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गेहूं की प्रजातियों में लाएं विविधता
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बढुआ गोदाम । नेफोर्ड और भारत सरकार द्वारा संचालित डीएसटी परियोजना के अंतर्गत शनिवार को डुमराव गांव में किसान लाल बहादुर सिंह के गेहूं के प्रक्षेत्र पर एक दिवसीय फील्ड डे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कई गांवों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. रमाकांत सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गेहूं की प्रजाति में विविधता को बढ़ावा देना है। इसलिए गेंहू की प्रजातियों में विविधता लानी चाहिए। पिछले कुछ सालों से गेहूं की गिनी चुनी प्रजातियां ही किसानों द्वारा उगाई जा रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में आए अचानक बदलाव से फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। इस परियोजना के तहत संस्था द्वारा मऊ और गाजीपुर जिले में गेहूं की सात प्रजातियों का मदर और बेबी ट्रायल किसानों के प्रक्षेत्र पर लगाया गया है। संस्था द्वारा मऊ और गाजीपुर जिले में गेहूं की दस बडे परीक्षण किसानों के प्रक्षेत्र पर लगाए गए हैं । पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि मार्च में ही तापमान बहुत अधिक बढ़ जा रहा है। जबकि उसी समय गेहूं के दाने बनने प्रारंभ होते हैं। अधिक तापमान के कारण दाने सुख जाते हैं और पतले होने का खतरा बढ़ जाता है । जिसके परिणाम स्वरूप इसके उत्पादन ही नहीं बल्कि गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है । जिसके कारण उसका बाजार मूल्य कम हो जाता है। इन परीक्षणों के माध्यम से अधिक तापमान अवरोधी गेहूं के प्रजातियों के चयन की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में संस्था के प्रभारी संतोष मिश्र, विनीत त्रिपाठी, आस्तिक मिश्र के साथ बृजेश सिंह, लालबहादुर सिंह, रामकरन सिंह, पंकज कुमार, निर्मला, बिंदु, राजकुमारी, लहसिया आदि किसान उपस्थित रहें।
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वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. रमाकांत सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गेहूं की प्रजाति में विविधता को बढ़ावा देना है। इसलिए गेंहू की प्रजातियों में विविधता लानी चाहिए। पिछले कुछ सालों से गेहूं की गिनी चुनी प्रजातियां ही किसानों द्वारा उगाई जा रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में आए अचानक बदलाव से फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। इस परियोजना के तहत संस्था द्वारा मऊ और गाजीपुर जिले में गेहूं की सात प्रजातियों का मदर और बेबी ट्रायल किसानों के प्रक्षेत्र पर लगाया गया है। संस्था द्वारा मऊ और गाजीपुर जिले में गेहूं की दस बडे परीक्षण किसानों के प्रक्षेत्र पर लगाए गए हैं । पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि मार्च में ही तापमान बहुत अधिक बढ़ जा रहा है। जबकि उसी समय गेहूं के दाने बनने प्रारंभ होते हैं। अधिक तापमान के कारण दाने सुख जाते हैं और पतले होने का खतरा बढ़ जाता है । जिसके परिणाम स्वरूप इसके उत्पादन ही नहीं बल्कि गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है । जिसके कारण उसका बाजार मूल्य कम हो जाता है। इन परीक्षणों के माध्यम से अधिक तापमान अवरोधी गेहूं के प्रजातियों के चयन की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में संस्था के प्रभारी संतोष मिश्र, विनीत त्रिपाठी, आस्तिक मिश्र के साथ बृजेश सिंह, लालबहादुर सिंह, रामकरन सिंह, पंकज कुमार, निर्मला, बिंदु, राजकुमारी, लहसिया आदि किसान उपस्थित रहें।
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