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रामजन्म पर महिलाओं ने गाया मंगल गीत
Updated Wed, 18 Oct 2017 10:02 PM IST
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मझवारा। श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में पवनी गांव स्थित रामभवन मेला परिसर में चल रही रामलीला में मंगलवार को रामजन्म, रावण उत्पात सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। रामलीला मंचन में भगवान राम के जन्म होते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
रामलीला में ऋषियों पर असुरों द्वारा कहर बरपाकर रक्त को लेकर रावण के दरबार में पहुंचते ही आकाशवाणी होती है कि हे रावण यही रक्त तुम्हारे कुल के विनाश का कारण बनेगा। जिसे सुनकर वह घबरा उठा। तत्काल लंका सीमा से बाहर जनकपुर सीमा में रक्त के घड़े को गड़वाया। कुछ समय के पश्चात जनकपुर में अकाल पड़ा। उसके निवारण के लिए जनकपुर के राजा और रानी हल चला रहे थे कि उनका हल उक्त घड़े से टकरा गया। घड़े से कन्या की उत्पत्ति हुई। चौथापन देख राजा दशरथ चिंतित रहते हैं। ऋषि महर्षियों की शरण में जाते हैं। कुछ दिन बाद राजा को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न का जन्म होता है। जन्म होते ही पंडाल में मौजूद दर्शक भाव विह्वल होकर जयकारा लगाने लगते हैं। महिलाएं थाली बजाती हैं तथा मंगल गीत गाने लगती हैं।
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रामलीला में ऋषियों पर असुरों द्वारा कहर बरपाकर रक्त को लेकर रावण के दरबार में पहुंचते ही आकाशवाणी होती है कि हे रावण यही रक्त तुम्हारे कुल के विनाश का कारण बनेगा। जिसे सुनकर वह घबरा उठा। तत्काल लंका सीमा से बाहर जनकपुर सीमा में रक्त के घड़े को गड़वाया। कुछ समय के पश्चात जनकपुर में अकाल पड़ा। उसके निवारण के लिए जनकपुर के राजा और रानी हल चला रहे थे कि उनका हल उक्त घड़े से टकरा गया। घड़े से कन्या की उत्पत्ति हुई। चौथापन देख राजा दशरथ चिंतित रहते हैं। ऋषि महर्षियों की शरण में जाते हैं। कुछ दिन बाद राजा को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न का जन्म होता है। जन्म होते ही पंडाल में मौजूद दर्शक भाव विह्वल होकर जयकारा लगाने लगते हैं। महिलाएं थाली बजाती हैं तथा मंगल गीत गाने लगती हैं।
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