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आस्था का केंद्र बना है मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर
Updated Thu, 18 Oct 2018 11:16 PM IST
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बड़नाव ब्लॉक क्षेत्र के मांदी सिपाह स्थित मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ हैै। यहां नवरात्र भर दूर दराज सहित पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं का रेला लगा रहता है। नवरात्र के पांचवें दिन भारी संख्या में आए भक्तों ने मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप की विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर में वर्ष भर पूजन अर्चन करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्र भर गहमागहमी रहती है। बताया जाता है कि मुगल शासनकाल में जंगल में वहां मूर्तियां थीं। औरंगजेब ने मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करवाया था। एक अन्य किवदंती के अनुसार जब चोर चोरी करने या माल को आपस में बांटने के लिए उसी जंगल से होकर जाते थे या उनका ठहराव होता था तो वे मूर्तियां चोर-चोर कहकर शोर मचाने का काम करती थीं। तो चोरों ने गुस्से में आकर उन मूर्तियों को ही अपना निशाना बनाया। कटा हुआ हिस्सा उठाकर ले जाने लगे। कुछ ही दूर गए थे कि सभी अंधे हो गए, तो वे मूर्ति को वहीं छोड़कर पूजन अर्चन करना शुरू कर दिया। तब जाकर उनकी आंखों से दिखाई देने लगा। बताया जाता है कि पहले वे मूर्तियां सोने की थीं कटने के साथ ही सिर और धड़ सभी काले रंग के पत्थर हो गए। मूर्ति खंडों को जहां चोरों ने छोड़ा वहां वे मूर्ति खंड मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर के नाम से पूज्य हुईं। इस तरह रेयांव की ददोरिया माई और मांदी सिपाह बाजार की मां कोयल मर्याद भवानी माई के तार जुड़े हुए बताए जाते हैं। दार्शनिक राहुल सांकृत्यायन ने आजमगढ़ का इतिहास नामक पुस्तक में मांदी सिपाह स्थित मूर्तियों को मां कालरात्रि की शक्तिपीठ कहा है। पूजन अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है।
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मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर में वर्ष भर पूजन अर्चन करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्र भर गहमागहमी रहती है। बताया जाता है कि मुगल शासनकाल में जंगल में वहां मूर्तियां थीं। औरंगजेब ने मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करवाया था। एक अन्य किवदंती के अनुसार जब चोर चोरी करने या माल को आपस में बांटने के लिए उसी जंगल से होकर जाते थे या उनका ठहराव होता था तो वे मूर्तियां चोर-चोर कहकर शोर मचाने का काम करती थीं। तो चोरों ने गुस्से में आकर उन मूर्तियों को ही अपना निशाना बनाया। कटा हुआ हिस्सा उठाकर ले जाने लगे। कुछ ही दूर गए थे कि सभी अंधे हो गए, तो वे मूर्ति को वहीं छोड़कर पूजन अर्चन करना शुरू कर दिया। तब जाकर उनकी आंखों से दिखाई देने लगा। बताया जाता है कि पहले वे मूर्तियां सोने की थीं कटने के साथ ही सिर और धड़ सभी काले रंग के पत्थर हो गए। मूर्ति खंडों को जहां चोरों ने छोड़ा वहां वे मूर्ति खंड मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर के नाम से पूज्य हुईं। इस तरह रेयांव की ददोरिया माई और मांदी सिपाह बाजार की मां कोयल मर्याद भवानी माई के तार जुड़े हुए बताए जाते हैं। दार्शनिक राहुल सांकृत्यायन ने आजमगढ़ का इतिहास नामक पुस्तक में मांदी सिपाह स्थित मूर्तियों को मां कालरात्रि की शक्तिपीठ कहा है। पूजन अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है।
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