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गाजे बाजे के साथ श्रद्धालुओं ने निकाली कलश यात्रा
Updated Thu, 05 Oct 2017 11:43 PM IST
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सरसेना। चिरयाकोट क्षेत्र के बिशुनपुर गांव के ब्रह्मस्थान पर लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के क्रम में श्रद्धालुओं ने गुरुवार को गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा में शामिल भक्तों के भगवान के जयकारे से वातावरण गूंजायमान हो गया।
कलश यात्रा में पीले वस्त्र धारण की हुई कुंवारी कन्याएं तथा महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। पंडित अंजनी दूबे महाराज के नेतृत्व में कलश यात्रा निकली। इसमें शामिल श्रद्धालुओं का हुजूम क्षेत्र के जसड़ा, खोजापुर, सवना होते हुए मंगई नदी पहुंचा । वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वहां पर कलश में जल भरा गया। इस दौरान यात्रा जुलूस में शामिल लोगों द्वारा बीच-बीच में देवी-देवताओं के जयकारे से वातावरण गूंज उठता था । विधिविधान से कलश में जल भरने के बाद जुलूस ब्रह्म स्थान पहुंचा। इस मौके पर प्रवचनकर्ता अंजनी दूबे ने कहा कि मनुष्य के सत्कार से ही परमात्मा की प्राप्ति होती है । परमात्मा सभी मनुष्यों के बीच में व्याप्त है । ज्ञान रूपी चक्षु से ही उसका दर्शन हो सकता है । ज्ञान से ही आत्मा परमात्मा से मुलाकात हो सकती है । कहा कि रामचरित मानस समग्र मानव समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है।
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कलश यात्रा में पीले वस्त्र धारण की हुई कुंवारी कन्याएं तथा महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। पंडित अंजनी दूबे महाराज के नेतृत्व में कलश यात्रा निकली। इसमें शामिल श्रद्धालुओं का हुजूम क्षेत्र के जसड़ा, खोजापुर, सवना होते हुए मंगई नदी पहुंचा । वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वहां पर कलश में जल भरा गया। इस दौरान यात्रा जुलूस में शामिल लोगों द्वारा बीच-बीच में देवी-देवताओं के जयकारे से वातावरण गूंज उठता था । विधिविधान से कलश में जल भरने के बाद जुलूस ब्रह्म स्थान पहुंचा। इस मौके पर प्रवचनकर्ता अंजनी दूबे ने कहा कि मनुष्य के सत्कार से ही परमात्मा की प्राप्ति होती है । परमात्मा सभी मनुष्यों के बीच में व्याप्त है । ज्ञान रूपी चक्षु से ही उसका दर्शन हो सकता है । ज्ञान से ही आत्मा परमात्मा से मुलाकात हो सकती है । कहा कि रामचरित मानस समग्र मानव समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है।
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