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हत्या के मामले में तीन आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:02 PM IST
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मऊ। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने हत्या के एक मामले में नामजद तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। साथ ही न्यायालय में मिथ्या साक्ष्य देने पर वादी मुकदमा के विरुद्व धारा 344 सीआरपीसी के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज करते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कि न्यायालय में गलत साक्ष्य देने के लिए उसे क्यो न दंडित किया जाय। मामला चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार वादी मुकदमा मानपुर गांव निवासी झब्बू सोनकर पुत्र जीवधन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें जमीन काजी हसन निवासी ज्ञानदीप पुत्र रामराज, ज्ञानवती पत्नी रामराज और जौनपुर जिले के सरपतहां थाना क्षेत्र के पट्टी नरेंद्रपुर गांव निवासी रामलखन पुत्र राजेंद्र को नामजद किया। वादी का आरोप था कि उसका लड़का आरोपी ज्ञानवती के घर आता जाता था। उसकी लड़की किरन से प्रेम विवाह कर लिया। जिससे वह नाराज रहती थी। आरोप था कि उसी को लेकर ज्ञानवती ने साजिश करके उसके लड़के मुंशी की 18 मार्च 2008 को जब वह चिरैयाकोट बाजार से मछली लेकर घर जा रहा था। उसी समय ज्ञानदीप और रामलखन ने गोली मारकर उसके लड़के मुंशी की हत्या का दिए। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए डीजीसी फौजदारी और एडीजीसी फौजदारी ने कुल नौ गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जिला जज ने अपने आदेश में लिखा कि साक्षीगण एक से लगायत पांच तक घटना होते नहीं देखा। वादी द्वारा परस्पर विरोधी साक्ष्य दिया गया है। जिला जज ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। साथ ही न्यायालय में झूठा साक्ष्य देने पर वादी मुकदमा झब्बू सोनकर के विरुद्व धारा 344 सीआरपीसी के तहत प्रकीर्णवाद दर्ज कर नोटिस जारी करने का आदेश दिया कि क्यों ने कोर्ट में गलत साक्ष्य देने के बावत उसे दंडित किया जाए।
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मामले के अनुसार वादी मुकदमा मानपुर गांव निवासी झब्बू सोनकर पुत्र जीवधन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें जमीन काजी हसन निवासी ज्ञानदीप पुत्र रामराज, ज्ञानवती पत्नी रामराज और जौनपुर जिले के सरपतहां थाना क्षेत्र के पट्टी नरेंद्रपुर गांव निवासी रामलखन पुत्र राजेंद्र को नामजद किया। वादी का आरोप था कि उसका लड़का आरोपी ज्ञानवती के घर आता जाता था। उसकी लड़की किरन से प्रेम विवाह कर लिया। जिससे वह नाराज रहती थी। आरोप था कि उसी को लेकर ज्ञानवती ने साजिश करके उसके लड़के मुंशी की 18 मार्च 2008 को जब वह चिरैयाकोट बाजार से मछली लेकर घर जा रहा था। उसी समय ज्ञानदीप और रामलखन ने गोली मारकर उसके लड़के मुंशी की हत्या का दिए। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए डीजीसी फौजदारी और एडीजीसी फौजदारी ने कुल नौ गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जिला जज ने अपने आदेश में लिखा कि साक्षीगण एक से लगायत पांच तक घटना होते नहीं देखा। वादी द्वारा परस्पर विरोधी साक्ष्य दिया गया है। जिला जज ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। साथ ही न्यायालय में झूठा साक्ष्य देने पर वादी मुकदमा झब्बू सोनकर के विरुद्व धारा 344 सीआरपीसी के तहत प्रकीर्णवाद दर्ज कर नोटिस जारी करने का आदेश दिया कि क्यों ने कोर्ट में गलत साक्ष्य देने के बावत उसे दंडित किया जाए।
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