{"_id":"5c9fb499bdec2214216cd179","slug":"51553970329-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रभु राम का जन्म होती ही हुई फूलों की बारिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रभु राम का जन्म होती ही हुई फूलों की बारिश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। नगर के ब्रह्मस्थान पर चल रहे रामकथा में शुक्रवार की रात रामजन्म उत्सव का मंचन हुआ। जिसमें अयोध्या से पधारे लवकुश महराज के भजनों पर श्रद्घालु जमकर झूमें। रामकथा में रामजन्म उत्सव के दौरान काफी संख्या में मौजूद महिलाओं ने सोहर गाए और साथ ही प्रभु पर फूलों की बारिश की।
रामकथा में प्रवचन करते हुए कहा कि जो जगत पिता है, वह किसी का पुत्र बने यह परम आश्चर्य की बात है, परन्तु प्रेम के कारण यह अघटित घटना भी घटी। संसार का कोई बंधन उन्हें बांध नहीं सकता सिवाय प्रेम के।
श्री राम कथा में महिमा पर चर्चा करते हुए सुंदर भजन ‘‘गागर में सागर भर आया बस ब्रह्म दशरथ के घर आया’’ से सभी का मन मोह लिया। उस युग में यज्ञ के ऊपर राक्षसों का बड़ा संकट था इसलिए पुत्रेष्टि यज्ञ द्वारा यज्ञ नारायण भगवान का प्राकट्य हुआ। महाराज ने कहा कि जब जीवन में कोई मार्ग न सूझे तब सदगुरु की शरण में जाना चाहिए। महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए गुरुवर बशिष्ट जी के परामर्श से यज्ञ का आयोजन किया और ऋंगी ऋषिजी के आचार्यत्व में यज्ञ पूर्ण हुआ, फलस्वरूप भगवान श्री राम, भारत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न के रूप में प्रकट हुए। आज हर कोई राम जैसा पुत्र चाहता है परंतु राम जैसा पुत्र तभी बन पाएगा जब दशरथ जैसा पिता और कौशल्या जैसी मां हो।रामकथा के दौरान मुख्य रुप से मीना अग्रवाल, आशा खत्री, शरद टंडन, कृष्णा खंडेलवाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
रामकथा में प्रवचन करते हुए कहा कि जो जगत पिता है, वह किसी का पुत्र बने यह परम आश्चर्य की बात है, परन्तु प्रेम के कारण यह अघटित घटना भी घटी। संसार का कोई बंधन उन्हें बांध नहीं सकता सिवाय प्रेम के।
विज्ञापन
श्री राम कथा में महिमा पर चर्चा करते हुए सुंदर भजन ‘‘गागर में सागर भर आया बस ब्रह्म दशरथ के घर आया’’ से सभी का मन मोह लिया। उस युग में यज्ञ के ऊपर राक्षसों का बड़ा संकट था इसलिए पुत्रेष्टि यज्ञ द्वारा यज्ञ नारायण भगवान का प्राकट्य हुआ। महाराज ने कहा कि जब जीवन में कोई मार्ग न सूझे तब सदगुरु की शरण में जाना चाहिए। महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए गुरुवर बशिष्ट जी के परामर्श से यज्ञ का आयोजन किया और ऋंगी ऋषिजी के आचार्यत्व में यज्ञ पूर्ण हुआ, फलस्वरूप भगवान श्री राम, भारत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न के रूप में प्रकट हुए। आज हर कोई राम जैसा पुत्र चाहता है परंतु राम जैसा पुत्र तभी बन पाएगा जब दशरथ जैसा पिता और कौशल्या जैसी मां हो।रामकथा के दौरान मुख्य रुप से मीना अग्रवाल, आशा खत्री, शरद टंडन, कृष्णा खंडेलवाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन