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Mau News: कागज पर जागरूकता, जमीन पर शौचालयों पर लटका ताला
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गांवों में बंद पड़े शौचालय
मऊ। खुले में शौच से मुक्ति के लिए सरकारी धन खर्च कर बनाए गए शौचालय अब विभागीय जागरूकता और निगरानी व्यवस्था की हकीकत बयां कर रहे हैं। घोसी ब्लॉक क्षेत्र के 72 गांवों में करीब 11,520 निजी शौचालय बनवाए गए, लेकिन कई का इस्तेमाल शौच के बजाय लकड़ी, उपले, भूसा और घरेलू सामान रखने के लिए हो रहा है।
कई शौचालयों पर लंबे समय से ताले लटके हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी स्वच्छता अभियान के अपेक्षित परिणाम पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने ग्रामीणों को खुले में शौच से निजात दिलाने के उद्देश्य से निजी शौचालयों के निर्माण के लिए प्रत्येक लाभार्थी को 12 हजार रुपये का अंशदान दिया। मनरेगा के तहत मजदूर भी उपलब्ध कराए गए।
प्रत्येक गांव में औसतन 150 से 200 शौचालयों का निर्माण कराया गया। निर्माण के दौरान ग्रामीणों को इनके नियमित इस्तेमाल और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया, लेकिन इसके बाद नियमित निगरानी का अभाव दिखाई दे रहा है। कई गांवों में शौचालय बंद पड़े हैं तो कुछ में लकड़ी, उपले, भूसा और अन्य घरेलू सामान भरा हुआ है।
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रामशरीख राजभर और मोतीचंद ने कहा कि जिन शौचालयों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उनके पीछे की वजह पता लगाई जानी चाहिए। जहां पानी की कमी, निर्माण में खामी या मरम्मत की जरूरत है, वहां तत्काल समाधान कराया जाए। संतोष कुमार और हरिओम मौर्य ने ग्राम पंचायतवार शौचालयों की सूची तैयार कर स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की।
खंड विकास अधिकारी कृष्ण मुरारी लाल श्रीवास्तव ने कहा कि गांवों में निर्मित निजी शौचालयों की स्थिति की जानकारी कराई जाएगी। यदि किसी शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है या उसमें अन्य सामान रखा जा रहा है तो संबंधित ग्राम पंचायत के माध्यम से लाभार्थियों को नियमित इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जाएगा।
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कई शौचालयों पर लंबे समय से ताले लटके हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी स्वच्छता अभियान के अपेक्षित परिणाम पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने ग्रामीणों को खुले में शौच से निजात दिलाने के उद्देश्य से निजी शौचालयों के निर्माण के लिए प्रत्येक लाभार्थी को 12 हजार रुपये का अंशदान दिया। मनरेगा के तहत मजदूर भी उपलब्ध कराए गए।
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प्रत्येक गांव में औसतन 150 से 200 शौचालयों का निर्माण कराया गया। निर्माण के दौरान ग्रामीणों को इनके नियमित इस्तेमाल और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया, लेकिन इसके बाद नियमित निगरानी का अभाव दिखाई दे रहा है। कई गांवों में शौचालय बंद पड़े हैं तो कुछ में लकड़ी, उपले, भूसा और अन्य घरेलू सामान भरा हुआ है।
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रामशरीख राजभर और मोतीचंद ने कहा कि जिन शौचालयों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उनके पीछे की वजह पता लगाई जानी चाहिए। जहां पानी की कमी, निर्माण में खामी या मरम्मत की जरूरत है, वहां तत्काल समाधान कराया जाए। संतोष कुमार और हरिओम मौर्य ने ग्राम पंचायतवार शौचालयों की सूची तैयार कर स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की।
खंड विकास अधिकारी कृष्ण मुरारी लाल श्रीवास्तव ने कहा कि गांवों में निर्मित निजी शौचालयों की स्थिति की जानकारी कराई जाएगी। यदि किसी शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है या उसमें अन्य सामान रखा जा रहा है तो संबंधित ग्राम पंचायत के माध्यम से लाभार्थियों को नियमित इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जाएगा।