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जीएसटी कटौती के चार दिन बाद भी डीलरों के पास नहीं आया आदेश
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:04 AM IST
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मऊ। जीएसटी काउंसिल द्वारा करीब 100 वस्तुओं पर जीएसटी की दर कम किए जाने के बाद भी ग्राहकों को कटौती का लाभ मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है। सरकार की तरफ से जीएसटी में कटौती किए जाने की घोषणा के चार दिन बाद भी कंपनियों के तरफ से संबंधित डीलरों को निर्देश जारी नहीं किया गया है। ग्राहकों को पुरानी दरों पर ही इलक्ट्रानिक सामान खरीदने पड़ सकते हैं।
जीएसटी काउंसिल द्वारा पांच दिन पहले 100 से अधिक वस्तुओं पर 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत स्लैब किया था तो ग्राहकों को वस्तुएं सस्ती होने की आस जगी थी। लेकिन अभी तक कंपनियों की तरफ से एमआरपी में कमी करने के लिए संशोधित सूची डीलरों को नहीं मिली है। ऐसे में ग्राहकों को 28 प्रतिशत वाले एमआरपी पर ही वस्तुएं मिलने की संभावना नजर आ रही है। वहीं, व्यापारियों की मानें तो 28 प्रतिशत वाले एमआरपी पर माल मंगवाया था। अब उस एमआरपी को कम कर माल बेचने में नुकसान है। सरकार या कंपनी की तरफ से क्षतिपूर्ति दी जाए तो रेट कम कर दिया जाएगा। जब तक पुराना स्टाक समाप्त नहीं हो जाता तब तक कम कीमतों पर माल बेचना व्यापारियों के लिए संभव नहीं है।
इस संबंध में इलेक्ट्रानिक कारोबारी मुहम्मद साकिब का कहना था कि सरकार की तरफ से 100 वस्तुओं पर जीएसटी 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत कर दिया गया है, लेकिन हम लोगों ने तो 28 प्रतिशत एमआरपी पर सामान मंगवाया था। कंपनियों की तरफ से या सरकार की तरफ से क्षतिपूर्ति दी जाए तो रेट कम किया जाएगा। कंपनियों की तरफ से संशोधित सूची नहीं आई है।वहीं, कारोबारी तथा व्यापारी नेता उमाशंकर ओमर का कहना है कि जीएसटी का स्लैब घट जा रहा है, लेकिन कंपनियां मोटा लाभ कमाने के चक्कर में रेट कम नहीं कर रही हैं। सरकार की तरफ से कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए पारदर्शी नीति बनाई जाए।
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जीएसटी काउंसिल द्वारा पांच दिन पहले 100 से अधिक वस्तुओं पर 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत स्लैब किया था तो ग्राहकों को वस्तुएं सस्ती होने की आस जगी थी। लेकिन अभी तक कंपनियों की तरफ से एमआरपी में कमी करने के लिए संशोधित सूची डीलरों को नहीं मिली है। ऐसे में ग्राहकों को 28 प्रतिशत वाले एमआरपी पर ही वस्तुएं मिलने की संभावना नजर आ रही है। वहीं, व्यापारियों की मानें तो 28 प्रतिशत वाले एमआरपी पर माल मंगवाया था। अब उस एमआरपी को कम कर माल बेचने में नुकसान है। सरकार या कंपनी की तरफ से क्षतिपूर्ति दी जाए तो रेट कम कर दिया जाएगा। जब तक पुराना स्टाक समाप्त नहीं हो जाता तब तक कम कीमतों पर माल बेचना व्यापारियों के लिए संभव नहीं है।
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इस संबंध में इलेक्ट्रानिक कारोबारी मुहम्मद साकिब का कहना था कि सरकार की तरफ से 100 वस्तुओं पर जीएसटी 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत कर दिया गया है, लेकिन हम लोगों ने तो 28 प्रतिशत एमआरपी पर सामान मंगवाया था। कंपनियों की तरफ से या सरकार की तरफ से क्षतिपूर्ति दी जाए तो रेट कम किया जाएगा। कंपनियों की तरफ से संशोधित सूची नहीं आई है।वहीं, कारोबारी तथा व्यापारी नेता उमाशंकर ओमर का कहना है कि जीएसटी का स्लैब घट जा रहा है, लेकिन कंपनियां मोटा लाभ कमाने के चक्कर में रेट कम नहीं कर रही हैं। सरकार की तरफ से कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए पारदर्शी नीति बनाई जाए।
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