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महिला जिला अस्पताल में बिना मानदेय मिले काम कर रहे हैं 33 कर्मचारी
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मऊ। कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच महिला जिला अस्पताल में 33 कर्मचारी बीते छह माह से बिना मानदेय के काम कर रहे हैं। मानदेय न मिलने से इन कर्मचारियों के सामने भुखमरी की स्थिति खड़ी हो गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि अपनी समस्या को लेकर वह जिम्मेदार अधिकारियों के पास जा रहे हैं तो वहां उनकी शिकायत नहीं सुनी जा रही है। ऐसे में वो अपने परिवार का भरण पोषण कर्ज लेकर चलाने को मजबूर हो रहे हैं।
100 बेड के महिला जिला अस्पताल में बेहतर चिकित्सीय सुविधा को सुचारु करने के लिए नान मेडिकल पद पर अवनि परिधि द्वारा 33 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इन कर्मचारी को बीते दिसंबर माह से मानदेय नहीं दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में इन कर्मचारियों को करीब छह माह से मानदेय न मिलने से परिवार का भरण पोषण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारी पवन गुप्ता, सत्येंद्र कुमार, पुष्पा, मनीष तिवारी, विपिन कुमार सिंह, दीपक यादव, रमेश गोड़, प्रदीप कुमार, शुभम सिंह, धर्मप्रकाश, भीम यादव आदि का कहना है कि महामारी के इस दौर में वो अपनी जान की परवाह किए बगैर पूरे कर्तव्य भाव से ड्यूटी कर रहे है। बावजूद कई माह से मानदेय न मिलने से संक्रमण के साथ उनके परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति आ खड़ी हुई है। वो कर्ज लेकर परिवार का भरण पोषण करने को बाध्य हो रहे है। आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन उनकी इस समस्या से अवगत होने के बाद उनका मानदेय दिलाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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कमीशन खोरी बनती है मानदेय न मिलने की वजह
मऊ। अवनि संस्था द्वारा मानदेय न देने की समस्या पहली बार की नहीं है। बीते वर्ष भी सितंबर माह में छह माह से मानदेय न देने की समस्या पर अमर उजाला ने पांच सितंबर को बिना मानदेय कर रहे काम शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिस पर तत्कालीन सीएमएस ने 13 सितंबर 2020 को बजट के लिए निदेशक स्वास्थ्य को पत्र भेजा था। जिसके बाद विभाग ने 24 लाख का बजट 26 सितंबर को जारी किया था। लेकिन कमीशन खोरी के चलते बजट आने पर मानदेय न मिलने पर अमर उजाला ने पुन: एक अक्तूबर को समाचार प्रकाशित किया था। जहां समाचार प्रकाशित होने से जिम्मेदारों पर दवाब पड़ने पर नौ अक्तूबर को कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान किया गया था। इस बार भी मानदेय के रोकने के पीछे इस वजह की कयास लगाई जा रही है।
वहीं, जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. चंद्रा सिन्हा ने बताया कि बजट के अभाव में कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बजट को लेकर पत्र लिखा जा चुका है।
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100 बेड के महिला जिला अस्पताल में बेहतर चिकित्सीय सुविधा को सुचारु करने के लिए नान मेडिकल पद पर अवनि परिधि द्वारा 33 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इन कर्मचारी को बीते दिसंबर माह से मानदेय नहीं दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में इन कर्मचारियों को करीब छह माह से मानदेय न मिलने से परिवार का भरण पोषण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कर्मचारी पवन गुप्ता, सत्येंद्र कुमार, पुष्पा, मनीष तिवारी, विपिन कुमार सिंह, दीपक यादव, रमेश गोड़, प्रदीप कुमार, शुभम सिंह, धर्मप्रकाश, भीम यादव आदि का कहना है कि महामारी के इस दौर में वो अपनी जान की परवाह किए बगैर पूरे कर्तव्य भाव से ड्यूटी कर रहे है। बावजूद कई माह से मानदेय न मिलने से संक्रमण के साथ उनके परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति आ खड़ी हुई है। वो कर्ज लेकर परिवार का भरण पोषण करने को बाध्य हो रहे है। आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन उनकी इस समस्या से अवगत होने के बाद उनका मानदेय दिलाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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कमीशन खोरी बनती है मानदेय न मिलने की वजह
मऊ। अवनि संस्था द्वारा मानदेय न देने की समस्या पहली बार की नहीं है। बीते वर्ष भी सितंबर माह में छह माह से मानदेय न देने की समस्या पर अमर उजाला ने पांच सितंबर को बिना मानदेय कर रहे काम शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिस पर तत्कालीन सीएमएस ने 13 सितंबर 2020 को बजट के लिए निदेशक स्वास्थ्य को पत्र भेजा था। जिसके बाद विभाग ने 24 लाख का बजट 26 सितंबर को जारी किया था। लेकिन कमीशन खोरी के चलते बजट आने पर मानदेय न मिलने पर अमर उजाला ने पुन: एक अक्तूबर को समाचार प्रकाशित किया था। जहां समाचार प्रकाशित होने से जिम्मेदारों पर दवाब पड़ने पर नौ अक्तूबर को कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान किया गया था। इस बार भी मानदेय के रोकने के पीछे इस वजह की कयास लगाई जा रही है।
वहीं, जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. चंद्रा सिन्हा ने बताया कि बजट के अभाव में कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बजट को लेकर पत्र लिखा जा चुका है।