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बुजुर्ग कैदी रिहा
Updated Mon, 25 Dec 2017 11:41 PM IST
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घोसी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्म दिन के उपलक्ष्य में सूबे से लिए गए निर्णय के क्रम में मऊ कारागार से बुजुर्ग हत्यारोपी को सोमवार की दोपहर रिहा किया गया। भाभी की हत्या में बीते चार वर्षों से जेल का दाना पानी ले रहे बुजुर्ग रामकरन यादव के रिहा होकर घर पहुंचने पर उसके परिवार के लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं था। जेल से रिहा किए गए बुजुर्ग को जेल प्रशासन ने घर तक छुडवाया। परिवार के लोगों को उसकी रिहाई के बारे में पता ही नहीं था।
प्रदेश सरकार के फरमान पर सोमवार को जिला कारागार मऊ में निरूद्घ बंदी रामकरन यादव को सोमवार की दोपहर रिहाकर उसके घर पहुंचाया गया। रामकरन यादव 75 घोसी कोतवाली क्षेत्र के जैनापुर गांव के निवासी है। जेल प्रशासन के आदेश पर बंदी रक्षक संतोष सिंह ने रामकरन को उनके घर तक पहुंचाया। बताया जाता है रामकरन भाभी की हत्या के आरोप में वर्ष 2013 से जेल में निरूद्घ होकर सजा काट रहे थे। रामकरन के रिहाई से परिवार के लोग अनभिज्ञ थे। सोमवार की दोपहर घोसी कोतवाली पुलिस उपनिरीक्षक शिवेंद्र राय और बंदी रक्षक संतोष सिंह जब रामकरन को लेकर उनके घर पहुंचे, तो लोगों में दहशत व्याप्त हो गया। बाद में पुलिस वालों के बताने पर लोगों को रामकरन के रिहाई की जानकारी हुई। इस दौरान परिवार के लोग खु्श हो गए।
बताते चले जून 2013 में घोसी कोतवाली के जैनापुर गांव निवासी रामकरन यादव ने भोजन मिलने में देर होने पर क्रोध में आकर अपनी भाभी बासमती देवी पर गड़ासी से वार कर दिया था। इस दौरान उनकी भाभी की मौत हो गई। कोतवाली में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया। इस दौरान रामकरन यादव को 10 वर्ष की सजा के साथ पांच हजार रुपया जुर्माना हुआ था। जबसे रामकरन जेल में थे। रामकरन के दो पुत्रों में फूलचंद यादव, अमीन है , जिस समय उनके पिता घर पहुंचे फूलचंद्र मऊ मुख्यालय पर थे। जबकि दूसरा पुत्र कोमल यादव जीविकोपार्जन के लिए बहार रहता है। घर पर रामकरन की पत्नी लक्ष्मीना देवी के बहूएं और पोते पोतियां थे। घर पर मौजूद नाती आशुतोष कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। पहुंचने गई पुलिस को रामकरन को परिवार वालों के सुपुर्द कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। रामकरन यादव से पूछने पर बस इतना ही बताया कि चार वर्ष जेल में रहा।बहरे होने के चलते, कैसे रहे ,क्यू छूटे बताने में असमर्थ रहे।
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प्रदेश सरकार के फरमान पर सोमवार को जिला कारागार मऊ में निरूद्घ बंदी रामकरन यादव को सोमवार की दोपहर रिहाकर उसके घर पहुंचाया गया। रामकरन यादव 75 घोसी कोतवाली क्षेत्र के जैनापुर गांव के निवासी है। जेल प्रशासन के आदेश पर बंदी रक्षक संतोष सिंह ने रामकरन को उनके घर तक पहुंचाया। बताया जाता है रामकरन भाभी की हत्या के आरोप में वर्ष 2013 से जेल में निरूद्घ होकर सजा काट रहे थे। रामकरन के रिहाई से परिवार के लोग अनभिज्ञ थे। सोमवार की दोपहर घोसी कोतवाली पुलिस उपनिरीक्षक शिवेंद्र राय और बंदी रक्षक संतोष सिंह जब रामकरन को लेकर उनके घर पहुंचे, तो लोगों में दहशत व्याप्त हो गया। बाद में पुलिस वालों के बताने पर लोगों को रामकरन के रिहाई की जानकारी हुई। इस दौरान परिवार के लोग खु्श हो गए।
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बताते चले जून 2013 में घोसी कोतवाली के जैनापुर गांव निवासी रामकरन यादव ने भोजन मिलने में देर होने पर क्रोध में आकर अपनी भाभी बासमती देवी पर गड़ासी से वार कर दिया था। इस दौरान उनकी भाभी की मौत हो गई। कोतवाली में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया। इस दौरान रामकरन यादव को 10 वर्ष की सजा के साथ पांच हजार रुपया जुर्माना हुआ था। जबसे रामकरन जेल में थे। रामकरन के दो पुत्रों में फूलचंद यादव, अमीन है , जिस समय उनके पिता घर पहुंचे फूलचंद्र मऊ मुख्यालय पर थे। जबकि दूसरा पुत्र कोमल यादव जीविकोपार्जन के लिए बहार रहता है। घर पर रामकरन की पत्नी लक्ष्मीना देवी के बहूएं और पोते पोतियां थे। घर पर मौजूद नाती आशुतोष कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। पहुंचने गई पुलिस को रामकरन को परिवार वालों के सुपुर्द कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। रामकरन यादव से पूछने पर बस इतना ही बताया कि चार वर्ष जेल में रहा।बहरे होने के चलते, कैसे रहे ,क्यू छूटे बताने में असमर्थ रहे।
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