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बैंककर्मियों पर बढ़ा काम का दबाव
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Fri, 25 Nov 2016 11:15 PM IST
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1000 और 500 रुपये के नोट बंद किए जाने के बाद अगले दिन से ही बैंकों पर उमड़ने वाली भीड़ से बैंकों को आज तक निजात नहीं मिल पाई है। हालत यह है कि बैंक कर्मचारी लगातार काम तो कर ही रहे हैं लेकिन उन्हें ओवरटाइम के रूप में देर रात तक हिसाब किताब एवं डाक्यूमेंट के विवरण के लिए रुकना पड़ रहा है।
एसबीआई बैंक की भीटी शाखा के प्रबंधक विशाल प्रकाश जब से नोटबंदी का फरमान आया है तब से लेकर आज तक बैंक की व्यवस्था को दुरुस्त करने में दिन रात एक किए हुए हैं। बताया कि बैंक में अधिक से अधिक फुटकर कैश की व्यवस्था, कर्मचारियों को उनके काम के बारे में लगातार उत्साहित करना एवं प्लान बनाकर उपभोक्ताओं के काम को सलीके से निपटाने पर ध्यान देने में वह घर परिवार के बारे में भी नहीं सोच पा रहे हैं। रात में वह देर रात को घर जाते हैं और सुबह ही बैंक आकर काम के बारे में सोचना पड़ता है।
यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के मंत्री एवं पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी रामअवतार सिंह जब से नोटबंदी हुई तब से प्रतिदिन 11 बजे के बाद ही घर जाते हैं। जब वह घर जाते हैं तो परिवार के सदस्य सोए मिलते हैं। सुबह ही भागे-भागे फिर चले आते हैं। पिछले दिनों रविवार और शनिवार की छुट्टी भी ना मिली। परिवार के साथ कहीं जाने की बात तो दूर रिश्तेनातों में पड़ी शादियों में निमंत्रण करने जाने की फुरसत नहीं है। कहते हैं कि एक तो ओवरटाईम करना पड़ रहा है दूसरे सरकार को कर्मचारियों की कोई चिंता नहीं है। काम के घंटे निर्धारित ना होने से बैंक कर्मियों को विवशता के चलते नौकरी करनी ही है सो इसका विरोध भी कैसे किया जाए। प्रतिदिन चार बजे के बाद अतिरिक्त काम जैसे कैश का मिलान, डाक्यूमेंट आदि के रखरखाव और अगले दिन की प्लानिंग कि कैसे कैश की व्यवस्था और भीड़ को सहुलियत दी जाए इस पर कार्य करना पड़ता है।
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एसबीआई बैंक की भीटी शाखा के प्रबंधक विशाल प्रकाश जब से नोटबंदी का फरमान आया है तब से लेकर आज तक बैंक की व्यवस्था को दुरुस्त करने में दिन रात एक किए हुए हैं। बताया कि बैंक में अधिक से अधिक फुटकर कैश की व्यवस्था, कर्मचारियों को उनके काम के बारे में लगातार उत्साहित करना एवं प्लान बनाकर उपभोक्ताओं के काम को सलीके से निपटाने पर ध्यान देने में वह घर परिवार के बारे में भी नहीं सोच पा रहे हैं। रात में वह देर रात को घर जाते हैं और सुबह ही बैंक आकर काम के बारे में सोचना पड़ता है।
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यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के मंत्री एवं पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी रामअवतार सिंह जब से नोटबंदी हुई तब से प्रतिदिन 11 बजे के बाद ही घर जाते हैं। जब वह घर जाते हैं तो परिवार के सदस्य सोए मिलते हैं। सुबह ही भागे-भागे फिर चले आते हैं। पिछले दिनों रविवार और शनिवार की छुट्टी भी ना मिली। परिवार के साथ कहीं जाने की बात तो दूर रिश्तेनातों में पड़ी शादियों में निमंत्रण करने जाने की फुरसत नहीं है। कहते हैं कि एक तो ओवरटाईम करना पड़ रहा है दूसरे सरकार को कर्मचारियों की कोई चिंता नहीं है। काम के घंटे निर्धारित ना होने से बैंक कर्मियों को विवशता के चलते नौकरी करनी ही है सो इसका विरोध भी कैसे किया जाए। प्रतिदिन चार बजे के बाद अतिरिक्त काम जैसे कैश का मिलान, डाक्यूमेंट आदि के रखरखाव और अगले दिन की प्लानिंग कि कैसे कैश की व्यवस्था और भीड़ को सहुलियत दी जाए इस पर कार्य करना पड़ता है।
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