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फार्मासिस्ट के भरोसे पीएचसी का संचालन
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:44 AM IST
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में सुविधाओं का अभाव है। आकस्मिक घटनाओं या दुर्घटनाओं के चलते पहुंचने वाले घायलों को यहां इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में तैनात चिकित्सकों के कभी कभार बैठेने पर फार्मासिस्ट उनकी ड्यूटी निभा रहे। मरीजों का इलाज सही ढंग से नहीं होने से यहां सन्नाटा रहता है। वहीं, प्रसूति और आपरेशन कक्ष तो बनकर तैयार है लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। आला अधिकारियो को शिकायती पत्र देने के वावजूद सुविधाएं बहाल नहीं हो रहीं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में काम चलाऊ व्यवस्था हो रही है। महिला चिकित्सक के साथ ही सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन का अभाव जनता को खल रहा। सबसे बुरी हालत तो उन मरीजों की है जो मारपीट में घायल अथवा किसी दुर्घटना के चलते इलाज के लिए यहां लाए जाते हैं। अस्पताल में दो चिकित्सकों की तैनाती तो की गई है। लेकिन तैनात चिकित्सक कब आते हैं कब चले जाते हैं मरीजों को पता नहीं चल पाता है। फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा है। दवाओं की टोंटा बना हुआ है। एंटी रैबिज इंजेक्शन का अभाव रहता है। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली सभी सुविधाएं नदारद है।
अस्पताल तक जाने के लिए रास्ता तो बना है पर बरसात के दिनों में मार्ग पर जलजमाव होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में स्वीपर का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। इसके चलते साफ सफाई की स्थिति दयनीय रहती है। चौकीदार की तैनाती न होने से अस्पताल में कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। क्षेत्र के सुनील मौर्य, विजय कुमार पांडेय, मुन्नू राम, महेंद्र मद्धेसिया, जगत नारायण चौरसिया, अशोक सेठ, सुरेशचंद वर्मा, सुरेंद्र यादव, राकेशचंद वर्मा, अब्दुल सत्तार कुरेसी, राहुल सिंह, फैय्याज खान, ओमप्रकाश मद्धेशिया का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है। इस बाबत प्रभारी चिकित्साधिकारी डीएम त्रिपाठी का कहना है कि मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में काम चलाऊ व्यवस्था हो रही है। महिला चिकित्सक के साथ ही सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन का अभाव जनता को खल रहा। सबसे बुरी हालत तो उन मरीजों की है जो मारपीट में घायल अथवा किसी दुर्घटना के चलते इलाज के लिए यहां लाए जाते हैं। अस्पताल में दो चिकित्सकों की तैनाती तो की गई है। लेकिन तैनात चिकित्सक कब आते हैं कब चले जाते हैं मरीजों को पता नहीं चल पाता है। फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा है। दवाओं की टोंटा बना हुआ है। एंटी रैबिज इंजेक्शन का अभाव रहता है। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली सभी सुविधाएं नदारद है।
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अस्पताल तक जाने के लिए रास्ता तो बना है पर बरसात के दिनों में मार्ग पर जलजमाव होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में स्वीपर का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। इसके चलते साफ सफाई की स्थिति दयनीय रहती है। चौकीदार की तैनाती न होने से अस्पताल में कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। क्षेत्र के सुनील मौर्य, विजय कुमार पांडेय, मुन्नू राम, महेंद्र मद्धेसिया, जगत नारायण चौरसिया, अशोक सेठ, सुरेशचंद वर्मा, सुरेंद्र यादव, राकेशचंद वर्मा, अब्दुल सत्तार कुरेसी, राहुल सिंह, फैय्याज खान, ओमप्रकाश मद्धेशिया का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है। इस बाबत प्रभारी चिकित्साधिकारी डीएम त्रिपाठी का कहना है कि मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है।
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