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धान खरीद शुरू होने के 19 दिन बाद हुई 354.88 एमटी धान खरीद
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मऊ। धान खरीद शुरू होने के 19 दिन बाद भी धान खरीद रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। कई क्रय केंद्रों पर बोहनी तक नहीं हो पाई है। जबकि विभाग की वेबसाइट पर 5457 किसानों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। धान में नमी के चलते किसान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई क्रय केंद्रों पर प्रभारियों के मनमाने रवैये से किसान परेशान हैं।
किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए विभाग की तरफ से जिले में 45 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक धान क्रय केंद्र पर एक-एक हजार बोरा भेज दिया गया है। विभाग की तरफ से इस वर्ष 2020-21 में 50 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। धान खरीदी के 19 दिन बाद भी लगभग 354.88 एमटी ही धान खरीद हो सकी है। क्रय केंद्र प्रभारियों की मानें तो निचले इलाकों में बाढ़ तथा जल जमाव के चलते फसलों की कटाई देर से हुई है। किसान फसल को सूखाने में लगे हैं। इसके चलते किसान कम आ रहे हैं। एफसीआई, यूपी एग्रो के चार क्रय केंद्रों पर बोहनी तक नहीं हो सकी है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी वीके सिन्हा का कहना है कि सभी धान क्रय केंद्र सक्रिय हैं। किसान धान को सूखाकर साफ कर क्रय केंद्रों पर ले आएं। किसानों को किसी वजह से ऑनलाइन टोकन जारी करने में तकनीकी वजह से दिक्कत आ रही हो तो क्रय केंद्र पर जाकर ऑफलाइन टोकन जारी कर सकते हैं। क्रय केंद्र प्रभारी द्वारा सहयोग न करने की स्थिति में कंट्रोल रूम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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मधुबन कस्बा स्थित विपणन शाखा पर 17 हजार कुंतल के सापेक्ष तीन किसानों से 44 कुंतल 80 किग्रा खरीद हो सकी है। जबकि 33 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया है जो धान के सूखने पर वह सफाई के बाद क्रय केंद्र पर लाने की बात कह रहे हैं। भारपुरवा निवासी किसान मनीष कुमार सिंह का कहना था कि शासन की मंशा के अनुसार कोई भी किसान अपना धान कहीं भी भेज सकता है। परंतु क्रय केंद्रों के ग्राम संबद्धीकरण हो जाने के कारण हम अपना धान मन वांछित केंद्र पर नहीं भेज पा रहे हैं। कमरौली निवासी चंद्रिका यादव का कहना था कि रोग लगने से धान की फसल काफी प्रभावित हुई है उस पर से ताल में बाढ़ के पानी लग जाने से फसल बर्बाद हो गई है। ऐसे में केवल खाने के लिए धान पैदा हो सका है। बेचना मुश्किल लग रहा है। खीरीकोठा निवासी किसान हरिमोहन मल्ल का कहना है कि धान की फसल डूब जाने से पैदावार काफी प्रभावित हुई है। पिछले साल 120 कुंतल धान पैदा हुआ था जबकि इस बार 80 कुंटल ही पैदावार का अनुमान है। धान क्रय केंद्र पर मैंने अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया है। खीरी कोठा निवासी किसान अखिलेश मल्ल का कहना है कि धान में अभी नमी है जिससे सुखाया जा रहा है। दीपावली के बाद धान को क्रय केंद्र पर लेकर जाएंगे।
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किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए विभाग की तरफ से जिले में 45 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक धान क्रय केंद्र पर एक-एक हजार बोरा भेज दिया गया है। विभाग की तरफ से इस वर्ष 2020-21 में 50 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। धान खरीदी के 19 दिन बाद भी लगभग 354.88 एमटी ही धान खरीद हो सकी है। क्रय केंद्र प्रभारियों की मानें तो निचले इलाकों में बाढ़ तथा जल जमाव के चलते फसलों की कटाई देर से हुई है। किसान फसल को सूखाने में लगे हैं। इसके चलते किसान कम आ रहे हैं। एफसीआई, यूपी एग्रो के चार क्रय केंद्रों पर बोहनी तक नहीं हो सकी है।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी वीके सिन्हा का कहना है कि सभी धान क्रय केंद्र सक्रिय हैं। किसान धान को सूखाकर साफ कर क्रय केंद्रों पर ले आएं। किसानों को किसी वजह से ऑनलाइन टोकन जारी करने में तकनीकी वजह से दिक्कत आ रही हो तो क्रय केंद्र पर जाकर ऑफलाइन टोकन जारी कर सकते हैं। क्रय केंद्र प्रभारी द्वारा सहयोग न करने की स्थिति में कंट्रोल रूम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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मधुबन कस्बा स्थित विपणन शाखा पर 17 हजार कुंतल के सापेक्ष तीन किसानों से 44 कुंतल 80 किग्रा खरीद हो सकी है। जबकि 33 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया है जो धान के सूखने पर वह सफाई के बाद क्रय केंद्र पर लाने की बात कह रहे हैं। भारपुरवा निवासी किसान मनीष कुमार सिंह का कहना था कि शासन की मंशा के अनुसार कोई भी किसान अपना धान कहीं भी भेज सकता है। परंतु क्रय केंद्रों के ग्राम संबद्धीकरण हो जाने के कारण हम अपना धान मन वांछित केंद्र पर नहीं भेज पा रहे हैं। कमरौली निवासी चंद्रिका यादव का कहना था कि रोग लगने से धान की फसल काफी प्रभावित हुई है उस पर से ताल में बाढ़ के पानी लग जाने से फसल बर्बाद हो गई है। ऐसे में केवल खाने के लिए धान पैदा हो सका है। बेचना मुश्किल लग रहा है। खीरीकोठा निवासी किसान हरिमोहन मल्ल का कहना है कि धान की फसल डूब जाने से पैदावार काफी प्रभावित हुई है। पिछले साल 120 कुंतल धान पैदा हुआ था जबकि इस बार 80 कुंटल ही पैदावार का अनुमान है। धान क्रय केंद्र पर मैंने अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया है। खीरी कोठा निवासी किसान अखिलेश मल्ल का कहना है कि धान में अभी नमी है जिससे सुखाया जा रहा है। दीपावली के बाद धान को क्रय केंद्र पर लेकर जाएंगे।