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सावधान, सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं सांप से बचने के इंजेक्शन

Fri, 10 Aug 2018 10:36 PM IST
Updated Fri, 10 Aug 2018 10:36 PM IST
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सावधान, सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं सांप से बचने के इंजेक्शन
मऊ। बारिश के मौसम में सांपों का निकलना शुरू हो जाता है। यही वजह है कि इस समय सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ही इसके प्रति उदासीन हुआ है। जिला अस्पाताल को छोड़ सीएचसी, पीएचसी से एंटी वेनम की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी स्थिति में सर्पदंश का इलाज कैसे हो यह एक गंभीर मसला है।
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जिला अस्पताल में सर्पदंश के उपचार का इंजेक्शन एंटीवेेनम की उपलब्धता है, मगर जिले के 9 सीएचसी और 37 पीएचसी पर कोई व्यवस्था नहीं है। जहां काफी दिनों से इंजेक्शन खत्म हो गया है। इस ओर स्वास्थ्य विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सांप काटने के 75 फीसदी मामले ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलते हैं, इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों पर एंटी वेनम (जहर प्रतिरोधक) दवाएं नही हैं। लिहाजा लोगों को सांप काटने पर गांव से शहर की ओर भागना पड़ता है। इसकी पुष्टी बीते कुछ माह में घटे मामले करते है। पहला मामला कोपागंज ब्लाक के अलीनगर गांव निवासी उमाशंकर राजभर 55 को 5 जून को खेत में काम करने के दौरान सांप ने काट लिया था। जिसमें समय से इलाज न मिलने पर उनकी मौत हो गई। जबकि 6 जून 2018 को अलीनगर गांव में ही फौजदार राजभर को सांप ने काट दिया। लेकिन यहां भी एंटीवेनम न होने पर सदर अस्पताल में लाया गया। जब जाकर जान बची। इस बाबत सीएमओ डा. सतीशचंद्र सिंह का कहना है सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी वेनम हैं। इसके बाद भी मरीजों को रेफर किया जा रहा हैं तो वो इस मामले की जानकारी ली जाएगी।
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वीआईपी के लिए बचा कर रखी जाती है इंजेक्शन
मऊ। सीएमओ डा. सतीशचंद्र सिंह की माने तो अगर जहरीला सांप किसी को काट लिया है और विष शरीर में फैल गया है तो उसे कम से कम 8 से 10 एंटीवेेनम इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन सीएमओ को इस बात की जानकारी नहीं है कि सीएचसी और पीएचसी पर एंटी वेनम नहीं है। दूसरी तरफ जिला अस्पताल सूत्रों के अनुसार इंजेक्शन लिमिटेड है, उसे बचाकर इस लिए रखा गया है कि कभी कोई वीआईपी या पहुंच वाला व्यक्ति आ गया तो उसके उपयोग में आएगा। ऐसे में अस्पताल के डाक्टर सर्प दंश के आने वाले मरीजों को एक या फिर दो इंजेक्शन की डोज देकर उसे वाराणसी रेफर कर देते हैं। जबकि ऐसे मरीज को दस से बीस मिनट के अंतराल में इंजेक्शन बराबर लगना चाहिए। ब्यूरो
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