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मृदा परीक्षण के नाम पर किसानों से छल की खबर
Updated Sun, 16 Dec 2018 10:11 PM IST
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मऊ। किसानों की भूमि का मृदा परीक्षण करने के नाम पर उनके साथ छल किया जा रहा है। बिना मिट्टी की जांच कराए ही किसानों के घर लेमिनेशन किए गए कंप्यूटराइज्ड मृदा परीक्षण के प्रमाण पत्र भेजे जा रहे हैं। किसानों की शिकायत है कि उन्होंने तो अपने खेत से मिट्टी का नमूना ही नहीं दिया था फिर भी उनके घर पर मृदा परीक्षण का कार्ड पहुंचा दिया गया। किसानों के साथ फर्जीवाड़ा करने वालों ने जिले के प्रमुख किसान नेता देवप्रकाश राय तक को भी नहीं बख्शा। फर्जी प्रमाण पत्र देकर उसका शुल्क कृषि विभाग से नामित संस्था सरकार से वसूल रही है। इस तरह से जिले में 20 लाख से अधिक की धांधली की गई है।
कृषि वैैैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के अनुसार कम मात्रा वाले तत्वों की भरपाई करने वाले उर्वरकों का प्रयोग करें। बिना जांच के उर्वरकों के प्रयोग से दिनों दिन खेतों की नष्ट होती जा रही ही उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए सरकार का जोर मृदा परीक्षण पर है। इसके तहत सरकार के द्वारा किसानों की खेतों की मिट्टी की जांच कराने के लिए एक निजी संस्था को जिम्मेदारी दी गई है। किसानों के खेतों की मिट्टी कृषि विभाग के कर्मचारियों की ओर से दिए जाने की व्यवस्था है। इसकी जांच का जिम्मा आजमगढ़ जिले की एक एजेंसी को दिया गया है। नियम के अनुसार कृषि विभाग दस एकड़ के प्लाट से खेतों से मिट्टी का नमूना लेकर जांच को भेजता है। यही रिपोर्ट आस पास के खेतों की मान ली जाती है। लेकिन यहां तो किसान को पता ही नहीं चला और घर पर उसके खेत की मिट्टी की जांच रिपोर्ट पहुंच गई। एजेंसी द्वारा जो जांच रिपोर्ट दी जा रही है, किसान हैरत में हैं कि यह कैसी जांच। किसान नेता राकेश सिंह का कहना है कि मृदा परीक्षण के नाम पर किसानों के साथ छल किया जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि यदि किसानों की तरफ से इस आशय की शिकायत आती है तो जांच कराकर नामित संस्था के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
इनसेट
केस स्टडी
लोकदल के नेता और किसान हितों के लिए चार दशकों से सतत संघर्ष करने वाले देवप्रकाश राय बताते हैं कि उनके घर मृदा परीक्षण की लेमिनेटेड रिपोर्ट आ गई। इस रिपोर्ट से चौक गए हैं। विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही से मृदा परीक्षण के नाम पर 20 लाख रुपयों से अधिक की हेराफेरी की गई है।
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किसान प्रमोद राय कहते हैं कि उनको भी मृदा परीक्षण की रिपोर्ट मिली है लेकिन उन्होंने अपने खेत से मिट्टी का नमूना नहीं दिया था। इसी प्रकार शिवनारायण राय कहते हैं कि उनको भी मृदा परीक्षण की रिपोर्ट मिली है लेकिन उनके खेत से मिट्टी का नमूना तो लिया ही नहीं गया था।
कृषि वैैैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के अनुसार कम मात्रा वाले तत्वों की भरपाई करने वाले उर्वरकों का प्रयोग करें। बिना जांच के उर्वरकों के प्रयोग से दिनों दिन खेतों की नष्ट होती जा रही ही उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए सरकार का जोर मृदा परीक्षण पर है। इसके तहत सरकार के द्वारा किसानों की खेतों की मिट्टी की जांच कराने के लिए एक निजी संस्था को जिम्मेदारी दी गई है। किसानों के खेतों की मिट्टी कृषि विभाग के कर्मचारियों की ओर से दिए जाने की व्यवस्था है। इसकी जांच का जिम्मा आजमगढ़ जिले की एक एजेंसी को दिया गया है। नियम के अनुसार कृषि विभाग दस एकड़ के प्लाट से खेतों से मिट्टी का नमूना लेकर जांच को भेजता है। यही रिपोर्ट आस पास के खेतों की मान ली जाती है। लेकिन यहां तो किसान को पता ही नहीं चला और घर पर उसके खेत की मिट्टी की जांच रिपोर्ट पहुंच गई। एजेंसी द्वारा जो जांच रिपोर्ट दी जा रही है, किसान हैरत में हैं कि यह कैसी जांच। किसान नेता राकेश सिंह का कहना है कि मृदा परीक्षण के नाम पर किसानों के साथ छल किया जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि यदि किसानों की तरफ से इस आशय की शिकायत आती है तो जांच कराकर नामित संस्था के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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लोकदल के नेता और किसान हितों के लिए चार दशकों से सतत संघर्ष करने वाले देवप्रकाश राय बताते हैं कि उनके घर मृदा परीक्षण की लेमिनेटेड रिपोर्ट आ गई। इस रिपोर्ट से चौक गए हैं। विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही से मृदा परीक्षण के नाम पर 20 लाख रुपयों से अधिक की हेराफेरी की गई है।
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किसान प्रमोद राय कहते हैं कि उनको भी मृदा परीक्षण की रिपोर्ट मिली है लेकिन उन्होंने अपने खेत से मिट्टी का नमूना नहीं दिया था। इसी प्रकार शिवनारायण राय कहते हैं कि उनको भी मृदा परीक्षण की रिपोर्ट मिली है लेकिन उनके खेत से मिट्टी का नमूना तो लिया ही नहीं गया था।