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बिजली, चक्की और एंबुलेंस चला रहे बंदी रक्षक

Mau Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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मऊ। जेल मेें लगातार बंदियोें की हालत खराब हो रही है। लेकिन 20 बेड के कारागार में एक भी डाक्टर की तैनाती नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर को ही एक पखवारे के लिए भेजा जाता है। रात में यदि बंदी की हालत खराब हो जाए तो उसकी जान पर आ जाएगी। आटा चक्की, बिजली और एंबुलेंस के लिए भी बंदी रक्षकों से काम लिया जा रहा है। जेल अधीक्षक की भी तैनाती तक नहीं हो सकी है। 59 बंदी रक्षकोें का पद खाली चल रहा है।
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मंडल में सबसे अधिक 540 बंदियोें की क्षमता वाले जिला कारागार की स्थिति काफी दयनीय हो चली है। संसाधनोें के अभाव से कारागार बुरी तरह से जूझ रहा है। 20 बेड के कारागार के अस्पताल को जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कारागार में एक भी चिकित्सक तैनात नहीं है। ऐसे मेें सीएमओ स्तर का एक डाक्टर एक पखवारे के लिए तैनात किया जा रहा है। वह भी रात मेें नहीं रहने के कारण रामभरासे ही उपचार की व्यवस्था होती है। जबकि इन दिनोें 25 बंदी कारागार के अस्पताल में भर्ती चल रहे हैं। आटा चक्की, बिजली की देख-रेख और कारागार की एंबुलेंस को भी यहां के बंदी रक्षकोें से ही काम लिया जा रहा है। कहने को तो 66 बंदी रक्षकोें के भरोसे कारागार की सुरक्षा व्यवस्था चल रही है, लेकिन कारागार जेल अधीक्षक विहिन है। महीनोें से जेलर के ही देख रेख में जेल संचालित हो रही है। 59 पद बंदी रक्षकोें के खाली चल रहे हैं। जेलर रामजी प्रसाद का कहना है कि उपलब्ध संसाधनोें में ही काम किया जा रहा है। चिकित्सक का अभाव काफी साल रहा है। शासन को सभी मामलोें से अवगत कराया जा चुका है।
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