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Mau News: सड़क दुर्घटना में घायल की मदद पर अब मिलेंगे 25 हजार रुपये
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मऊ। सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले गुड सेमेरिटन (नेक दिन इंसान) को पुरस्कृत की जाने वाली प्रोत्साहन की इनाम राशि पांच गुना बढ़ा दी गई है। पहले उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग पांच हजार रुपये देता था, लेकिन अब प्रशंसा पत्र के साथ 25 हजार रुपये मिलेंगे। साथ ही मददगारों को सम्मान और सुरक्षा के साथ उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और उन्हें अनावश्यक पूछताछ से बचाया जाएगा।
अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में मदद करने से लोग इसलिए पीछे हट जाते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि पुलिस या अस्पताल प्रशासन बार-बार पूछताछ करेगा। मुकदमों में उलझना पड़ेगा या अदालत के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इस मानसिकता को बदलने के लिए परिवहन विभाग ने गुड सेमेरिटन योजना की प्रोत्साहन राशि बढ़ा दी है। अब मददगारों को प्रोत्साहन के साथ सम्मानित किया जाता है।
एक बार से अधिक बयान नहीं लिया जाएगा
घायलों की मदद करने वालों से केवल जरूरी जानकारी ही ली जाएगी। एक से अधिक बार बयान नहीं लिया जाएगा। पुलिस और अस्पतालों को इसका निर्देश दिया है। ऐसा करने से आम लोग निडर होकर हादसे में घायल और पीड़ितों की मदद कर सकें। मददगारों का हौसला बढ़ाने के उद्देश्य से प्रोत्साहन के तहत मिलने वाली इनाम की राशि पांच गुना बढ़ा कर 5 से 25 हजार कर दी गई है। पुलिस और परिवहन विभाग को उम्मीद है कि आर्थिक प्रोत्साहन से ज्यादा से ज्यादा लोग इस दिशा में आगे आएंगे और सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद करेंगे।
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इनसेट -
गोल्डन ऑवर में पहुंचाना होगा अस्पताल
सड़क दुर्घटनाओं में पहले 60 मिनट की अवधि को गोल्डन आवर कहा जाता है। इस दौरान यदि घायल को समय पर प्राथमिक इलाज और अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। ऐसे में मददगारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर लोग बिना किसी डर के घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाते हैं, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
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कोट -
इस नीति का उद्देश्य केवल इनाम देना नहीं है, बल्कि समाज में सहयोग, मानवता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है। यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक सरोकार दोनों का संदेश देता है। लोगों में विश्वास होगा कि दुर्घटना में मदद करने पर वे किसी कानूनी या प्रशासनिक झंझट में नहीं फंसेंगे।
- इलामारन जी, एसपी, मऊ
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अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में मदद करने से लोग इसलिए पीछे हट जाते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि पुलिस या अस्पताल प्रशासन बार-बार पूछताछ करेगा। मुकदमों में उलझना पड़ेगा या अदालत के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इस मानसिकता को बदलने के लिए परिवहन विभाग ने गुड सेमेरिटन योजना की प्रोत्साहन राशि बढ़ा दी है। अब मददगारों को प्रोत्साहन के साथ सम्मानित किया जाता है।
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एक बार से अधिक बयान नहीं लिया जाएगा
घायलों की मदद करने वालों से केवल जरूरी जानकारी ही ली जाएगी। एक से अधिक बार बयान नहीं लिया जाएगा। पुलिस और अस्पतालों को इसका निर्देश दिया है। ऐसा करने से आम लोग निडर होकर हादसे में घायल और पीड़ितों की मदद कर सकें। मददगारों का हौसला बढ़ाने के उद्देश्य से प्रोत्साहन के तहत मिलने वाली इनाम की राशि पांच गुना बढ़ा कर 5 से 25 हजार कर दी गई है। पुलिस और परिवहन विभाग को उम्मीद है कि आर्थिक प्रोत्साहन से ज्यादा से ज्यादा लोग इस दिशा में आगे आएंगे और सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद करेंगे।
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गोल्डन ऑवर में पहुंचाना होगा अस्पताल
सड़क दुर्घटनाओं में पहले 60 मिनट की अवधि को गोल्डन आवर कहा जाता है। इस दौरान यदि घायल को समय पर प्राथमिक इलाज और अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। ऐसे में मददगारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर लोग बिना किसी डर के घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाते हैं, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
कोट -
इस नीति का उद्देश्य केवल इनाम देना नहीं है, बल्कि समाज में सहयोग, मानवता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है। यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक सरोकार दोनों का संदेश देता है। लोगों में विश्वास होगा कि दुर्घटना में मदद करने पर वे किसी कानूनी या प्रशासनिक झंझट में नहीं फंसेंगे।
- इलामारन जी, एसपी, मऊ