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भरत मिलाप पर छलक उठीं आंख
mau
Updated Sun, 21 Oct 2018 11:27 PM IST
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घोसी नगर के बड़ागांव भरौटी में बवाल के बाद बिखरा सामान और पूजा पंडाल।
- फोटो : mau
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श्रीरामलीला मेला समिति के तत्वाधान में शहर में शाही कटरा मस्जिद के सामने आयोजित भरत मिलाप का कार्यक्रम शनिवार की रात शुरू होकर रविवार की भोर में परंपरागत तरीके से सौहार्द के बीच संपन्न हुआ। जिले के आला अधिकारी भारी संख्या में फोर्स के साथ मौजूद रहे। श्रीराम ने भरत को गले लगाया तो पूरा मजमा हरहर महादेव और जय श्रीराम के जयकारे लगाने लगा। प्रभु श्रीराम और भरत का यह भावपूर्ण मिलन देख मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें छलक उठीं।
पौ फटते ही शाही कटरा मस्जिद में फज्र की नमाज शुरू हुई, ठीक उसी समय पूरा क्षेत्र जयश्रीराम और हरहर महादेव के उद्घोष से गूुंज उठा। इसके बाद प्रभु श्री राम के न आने पर तपस्वी का जीवन जी रहे भरत ने विलाप करना शुरू किया। भरत का विलाप सुन दर्शकों की आंखें नम हो गई थी। हजारों की भीड़ शांत होकर भरत, हनुमान का संवाद सुन रही थी। इसके बाद श्री राम के आते ही चारों भाइयों का मिलन होता है। इस दौरान एक बार फिर से हरहर महादेव और जयश्रीराम के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
पिता की आज्ञा पर वन गए प्रभु श्री राम, माता सीता और भ्राता लखन के आगमन की राह देखते हुए भरत एक-एक दिन गिन रहे थे। जैसे ही 14 वर्ष का समय पूरा हुआ, लखन लाल बेचैन हो गए, इस दौरान भरत अपने बड़े भाई के वियोग में रोने लगे। बोले 14 वर्ष का समय पूरा हुुआ लेकिन प्रभु श्री राम अभी तक नहीं आए, निश्चित तौर पर उनके मन में मेरे प्रति गलत भाव आ गया है, इसके कारण उन्होंने मुझे भुलने का निश्चय कर लिया है।
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इस दौरान भरत के मन में यह आया कि यदि प्रभु के निगाहों में मै अपराधी हूं, तो फिर मेरा जीवित रहना हितकर नही होगा। ऐसे में भरत प्राण त्यागने का मन बना लेतें है। जिस समय भरत विलाप करते हुए ऊहापोह की स्थिति में थे, उसी वक्त ब्राह्मण का रूप धरे हनुमान का वहां आगमन होता है। भरत के विरह और व्याकुलता को देख हनुमान ने समय गवांए बिना ही भरत को बताया कि प्रभु श्री राम कुछ क्षणों में यहां पधारने वाले हैं। यह सुन भरत संदेशवाहक से उनका परिचय पूछते है। इस दौरान हनुमान अपना परिचय देकर उन्हे माता सीता के हरण से लेकर रावण वध तक का वृत्तांत सुनाते है। इस बीच प्रभु श्री राम का पुष्पक विमान वहां पहुंचता है, इसके बाद चारों भाईयों का मिलन होता है।
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पौ फटते ही शाही कटरा मस्जिद में फज्र की नमाज शुरू हुई, ठीक उसी समय पूरा क्षेत्र जयश्रीराम और हरहर महादेव के उद्घोष से गूुंज उठा। इसके बाद प्रभु श्री राम के न आने पर तपस्वी का जीवन जी रहे भरत ने विलाप करना शुरू किया। भरत का विलाप सुन दर्शकों की आंखें नम हो गई थी। हजारों की भीड़ शांत होकर भरत, हनुमान का संवाद सुन रही थी। इसके बाद श्री राम के आते ही चारों भाइयों का मिलन होता है। इस दौरान एक बार फिर से हरहर महादेव और जयश्रीराम के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
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पिता की आज्ञा पर वन गए प्रभु श्री राम, माता सीता और भ्राता लखन के आगमन की राह देखते हुए भरत एक-एक दिन गिन रहे थे। जैसे ही 14 वर्ष का समय पूरा हुआ, लखन लाल बेचैन हो गए, इस दौरान भरत अपने बड़े भाई के वियोग में रोने लगे। बोले 14 वर्ष का समय पूरा हुुआ लेकिन प्रभु श्री राम अभी तक नहीं आए, निश्चित तौर पर उनके मन में मेरे प्रति गलत भाव आ गया है, इसके कारण उन्होंने मुझे भुलने का निश्चय कर लिया है।
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इस दौरान भरत के मन में यह आया कि यदि प्रभु के निगाहों में मै अपराधी हूं, तो फिर मेरा जीवित रहना हितकर नही होगा। ऐसे में भरत प्राण त्यागने का मन बना लेतें है। जिस समय भरत विलाप करते हुए ऊहापोह की स्थिति में थे, उसी वक्त ब्राह्मण का रूप धरे हनुमान का वहां आगमन होता है। भरत के विरह और व्याकुलता को देख हनुमान ने समय गवांए बिना ही भरत को बताया कि प्रभु श्री राम कुछ क्षणों में यहां पधारने वाले हैं। यह सुन भरत संदेशवाहक से उनका परिचय पूछते है। इस दौरान हनुमान अपना परिचय देकर उन्हे माता सीता के हरण से लेकर रावण वध तक का वृत्तांत सुनाते है। इस बीच प्रभु श्री राम का पुष्पक विमान वहां पहुंचता है, इसके बाद चारों भाईयों का मिलन होता है।