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Mau News: घड़ियालों के खतरे को देखते हुए सरयू नदी में नहाने से रोकने के लिए चलेगा अभियान
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बलिया के मठिया गुरौला स्थित सरयू नदी में उतराया घड़ियाल, यही दोनों बहन का मिला था शव
मऊ। मधुबन थाना क्षेत्र के गजियापुर गांव में बुधवार को नहाने के दौरान भाई को बचाने में सरयू नदी में डूबी दोनों बहनों के शवों के पोस्टमार्टम के बाद भी मौत के कारण का पता नहीं चल सका है। इसे देखते हुए उनके शवों को जांच के लिए बीएचयू भेजा गया है। उधर, एसडीआरएफ के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान घड़ियाल देखे गए थे। डूबी दोनों बहनों के शवों के कुछ हिस्से जानवर खा गए थे। दोनों बहनों के शवों को घड़ियालों द्वारा क्षतविक्षत किए जाने की आशंका जताई गई थी। इसको देखते हुए मधुबन प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है और देवारांचल इलाकों में जागरूकता अभियान चलाकर नदी में नहाने से रोकने की योजना पर काम किया जाएगा। वन विभाग ने सरयू नदी में घड़ियालों की उपस्थिति मानते हुए जून में नहाने से बचने की अपील की है।
जिले में पहली बार 72 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रविवार को गोरखपुर से आए एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) के एसआई सतेंद्र पाल ने बताया कि नदी में घड़ियालों की मौजूदगी से तलाशी अभियान में ज्यादा समय लगा।बड़े घड़ियालों ने कई बार गोताखोरों की परीक्षा ली। इस कारण सावधानी बरतते हुए टीम के सदस्य नदी के निचले सतह तक पहुंचे। मधुबन थाना प्रभारी कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि नदी में दोनोें बहनों की तलाशी अभियान के दौरान घड़ियालों की उपस्थिति मिली। दोनों बहनों के शव क्षतविक्षत मिले। शवों के अवशेष के पोस्टमार्टम के बाद भी डाक्टर मौत का कारण स्पष्ट नहीं कर सके। ऐसी स्थिति में दोनों शवों के अवशेष को बीएचयू जांच के लिए भेजा गया है।
कम पानी होते ही नदी में बढ़ी घड़ियालों की सक्रियता :
मऊ। डीएफओ पीके पांडेय ने बताया कि दूसरे जगहों पर गंगा, यमुना नदी में घड़ियाल, मगरमच्छ छोड़े गए थे। नदियां एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। ऐसे में सरयू नदी में घड़ियालों की उपस्थिति संभव है। वर्तमान में सरयू नदी में जलस्तर कम होने के कारण धूप सेंकने और शिकार (मछली) के लिए रेतीले टीलों व किनारों पर घड़ियालों की सक्रियता बढ़ जाती है। जलस्तर घटने से नदियों के किनारों पर आम लोगों और मछुआरों की आवाजाही बढ़ जाती है। इससे कई बार घड़ियाल रिहायशी इलाकों के करीब या उथले पानी में देखे जाते हैं। जिले की बात करें तो वर्तमान में रेतीली जमीन पर तरबूज, खरबूज की खेती के दौरान बनाए जाने गड्ढों में भी इनकाे देखा जाना सामान्य बात है। मई-जून में ऐसी नदी जहां घड़ियाल या मगरमच्छों की अधिकता हो, वहां नहाने से बचने की जरूरत है।
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अपनाई जा रही है यह प्रक्रिया
मऊ। घड़ियाल के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर असली मौत का कारण (जैसे पानी में डूबने या हमले से आई गहरी चोटें) और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए पुलिस और मेडिकल टीम कई प्रक्रिया अपनाती है। इसमें मौत का कारण जानने के लिए पहले शव परीक्षण किया जाता है। इसमें शरीर के अंदरूनी अंग कैसे प्रभावित हुए, इसकी जांच होती है। इसके बाद गहरी चोटों की जांच होती है। इसमें घड़ियाल के जबड़ों और दांतों (जो बहुत शक्तिशाली होते हैं) के काटने के निशान, त्वचा पर छेद, हड्डियों के टूटने या शरीर के किसी अंग के अलग होने के पैटर्न का अध्ययन किया जाता है। घड़ियाल अक्सर शिकार को गहरे पानी में खींचकर डूबो देते हैं। यदि फेफड़ों में पानी भरा हुआ हो या डायटम टेस्ट पॉजिटिव आए, तो यह साबित होता है कि पीड़ित की मौत पानी में डूबने से हुई है। इसके अलावा फॉरेंसिक जांच में देखा जाता है कि यदि शव काफी क्षतविक्षत हो तो विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि घाव हमले के दौरान लगे या बाद में।
दो टीमें लगी थीं तलाशी अभियान में
मऊ। गजियापुर निवासी रामविलास यादव का परिवार बुधवार को सुबह दस बजे के करीब नदी में स्नान करने गया था। उनके साथ पत्नी, दो पुत्रियां, एक पुत्र, भाई का परिवार तथा गांव की अन्य महिलाएं और बच्चे भी थे। रामविलास का बेटा निर्भय नहाते समय डूबने लगा। उसकी बड़ी बेटी प्रियांशु उसे बचाने के लिए नदी में उतर गई। उसने भाई को धक्का देकर सुरक्षित कर दिया, लेकिन स्वयं पानी के तेज बहाव में डूबने लगी। बहन को संकट में देख छोटी बहन प्रतिज्ञा उसे बचाने के लिए नदी में उतर गई, लेकिन वह भी डूब गई। कई घंटे खोजबीन के बावजूद दोनों का पता नहीं चल सका था। इसके बाद गोरखपुर की एसडीआरएफ टीम के साथ आजमगढ़ की पीएसी 20 वीं बटालियल फ्लड टीम ने दो स्टीमरों से दोनों बहनों की खोजबीन की।
सरयू नदी में घड़ियालों की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत देवारांचल के ग्राम पंचायतों में गणमान्यों की उपस्थिति में प्रशासन नदी में नहाने से रोकने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करेगा। - सत्यप्रकाश सिंह, एसडीएम मधुबन।
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जिले में पहली बार 72 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रविवार को गोरखपुर से आए एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) के एसआई सतेंद्र पाल ने बताया कि नदी में घड़ियालों की मौजूदगी से तलाशी अभियान में ज्यादा समय लगा।बड़े घड़ियालों ने कई बार गोताखोरों की परीक्षा ली। इस कारण सावधानी बरतते हुए टीम के सदस्य नदी के निचले सतह तक पहुंचे। मधुबन थाना प्रभारी कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि नदी में दोनोें बहनों की तलाशी अभियान के दौरान घड़ियालों की उपस्थिति मिली। दोनों बहनों के शव क्षतविक्षत मिले। शवों के अवशेष के पोस्टमार्टम के बाद भी डाक्टर मौत का कारण स्पष्ट नहीं कर सके। ऐसी स्थिति में दोनों शवों के अवशेष को बीएचयू जांच के लिए भेजा गया है।
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कम पानी होते ही नदी में बढ़ी घड़ियालों की सक्रियता :
मऊ। डीएफओ पीके पांडेय ने बताया कि दूसरे जगहों पर गंगा, यमुना नदी में घड़ियाल, मगरमच्छ छोड़े गए थे। नदियां एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। ऐसे में सरयू नदी में घड़ियालों की उपस्थिति संभव है। वर्तमान में सरयू नदी में जलस्तर कम होने के कारण धूप सेंकने और शिकार (मछली) के लिए रेतीले टीलों व किनारों पर घड़ियालों की सक्रियता बढ़ जाती है। जलस्तर घटने से नदियों के किनारों पर आम लोगों और मछुआरों की आवाजाही बढ़ जाती है। इससे कई बार घड़ियाल रिहायशी इलाकों के करीब या उथले पानी में देखे जाते हैं। जिले की बात करें तो वर्तमान में रेतीली जमीन पर तरबूज, खरबूज की खेती के दौरान बनाए जाने गड्ढों में भी इनकाे देखा जाना सामान्य बात है। मई-जून में ऐसी नदी जहां घड़ियाल या मगरमच्छों की अधिकता हो, वहां नहाने से बचने की जरूरत है।
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अपनाई जा रही है यह प्रक्रिया
मऊ। घड़ियाल के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर असली मौत का कारण (जैसे पानी में डूबने या हमले से आई गहरी चोटें) और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए पुलिस और मेडिकल टीम कई प्रक्रिया अपनाती है। इसमें मौत का कारण जानने के लिए पहले शव परीक्षण किया जाता है। इसमें शरीर के अंदरूनी अंग कैसे प्रभावित हुए, इसकी जांच होती है। इसके बाद गहरी चोटों की जांच होती है। इसमें घड़ियाल के जबड़ों और दांतों (जो बहुत शक्तिशाली होते हैं) के काटने के निशान, त्वचा पर छेद, हड्डियों के टूटने या शरीर के किसी अंग के अलग होने के पैटर्न का अध्ययन किया जाता है। घड़ियाल अक्सर शिकार को गहरे पानी में खींचकर डूबो देते हैं। यदि फेफड़ों में पानी भरा हुआ हो या डायटम टेस्ट पॉजिटिव आए, तो यह साबित होता है कि पीड़ित की मौत पानी में डूबने से हुई है। इसके अलावा फॉरेंसिक जांच में देखा जाता है कि यदि शव काफी क्षतविक्षत हो तो विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि घाव हमले के दौरान लगे या बाद में।
दो टीमें लगी थीं तलाशी अभियान में
मऊ। गजियापुर निवासी रामविलास यादव का परिवार बुधवार को सुबह दस बजे के करीब नदी में स्नान करने गया था। उनके साथ पत्नी, दो पुत्रियां, एक पुत्र, भाई का परिवार तथा गांव की अन्य महिलाएं और बच्चे भी थे। रामविलास का बेटा निर्भय नहाते समय डूबने लगा। उसकी बड़ी बेटी प्रियांशु उसे बचाने के लिए नदी में उतर गई। उसने भाई को धक्का देकर सुरक्षित कर दिया, लेकिन स्वयं पानी के तेज बहाव में डूबने लगी। बहन को संकट में देख छोटी बहन प्रतिज्ञा उसे बचाने के लिए नदी में उतर गई, लेकिन वह भी डूब गई। कई घंटे खोजबीन के बावजूद दोनों का पता नहीं चल सका था। इसके बाद गोरखपुर की एसडीआरएफ टीम के साथ आजमगढ़ की पीएसी 20 वीं बटालियल फ्लड टीम ने दो स्टीमरों से दोनों बहनों की खोजबीन की।
सरयू नदी में घड़ियालों की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत देवारांचल के ग्राम पंचायतों में गणमान्यों की उपस्थिति में प्रशासन नदी में नहाने से रोकने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करेगा। - सत्यप्रकाश सिंह, एसडीएम मधुबन।