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अधिग्रहित भूमि की कीमत कम लगने से हलाकान हैं किसान
Updated Wed, 25 Oct 2017 11:38 PM IST
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कोपागंज। वाराणसी गोरखपुर राष्ट्रीय राज्य मार्ग को फोरलेन के लिए किसानों की अधिग्रहित की जाने वाली भूमि की कम कीमत लगाए जाने से किसान काफी हताश और परेशान हैं। शिकायत के बाद भी सुनवाई न होने से परेशान किसान विभागीय अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं। वाराणसी गोरखपुर राष्ट्रीय राज्य मार्ग को फोरलेन के लिए किसानों की अधिग्रहित की गई है। लेकिन महंगी भूमि का मुआवजा का रेट कम लगने से किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। किसानों की मानें तो किसानों की बेशक़ीमती भूमि जिस की प्रकृति आवासीय व्यवसायिक हो चुकी है बावजूद राष्ट्रीय राज्य मार्ग के अधिकारियों द्वारा भूमि की कीमत सामान्य कृषि दर लगाई गई है। किसानों का आरोप है कि जहां अधिकारियों द्वारा भूमि की उचित कीमत लगाई जा रही है वहां स्वीकृति नहीं दी जाती। ऐसी स्थिति में किसान मध्यस्थता वाद दाखिल करता है तथा मध्यस्ता वाद का निर्णय न होने के कारण किसान अपनी कीमती भूमि की उचित कीमत के लिए न केवल अधिकारियों के यहां भटकने पर मजबूर होता है बल्कि अधिकारियों के मनमाने रवैए से सरकार की किसानों के हितों की रक्षा करने की भी मंशा पूरी नहीं होती नजर नहीं आ रही है।इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय का कहना है कि उपरोक्त समस्या को लेकर पिछले 29 अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराया गया था। जिसके जवाब में हमें इस आश्वासन के साथ पत्र मिला था कि भूमि अधिग्रहण में किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों क्षेत्रीय अधिकारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण लखनऊ तथा परियोजना निदेशक गोरखपुर को भी भूमि अधिग्रहण में किसानों के हितों की रक्षा उचित मुआवजा देने हेतु निर्देश दिया गया है। बावजूद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को अपने प्रभाव में लेते हुए क्षेत्र के किसानों के कीमती भूमि का दर कम लगाते हुए भुगतान किया जा रहा है।
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