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मऊः सड़कों पर पसरा पड़ा बायोमेडिकल कचरा, जिम्मेदार बेपरवाह
Sat, 20 Mar 2021 12:01 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 12:01 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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मऊ के ब्रह्मस्थान, मुंशीपुरा, निजामुद्दीनपुरा, भीटी और बहादुरगंज मोड़ के पास बायोमेडिकल कचरा खुले में फेंका जा रहा है जिससे प्रदूषण और बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। बायोमेडिकल कचरा का प्रबंधन करने के निर्देश के बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नगर निकायों में स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है। ऐसे में निकायों और प्रशासन की ओर से सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। नगर के हर चौराहे-तिराहे पर लगे होर्डिंग पर स्वच्छता की अपील की गई है लेकिन स्वच्छता बनाए रखने के लिए नगर पालिका की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नगर क्षेत्र में बड़े निजी अस्पतालों की संख्या 20 से ज्यादा है। नर्सिग होम की संख्या इससे दोगुनी है। तीस से अधिक पैथालाजी सेंटर हैं। इनमें कुछ को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर अस्पतालों, नर्सिंग होम और पैथालाजी सेंटरों में नियमानुसार बायोमेडिकल कचरे का प्रबंधननहीं किया जाता है।
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कई अस्पतालों का बायोमेडिकल कचरा खुले में फेंक दिया जाता है जो खतरनाक साबित हो रहा है। नगर के ब्रम्हस्थान, मुंशीपुरा, निजामुद्दीनपुरा, भीटी, बहादुरगंज मोड़ पर खाली स्थानों पर बायोमेडिकल कचरा फेंका गया है। नियमानुसार नगर पालिका प्रशासन बायो मेडिकल कचरा खुले में फेंकने वालों को नोटिस दे सकता है या इसकी सूचना प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग को दे सकता है लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती है।
बायोमेडिकल कचरा खुले में फेंकने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के साथ संक्रमण और बीमारियां फैलने का खतरा होता है। बायोमेडिकल कचरे में बची दवाओं के साथ, डिस्पोजेबल सिरिंज, इंजेक्शन और सूइयां भी रहती हैं। कभी कभी मवेशी कचरे के साथ घातक सिरिंज को खा लेते हैं जो जानलेवा साबित होता है।
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नगर निकायों में स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है। ऐसे में निकायों और प्रशासन की ओर से सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। नगर के हर चौराहे-तिराहे पर लगे होर्डिंग पर स्वच्छता की अपील की गई है लेकिन स्वच्छता बनाए रखने के लिए नगर पालिका की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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नगर क्षेत्र में बड़े निजी अस्पतालों की संख्या 20 से ज्यादा है। नर्सिग होम की संख्या इससे दोगुनी है। तीस से अधिक पैथालाजी सेंटर हैं। इनमें कुछ को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर अस्पतालों, नर्सिंग होम और पैथालाजी सेंटरों में नियमानुसार बायोमेडिकल कचरे का प्रबंधननहीं किया जाता है।
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कई अस्पतालों का बायोमेडिकल कचरा खुले में फेंक दिया जाता है जो खतरनाक साबित हो रहा है। नगर के ब्रम्हस्थान, मुंशीपुरा, निजामुद्दीनपुरा, भीटी, बहादुरगंज मोड़ पर खाली स्थानों पर बायोमेडिकल कचरा फेंका गया है। नियमानुसार नगर पालिका प्रशासन बायो मेडिकल कचरा खुले में फेंकने वालों को नोटिस दे सकता है या इसकी सूचना प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग को दे सकता है लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती है।
बायोमेडिकल कचरा खुले में फेंकने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के साथ संक्रमण और बीमारियां फैलने का खतरा होता है। बायोमेडिकल कचरे में बची दवाओं के साथ, डिस्पोजेबल सिरिंज, इंजेक्शन और सूइयां भी रहती हैं। कभी कभी मवेशी कचरे के साथ घातक सिरिंज को खा लेते हैं जो जानलेवा साबित होता है।
नष्ट नहीं किया जाता बायो मेडिकल कचरा
अस्पतालों का कचरा खुले स्थान पर नहीं फेंका जा सकता है। इससे प्रदूषण फैलता है। साथ ही लोगों में बीमारी होने की आशंका होती है। इसे नष्ट करना अस्पताल की जिम्मेदारी होती है। इसके लिए यह कचरा मशीन में डालकर नष्ट किया जाता है। जिला अस्पताल का कचरा लेने के लिए अलग से वाहन आता है, जो इस तरह के कचरे को मशीन में डालकर नष्ट करता है।
सामान्य कचरा में बायोमेडिकल कचरा डंप किया जाता है तो संबंधित को नोटिस जारी कर प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग को कराया जाएगा। साथ ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-नरेश कुमार, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक, नगर पालिका।