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बायोमेट्रिक न लगने से समय से दफतर नहीं पहुंचते अफसर कर्मचारी
Updated Wed, 22 Nov 2017 11:18 PM IST
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मधुबन(मऊ)। क्षेत्र के कई सरकारी संस्थानों में बायोमेट्रिक प्रणाली नहीं लागू होने से कर्मचारियों अधिकारियों द्वारा समय का मखौल उड़ाया जा रहा है। जबकि कुछ संस्थानों में इस प्रणाली के लग जाने से लोग समय से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। लोंगो का कहना है कि अगर सभी विभागों में बायोमेट्रिक प्रणाली लग जाती तो विभागों से लेट लतीफी और भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलती।
सरकारी संस्थानों और प्रतिष्ठानों में बायोमेट्रिक प्रणाली लगाने के लिए शासन द्वारा बार बार निर्देशित किए जाने के बाद भी आज तक बायोमेट्रिक प्रणाली लगाने पर टालमटोल किया जा रहा है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का भी रवैया ठीक नहीं है। बायोमेट्रिक प्रणाली नहीं लगने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर मंडाव, प्राथमिक चिकित्सालय मधुबन, दुबारी, सुग्गीचौरी, तिघरा, नेमडाड़ आदि अस्पतालों पर अधिकांश कर्मचारी लेटलतीफी के आदी हो गए हैं। सुग्गीचौरी का अस्पताल अधिकांशत: फार्मासिस्ट के भरोसे ही चलता है। अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और भी खराब है। शिक्षा विभाग में वित्त पोषित इंटर कॉलेजों में लगभग अधिकांश जगहों पर बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से सभी कर्मचारी समयानुसार अपनीे ड्युटी पर पहुंचते हैं जबकि वही अधिकतर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस प्रणाली के अभी तक न लगने से मनमानापन जारी है।
यही हाल तहसील से लेकर अन्य सरकारी संस्थानों का है। जहां बायोमेट्रिक प्रणाली का होना नितांत आवश्यक है। इस संबंध में सीएमओ सतीश चंद सिंह का कहना है कि बायोमेट्रिक लगाने का काम हो रहा है कुछ जगह लग गया है, कुछ जगह बाकी है जल्दी ही लग जायेगा। खंड शिक्षा अधिकारी गोपालशरण मिश्र का कहना है कि सत्र प्रारम्भ होने के समय यह प्रणाली लगाने कें लिए विभाग द्वारा तत्परता दिखाई गई थी लेकिन अभी तक कार्यालय में भी नहीं लग पाया है। जबकि सभी लोग मान रहे हैं कि इस प्रणाली के लगने से व्यवस्था में ब्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
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सरकारी संस्थानों और प्रतिष्ठानों में बायोमेट्रिक प्रणाली लगाने के लिए शासन द्वारा बार बार निर्देशित किए जाने के बाद भी आज तक बायोमेट्रिक प्रणाली लगाने पर टालमटोल किया जा रहा है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का भी रवैया ठीक नहीं है। बायोमेट्रिक प्रणाली नहीं लगने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर मंडाव, प्राथमिक चिकित्सालय मधुबन, दुबारी, सुग्गीचौरी, तिघरा, नेमडाड़ आदि अस्पतालों पर अधिकांश कर्मचारी लेटलतीफी के आदी हो गए हैं। सुग्गीचौरी का अस्पताल अधिकांशत: फार्मासिस्ट के भरोसे ही चलता है। अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और भी खराब है। शिक्षा विभाग में वित्त पोषित इंटर कॉलेजों में लगभग अधिकांश जगहों पर बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से सभी कर्मचारी समयानुसार अपनीे ड्युटी पर पहुंचते हैं जबकि वही अधिकतर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस प्रणाली के अभी तक न लगने से मनमानापन जारी है।
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यही हाल तहसील से लेकर अन्य सरकारी संस्थानों का है। जहां बायोमेट्रिक प्रणाली का होना नितांत आवश्यक है। इस संबंध में सीएमओ सतीश चंद सिंह का कहना है कि बायोमेट्रिक लगाने का काम हो रहा है कुछ जगह लग गया है, कुछ जगह बाकी है जल्दी ही लग जायेगा। खंड शिक्षा अधिकारी गोपालशरण मिश्र का कहना है कि सत्र प्रारम्भ होने के समय यह प्रणाली लगाने कें लिए विभाग द्वारा तत्परता दिखाई गई थी लेकिन अभी तक कार्यालय में भी नहीं लग पाया है। जबकि सभी लोग मान रहे हैं कि इस प्रणाली के लगने से व्यवस्था में ब्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
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