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किराया के भवन में संचालित आयुवेर्दिक अस्पताल
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मऊ। मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा के रेलवे स्टेशन के सामने 15 बेड का सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल मरीजों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है। आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती और अन्य सर्जिकल सुविधाएं देने पर 1996 से रोक लगा दिए जाने के बाद केवल मरीजों की आमद और कुछ दवा वितरण का केंद्र बनकर रह गया है। हालत है कि उधार के सिंदूर का की तर्ज पर किराए के भवन में चल रहे इस आयुर्वेदिक अस्पताल में न तो मरीजों की भर्ती करने की सुविधा है और न ही उनकी देखभाल करने के लिए पर्याप्त स्टाफ है। एक मात्र चिकित्सक और तीन स्टाफ नर्स के भरोसे चल रहे उक्त हॉस्पिटल की पूरी स्थिति भगवान भरोसे ही है।
कस्बा के गांधी आश्रम रोड पर किराए के मकान में 15 बेड वाले आयुर्वेद अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। इस सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर और तीन नर्स के अतिरिक्त एक स्वीपर की नियुक्ति है। इस अस्पताल में नियमानुसार एक चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट समेत कुल 12 कर्मचारियों का पद हैं लेकिन मौजूदा समय में मात्र चार कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं। अस्पताल में आयुर्वेदिक दवाओं का स्टाक जमा है। लेकिन दवाओं को रखने के लिए जगह व कमरों की कमी, रखरखाव की समुचित व्यवस्था न होने और देखभाल के लिए फार्मासिस्ट की कमी से दवाओं को खुले और नीचे जमीन पर रखा गया है।
आयुर्वेद अस्पताल के अपने खुद के सरकारी भवन को लेकर कई बार शासन प्रशासन में पत्र भेजा गया लेकिन यह सभी कवायद नक्कारखाने की तूती बनकरा रह गई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो 1993 तक प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती कर उनको सभी सर्जिकल सुविधाएं देने का प्रावधान था। लेकिन आईएमए द्वारा आयुर्वेद में सर्जरी और भर्ती की सुविधा पर रोक लगाए जाने की मांग के बाद कोर्ट ने रोक लगा दी है तब से लेकर आज तक आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती और ऑपरेशन की सुविधा बंद है। इस अस्पताल में रोजाना यहां 34 से 40 मरीज आते हैं।
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके साहू ने बताया कि प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में 1993 तक मरीजों को भर्ती कर उनको सभी सर्जिकल सुविधाएं दिए जाने का प्रावधान था। लेकिन आईएमए द्वारा आयुर्वेद में सर्जरी और भर्ती की सुविधा पर रोक लगाए जाने की मांग के बाद कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई है तबसे लेकर आज तक आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती और ऑपरेशन की सुविधा बंद है। अस्पताल आने वाले सभी मरीजों का बेहतर इलाज कराने का प्रयास जारी है।
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कस्बा के गांधी आश्रम रोड पर किराए के मकान में 15 बेड वाले आयुर्वेद अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। इस सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर और तीन नर्स के अतिरिक्त एक स्वीपर की नियुक्ति है। इस अस्पताल में नियमानुसार एक चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट समेत कुल 12 कर्मचारियों का पद हैं लेकिन मौजूदा समय में मात्र चार कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं। अस्पताल में आयुर्वेदिक दवाओं का स्टाक जमा है। लेकिन दवाओं को रखने के लिए जगह व कमरों की कमी, रखरखाव की समुचित व्यवस्था न होने और देखभाल के लिए फार्मासिस्ट की कमी से दवाओं को खुले और नीचे जमीन पर रखा गया है।
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आयुर्वेद अस्पताल के अपने खुद के सरकारी भवन को लेकर कई बार शासन प्रशासन में पत्र भेजा गया लेकिन यह सभी कवायद नक्कारखाने की तूती बनकरा रह गई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो 1993 तक प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती कर उनको सभी सर्जिकल सुविधाएं देने का प्रावधान था। लेकिन आईएमए द्वारा आयुर्वेद में सर्जरी और भर्ती की सुविधा पर रोक लगाए जाने की मांग के बाद कोर्ट ने रोक लगा दी है तब से लेकर आज तक आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती और ऑपरेशन की सुविधा बंद है। इस अस्पताल में रोजाना यहां 34 से 40 मरीज आते हैं।
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके साहू ने बताया कि प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में 1993 तक मरीजों को भर्ती कर उनको सभी सर्जिकल सुविधाएं दिए जाने का प्रावधान था। लेकिन आईएमए द्वारा आयुर्वेद में सर्जरी और भर्ती की सुविधा पर रोक लगाए जाने की मांग के बाद कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई है तबसे लेकर आज तक आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती और ऑपरेशन की सुविधा बंद है। अस्पताल आने वाले सभी मरीजों का बेहतर इलाज कराने का प्रयास जारी है।