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हर नेमत पर अल्लाह का अदा करें शुक्र
Updated Wed, 13 Jun 2018 11:32 PM IST
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रोजेदार को चाहिए कि अल्लाह की दी हुई हर नेमत पर उसका शुक्र अदा करें। क्योंकि उसकी रहमत और बरकत से ही इंसान अपनी जिंदगी को गुजार रहा है। रमजान के आखिरी अशरे में रोेजेदार इबादत में मशगूल हैं। वह अपने गुनाहों की माफी के साथ ही अल्लाह से हर परेशनी से निजात और खैरो बरकत मांग रहे हैं। वहीं मस्जिदों मेें एतिकाफ पर बैठे लोग ईद का चंाद देख कर घरों को रवाना होंगे।
मौलवी फरीदुलहक ने कहा कि एक रोजेदार को इस बात का गम होता है कि मालूम नहीं दुबारा रमजान मिलेगा या नही। इसलिए हम सब को रमजान के अखिरी अशरा के दस दिनों को बहुत की गनीमत समझना चाहिए। रमजान के खत्म होने पर यकुम शव्वाल को तमाम मोमीन पर दो रेकात नमाज अदा करना वाजिब करार दिया गया है। जिसका मकसद रोजा की इबादत पूरी होने पर अल्लाह का शुक्र अदा करना है। इसलिए हम आज आपके बंदे को जो भी नेमत मिले चाहे दीनी हो या फिर दुनियावी हर एक पर अल्लाह का शुक्र अदा कराना चाहिए। अब ईद का चांद देखकर मस्जिदों में एतिकाफ पर बैठे लोग घरों को रवाना होंगे और ईद का त्योहार मनाएंगे।
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मौलवी फरीदुलहक ने कहा कि एक रोजेदार को इस बात का गम होता है कि मालूम नहीं दुबारा रमजान मिलेगा या नही। इसलिए हम सब को रमजान के अखिरी अशरा के दस दिनों को बहुत की गनीमत समझना चाहिए। रमजान के खत्म होने पर यकुम शव्वाल को तमाम मोमीन पर दो रेकात नमाज अदा करना वाजिब करार दिया गया है। जिसका मकसद रोजा की इबादत पूरी होने पर अल्लाह का शुक्र अदा करना है। इसलिए हम आज आपके बंदे को जो भी नेमत मिले चाहे दीनी हो या फिर दुनियावी हर एक पर अल्लाह का शुक्र अदा कराना चाहिए। अब ईद का चांद देखकर मस्जिदों में एतिकाफ पर बैठे लोग घरों को रवाना होंगे और ईद का त्योहार मनाएंगे।
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