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गर्मी शुरू होते ही गहराने लगा बिजली संकट
mau
Updated Thu, 07 Apr 2016 12:32 AM IST
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला
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जैसे जैसे मौसम में गर्मी की तल्खी बढ़ रही है वैसे वैसे अघोषित बिजली कटौती में भी बढ़ोतरी होते जा रही है। इसके चलते नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है।
बुनकरों की मानें तो नगर में 20 घंटे की जगह लगातार 10 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। वहीं ग्रामीण इलाकों में विद्युत आपूूर्ति व्यवस्था दयनीय होती जा रही है। विद्युत उपकेंद्रों में तकनीकी खामी, जर्जर तारों के टूटने तथा ट्रिपिंग का सिलसिला जारी है।
इससे क़ृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। कुटीर उद्योग तो दम ही तोड़ रहे हैं। विभागीय अधिकारी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। नगर का साड़ी प्रमुख व्यवसाय है। कम बिजली मिलने से बुनकरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में मड़ाई कार्य तेजी से चल रहा है। बिजली संकट बढ़ता ही जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति का कोई शेड्यूल ही नहीं रह गया है। देर रात में बिजली आ रही है। तड़के से ही गुल हो जा रही है। किसानों की मांग कम से कम 20 घंटे की है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रत्येक दिन कम से कम 20 बार फीडर ट्रिप कर जा रहा है। जर्जर तार के टूटने, फाल्ट तथा विद्युत उपकेंद्रों में तकनीकी खामी आने से घंटों बिजली गुल हो जा रही है। विद्युत कर्मी शटडाउन लेकर जब तक फाल्ट ढूंढते हैं तब तक बिजली गुल होने का समय हो जाता है।
ब्लाकों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर नजर डाला जाए तो घोसी ब्लाक में 10 घंटा, फतहपुर मंडाव में छह घंटे, रतनपुरा ब्लाक में पांच घंटा, परदहां में आठ घंटे, मुहम्म्दाबादगोहना ब्लाक में 11 घंटे, दोहरीघाट ब्लाक में नौ घंटे है। शेष ब्लाकों में लगभग यही स्थिति है। कंट्रोल रूम से जारी किए गए शेड्यूल का कोई समय नहीं है।
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बुनकरों की मानें तो नगर में 20 घंटे की जगह लगातार 10 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। वहीं ग्रामीण इलाकों में विद्युत आपूूर्ति व्यवस्था दयनीय होती जा रही है। विद्युत उपकेंद्रों में तकनीकी खामी, जर्जर तारों के टूटने तथा ट्रिपिंग का सिलसिला जारी है।
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इससे क़ृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। कुटीर उद्योग तो दम ही तोड़ रहे हैं। विभागीय अधिकारी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। नगर का साड़ी प्रमुख व्यवसाय है। कम बिजली मिलने से बुनकरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में मड़ाई कार्य तेजी से चल रहा है। बिजली संकट बढ़ता ही जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति का कोई शेड्यूल ही नहीं रह गया है। देर रात में बिजली आ रही है। तड़के से ही गुल हो जा रही है। किसानों की मांग कम से कम 20 घंटे की है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रत्येक दिन कम से कम 20 बार फीडर ट्रिप कर जा रहा है। जर्जर तार के टूटने, फाल्ट तथा विद्युत उपकेंद्रों में तकनीकी खामी आने से घंटों बिजली गुल हो जा रही है। विद्युत कर्मी शटडाउन लेकर जब तक फाल्ट ढूंढते हैं तब तक बिजली गुल होने का समय हो जाता है।
ब्लाकों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर नजर डाला जाए तो घोसी ब्लाक में 10 घंटा, फतहपुर मंडाव में छह घंटे, रतनपुरा ब्लाक में पांच घंटा, परदहां में आठ घंटे, मुहम्म्दाबादगोहना ब्लाक में 11 घंटे, दोहरीघाट ब्लाक में नौ घंटे है। शेष ब्लाकों में लगभग यही स्थिति है। कंट्रोल रूम से जारी किए गए शेड्यूल का कोई समय नहीं है।