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न तो दवाइयां और न ही मिलते हैं डॉक्टर
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रतनुपरा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहालियों के चरम पर पहुंच गया है। न तो यहां दवाइयां हैं और न ही डॉक्टर। जबकि बिस्तर पर चादर तक नहीं हैं और ठंड के इस मौसम में भर्ती मरीजों को कंबल तक नहीं दिए जा रहे। हद यह है कि लोगों को चादर तक घर से लानी पड़ रही।
बीस साल पहले ठैंचा में 30 शय्याओं का उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई। ऐसे में लोगों को बेहतर इलाज की आस जगी। लेकिन क्षेत्रवासियों का भरोसा जल्दी ही टूट गया। बदहाली का आलम यह है कि मरीजों को अस्पताल से पैरासिटामाल और मेट्रोजील छोड़कर कोई दवा नहीं मिल रही। उन्हें सारी दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। भर्ती मरीजों को बिस्तर पर चादर तक नहीं मिलती उन्हें घर से चादर लेकर आना पड़ता है। ठंड के इस मौसम में उन्हें कंबल तक नहीं दिया जा रहा।
सोमवार की रात में यहां भर्ती हलधरपुर गांव की रामदुलारी को कंबल नहीं दिया गया तो परिजनों ने हंगामा कर दिया। तब जाकर उसे कंबल मिला। शौचालय इतने गंदे हैं कि उनमें जाने से मरीज कतराते हैं। सीएचसी पर आने वाले हड्डी संबंधी रोगियों को बाहर से दवा खरीदनी पडती है। मंगलवार को मरीजों को निराशा झेलनी पड़ी क्यों कि अधिकांश डाक्टर यहां मौजूद नहीं मिले। कैलाशी के सीने की हड्डी टूट गई थी, उसके परिवार वाले संबंधित डॉक्टर को ढूंढ़ रहे थे लेकिन वे नहीं मिले। एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी की टिप्पणी थी कि आज नववर्ष का पहला दिन है तो डाक्टर अस्पताल में मिलेंगे कि पिकनिक स्पाट पर।
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सामाजिक कार्यकर्ता हरिनाथ यादव , यूथ भाजपा के म ोनू पांडेय , भाजपा नेता शिवबचन राजभर और सपा नेता राजेंद्र कुमार और श्री सिंह ने मांग किया है कि अस्पताल में दवाइयों की व्यवस्था की जाए और डाक्टरों को समय से अपने कक्षों में बैठना सुनिश्चित कराया जाए।
दवाओं की डिमांड की गई है। काफी दवाइयां अस्पताल पर उपलब्ध हैं। मरीजों को कंबल न देने वाले कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। यदि शिकायत सही मिली तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी ।
डा. एचआर सोनी, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक
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बीस साल पहले ठैंचा में 30 शय्याओं का उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई। ऐसे में लोगों को बेहतर इलाज की आस जगी। लेकिन क्षेत्रवासियों का भरोसा जल्दी ही टूट गया। बदहाली का आलम यह है कि मरीजों को अस्पताल से पैरासिटामाल और मेट्रोजील छोड़कर कोई दवा नहीं मिल रही। उन्हें सारी दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। भर्ती मरीजों को बिस्तर पर चादर तक नहीं मिलती उन्हें घर से चादर लेकर आना पड़ता है। ठंड के इस मौसम में उन्हें कंबल तक नहीं दिया जा रहा।
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सोमवार की रात में यहां भर्ती हलधरपुर गांव की रामदुलारी को कंबल नहीं दिया गया तो परिजनों ने हंगामा कर दिया। तब जाकर उसे कंबल मिला। शौचालय इतने गंदे हैं कि उनमें जाने से मरीज कतराते हैं। सीएचसी पर आने वाले हड्डी संबंधी रोगियों को बाहर से दवा खरीदनी पडती है। मंगलवार को मरीजों को निराशा झेलनी पड़ी क्यों कि अधिकांश डाक्टर यहां मौजूद नहीं मिले। कैलाशी के सीने की हड्डी टूट गई थी, उसके परिवार वाले संबंधित डॉक्टर को ढूंढ़ रहे थे लेकिन वे नहीं मिले। एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी की टिप्पणी थी कि आज नववर्ष का पहला दिन है तो डाक्टर अस्पताल में मिलेंगे कि पिकनिक स्पाट पर।
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सामाजिक कार्यकर्ता हरिनाथ यादव , यूथ भाजपा के म ोनू पांडेय , भाजपा नेता शिवबचन राजभर और सपा नेता राजेंद्र कुमार और श्री सिंह ने मांग किया है कि अस्पताल में दवाइयों की व्यवस्था की जाए और डाक्टरों को समय से अपने कक्षों में बैठना सुनिश्चित कराया जाए।
दवाओं की डिमांड की गई है। काफी दवाइयां अस्पताल पर उपलब्ध हैं। मरीजों को कंबल न देने वाले कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। यदि शिकायत सही मिली तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी ।
डा. एचआर सोनी, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक