने मधुबन विधान सभा क्षेत्र से एक महिला को प्रभारी बनाया है। इसके पूर्व 2017 में सपा ने मधुबन से एक महिला को प्रत्याशी बनाया था लेकिन ऐन वक्त पर गठबंधन हो जाने पर यह सीट कांग्रेस को देनी पड़ी इसलिए महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ने से वंचित रह गई। बसपा पहले अपने संभावित प्रत्याशियों को प्रभारी बनाती है और बाद में उन्हें ही प्रत्याशी घोषित करती है। सपा ,कांग्रेस और भाजपा सहित अन्य पार्टियां महिला प्रकोष्ठों में महिलाओं को मनोनीत कर रही हैं। लेकिन बसपा से सीधे प्रत्याशी बनाकर महिलाओं के लिए दरवाजे खोल दिया है। जिले में ऐसा करने वाली बसपा पहली पार्टी बन गई है।
जिले में अब तक कांग्रेस को छोड़कर अन्य किसी भी दल ने महिला को विधान सभा का टिकट नहीं दिया है। महिलाओं को अधिक से अधिक सुविधाएं देने, उनके कल्याण के लिए योजनाएं चलाने,महिला सशक्तीकरण के दावे तो सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं। कई राजनीतिक दल महिलाओं को अपनी पार्टी में नए नए पदों पर मनोनीत कर रहे हैं। महिलाओं का यह मनोनयन क्षेत्रों में जाति के आधार पर की जा रही है। मतदाताओं को लुभाने के लिए उनके क्षेत्र में जातियों की संख्या को देखते हुए राजनीतिक दल महिलाओं को अपनी पार्टियों में पदाधिकारी बना रहे हैं। लेकिन महिलाओं को प्रत्याशी बनाने से बच रहे हैं। जिले में चार विधान सभा सीटों पर अब तक बसपा को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। बसपा ने मधुबन विधान सभा क्षेत्र से एक महिला अधिवक्ता को प्रभारी घोषित किया है।
कल्पनाथ राय के जीवन काल में नत्थूपुर से उनकी पत्नी सुधा राय 1996 से निर्दल चुनाव लड़ी थीं। इनके अलावा चंद्रलेखा राय 2007 में घोसी विधानसभा से भासपा से चुनाव लड़ी थीं। लेकिन वे भी हार गईं। कल्पनाथ राय के निधन के बाद उनकी बहू सीता राय साल 2002 में और 2007 में सदर विधान सभा से भाजपा समर्थित जद यू से चुनाव लड़ीं थीं। लेकिन दोनों बार वे चुनाव हार गई थीं। पूर्व पालिकाध्यक्ष राना खातून भी सात 2012 में घोसी विधान सभा से चुनाव लड़ चुकी हैं।
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साल 2012 में मधुबन विधान सभा से डा. सुमित्रा यादव को प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन ऐन वक्त पर गठबंधन हो जाने पर यह सीट कांग्रेस को चली गई और कांग्रेस ने अमरेश चंद्र पांडेय को प्रत्याशी बना दिया। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी के निर्देशानुसार जिले में एक सीट महिला प्रत्याशी को दिए जाने की संभावना है।
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जिले में अब तक कांग्रेस को छोड़कर अन्य किसी भी दल ने महिला को विधान सभा का टिकट नहीं दिया है। महिलाओं को अधिक से अधिक सुविधाएं देने, उनके कल्याण के लिए योजनाएं चलाने,महिला सशक्तीकरण के दावे तो सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं। कई राजनीतिक दल महिलाओं को अपनी पार्टी में नए नए पदों पर मनोनीत कर रहे हैं। महिलाओं का यह मनोनयन क्षेत्रों में जाति के आधार पर की जा रही है। मतदाताओं को लुभाने के लिए उनके क्षेत्र में जातियों की संख्या को देखते हुए राजनीतिक दल महिलाओं को अपनी पार्टियों में पदाधिकारी बना रहे हैं। लेकिन महिलाओं को प्रत्याशी बनाने से बच रहे हैं। जिले में चार विधान सभा सीटों पर अब तक बसपा को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। बसपा ने मधुबन विधान सभा क्षेत्र से एक महिला अधिवक्ता को प्रभारी घोषित किया है।
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कल्पनाथ राय के जीवन काल में नत्थूपुर से उनकी पत्नी सुधा राय 1996 से निर्दल चुनाव लड़ी थीं। इनके अलावा चंद्रलेखा राय 2007 में घोसी विधानसभा से भासपा से चुनाव लड़ी थीं। लेकिन वे भी हार गईं। कल्पनाथ राय के निधन के बाद उनकी बहू सीता राय साल 2002 में और 2007 में सदर विधान सभा से भाजपा समर्थित जद यू से चुनाव लड़ीं थीं। लेकिन दोनों बार वे चुनाव हार गई थीं। पूर्व पालिकाध्यक्ष राना खातून भी सात 2012 में घोसी विधान सभा से चुनाव लड़ चुकी हैं।
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साल 2012 में मधुबन विधान सभा से डा. सुमित्रा यादव को प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन ऐन वक्त पर गठबंधन हो जाने पर यह सीट कांग्रेस को चली गई और कांग्रेस ने अमरेश चंद्र पांडेय को प्रत्याशी बना दिया। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी के निर्देशानुसार जिले में एक सीट महिला प्रत्याशी को दिए जाने की संभावना है।