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Mau News: वाम के गढ़ रहे घोसी से छह बार चुनाव लड़े थ्ाे अंजान

Sat, 04 May 2024 12:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 May 2024 12:00 AM IST
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Anjan had contested elections six times from Ghosi, a stronghold of the Left.
मऊ-मधुबन। कैंसर से जूझ रहे भाकपा के दिग्गज नेता अतुल अंजान का शुक्रवार को निधन हो गया। निधन की सूचना मिलते ही जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
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अंजान को हर वर्ग के लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित दी। अतुल अंजान एक साल से अधिक समय से प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे। उनके दल से जुड़े व समर्थक अंतिम दर्शन के लिए जहां लखनऊ के लिए रवाना हो गए। वहीं विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक व बौद्धिक संगठनों ने जगह जगह शोक सभा कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

उनके करीबी भाकपा राज्य कौंसिल सदस्य राम नारायण सिंह ने बताया कि एम्स में इलाज के बाद अंजान दो महीने से लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहां डॉक्टरों की टीम इलाज कर रही थी। बताया कि अतुल कुमार अंजान लखनऊ यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष्ा भ्ाा चुने गए।
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वह राष्ट्रीय किसान आयोग के सदस्य रहे। वह घोसी लोकसभा चुनाव 1977 में वह पूर्व सांसद झारखंडे राय के समर्थन में जिले में आए। उसके बाद से उन्होंने घोसी लोकसभा को कर्म स्थली बनाई। अतुल कुमार अंजान की गिनती बड़े वामपंथी नेताओं में होती थी। वह टीवी चैनलों की डिबेट में सीपीआइ का प्रतिनिधित्व करते थे। छात्र राजनीति में इनके कद का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि अतुल कुमार अंजान लगातार एक से अधिक बार लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। छात्र राजनीति के समय से ही वह वामपंथी विचारधारा के कट्टर समर्थक हो गए। वह अपना आदर्श पूर्व सांसद सरजू पाण्डेय, जयबहादुर सिंह और झारखंडे राय को मानते थे। उनके निधन पर सपा सुप्रीमो सहित अन्य नेताओं ने शोक प्रकट किया है।
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इंटर कॉलेज के थे अध्यक्ष, निधन पर बंद रहा स्कूल

नगर पंचायत के पांती रोड स्थित बीपीएस पब्लिक इंटर कॉलेज के संस्था के अध्यक्ष अतुल अनजान के निधन की सूचना मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने विद्यालय बंद करते हुए आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया। इस मौके पर प्रबंधक राम नारायण सिंह, गुफरान अहमद, चंद्रिका यादव, डॉ.बशर उस्मानी, शेख हिसामुद्दीन, देवेंद्र मिश्र आदि मौजूद रहे।

चार साल से अधिक समय जेल में बीता

मधुबन। अतुल अंजान उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध पुलिस-पीएसी विद्रोह के प्रमुख नेताओं में से एक थे। इस आंदोलन की वजह से वह साढ़े चार साल से अधिक समय तक जेल में भी रहे। अंजान के पिता डॉ अयोध्या प्रसाद सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े हुए थे। घोसी के पूर्व सांसद झारखंडे राय की मृत्यु के बाद बंजर हो चुकी इस वामपंथी जमीन घोसी को अपनी कर्मस्थली बनाया। इतना ही नहीं घोसी से प्रतिनिधित्व का सपना उनका अधूरा ही रह गया। लखनऊ विवि से 1977 में छात्र राजनीति से कॅरिअर शुरू करके अंजान ने घोसी सीट से वर्ष 1998,1999,2004,2009,2014 एवं 2019 में छः बार दावेदारी की। लेकिन क्षेत्रीय जनता ने नकार दिया।
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