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पोलिंग पार्टियों के पंडाल में दिखी अव्यस्था, पानी के लिए तड़पते रहे कर्मचारी
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पोलिंग पार्टियों को रवाना करने के कलेक्ट्रेट परिसर में बनाए गए पंडाल में बेहतर व्यवस्था करने का दावा पानी की उपलब्धता न होने से फुस्स हो गया। प्रशासनिक अधिकारी पोलिंग पार्टियों को रवाना करने में मशगूल थे, लेकिन लोग शीतल पेयजल के लिए लोग तड़पते रहे। मात्र एक स्थान पर आरओ से गर्म पानी निकल रहा था। जबकि एक आरओ खराब पड़ा था। कर्मचारी प्रशासन को कोसते रहे।
लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए 19 मई को मतदान होगा। मतदान कराने के लिए शनिवार को 1754 पोलिंग पार्टियों को रवाना करने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में पंडाल बनाया गया था। पंडाल में कर्मचारी, जवान सहित 20 हजार से अधिक की संख्या थी। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने में खानापूर्ति नजर आई। जिला प्रशासन की तरफ से टेंट लगाकर बेहतर छाया की व्यवस्था की गई थी। लेकिन पेयजल के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं की जा सकी थी। पेयजल के नाम पर दो आरओ लगाया गया था। कलेक्ट्रेट बार के सामने लगा, आरओ बिगड़ा पड़ा था जबकि कलेक्ट्रेट के पास लगा आरओ से गर्म पानी निकल रहा था। प्यास से तड़प रहे कर्मचारी, पुलिस के जवान ईवीएम तथ वीवीपैट लेने तथा वाहन खोजने में परेशान थे। एक कर्मचारी का प्यास से तड़प कर बुरा हाल हो गया था। महिला कर्मचारियों के साथ आने वाले परिवारजनों का भी प्यास से बुरा हाल था। लोग शीतल पेयजल के लिए इधर उधर भटकते देखे गए। कुछ कर्मचारियों का कहना था, कि प्रशासन की तरफ से छाया की बेहतर व्यवस्था रहने से राहत महसूस हुआ। पेयजल की बेहतर व्यस्था रहती तो सब कुछ ओके रहता।
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लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए 19 मई को मतदान होगा। मतदान कराने के लिए शनिवार को 1754 पोलिंग पार्टियों को रवाना करने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में पंडाल बनाया गया था। पंडाल में कर्मचारी, जवान सहित 20 हजार से अधिक की संख्या थी। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने में खानापूर्ति नजर आई। जिला प्रशासन की तरफ से टेंट लगाकर बेहतर छाया की व्यवस्था की गई थी। लेकिन पेयजल के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं की जा सकी थी। पेयजल के नाम पर दो आरओ लगाया गया था। कलेक्ट्रेट बार के सामने लगा, आरओ बिगड़ा पड़ा था जबकि कलेक्ट्रेट के पास लगा आरओ से गर्म पानी निकल रहा था। प्यास से तड़प रहे कर्मचारी, पुलिस के जवान ईवीएम तथ वीवीपैट लेने तथा वाहन खोजने में परेशान थे। एक कर्मचारी का प्यास से तड़प कर बुरा हाल हो गया था। महिला कर्मचारियों के साथ आने वाले परिवारजनों का भी प्यास से बुरा हाल था। लोग शीतल पेयजल के लिए इधर उधर भटकते देखे गए। कुछ कर्मचारियों का कहना था, कि प्रशासन की तरफ से छाया की बेहतर व्यवस्था रहने से राहत महसूस हुआ। पेयजल की बेहतर व्यस्था रहती तो सब कुछ ओके रहता।
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