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24 माह बीते, लेकिन सीएचसी में आई एक्सरे मशीन नहीं हो सकी इंस्ट्राल

Wed, 29 Sep 2021 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 10:45 PM IST
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24 months passed, but the X-ray machine could not be installed in CHC
मधुबन। जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मानीटरिंग के अभाव में स्वास्थ्य सेवा बेपटरी होती नजर आ रही है। इसका ज्वलंत उदाहरण फतेहपुर मंडाव सीएचसी पर देखने को मिल रहा है। यहां करीब दो वर्ष का समय गुजरने के बाद एक्सरे मशीन धूल फांक रही है।जबकि अस्पताल में एक्सरे कराने के लिए प्रतिदिन 10 से 15 अधिक मरीज सीएचसी आते हैं। जहां सुविधा नहीं मिलने पर बाजार में निजी जांच केंद्रों में पैसा देकर एक्सरे कराने को मजबूर हैं। ऐसा नहीं कि इस समस्या के बारे में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को जानकारी नहीं है, बावजूद इस समस्या को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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जिले की 25 लाख की आबादी के लिए दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन केेंद्रों पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लाख दावे करती हो,लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है ।मधुबन तहसील क्षेत्र के फतेहपुर स्थित सीएचसी में करीब दो वर्ष पूर्व एक्सरे मशीन आई थी। लेकिन वर्तमान में सीएचसी के ओपीडी से लेकर इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर बाहर से ही एक्स-रे कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। पहले तो करीब एक वर्ष से ज्यादा समय तक मशीन इंस्ट्राल होने का इंतजार करते हुए धूल फांकते कमरे में बंद रही। फिर दवाब पड़ने पर उसे इंस्टाल किया गया तो अब फिल्म न होने पर यह शोपीस बनी हुई है। जबकि इस सीएचसी पर तीन लाख लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल का जिम्मा है। इतना ही नहीं अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी न होने से मरीजों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। फतेहपुर मंडाव ब्लॉक मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर फतहपुर स्थित पीएचसी को 11 साल पहले उच्चीकृत कर सीएचसी का दर्जा दिया गया है।
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नौ में से चार चिकित्सकों की ही तैनाती
मधुबन।सीएचसी पर सृजित पद के अनुसार यहां पर नौ डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन मात्र चार डॉक्टर ही मौजूद है। वही बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, दंत चिकत्सक, जनरल सर्जन व जनरल फिजिसियन अस्पताल को न मिलने के कारण गंभीर बिमारियों में जिला मुख्यालय को जाना पड़ता है।
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इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने कहा कि चिकित्सकों की कमी है। उपलब्ध संसाधनों के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधाएं दी जाती हैं। एक्सरे पर कहा कि फिल्म न होने से जांच प्रभावित हो रही है।
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