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जिला अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता पर प्लान की खबर
Updated Wed, 20 Sep 2017 10:55 PM IST
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मऊ। जीएसटी नंबर न मिल पाने के चलते जिला अस्पताल में दवाओं समेत कई सामानों की खरीद नहीं हो पा रही है। इसलिए यहां पर जीवन रक्षक दवाओं का टोटा बना हुआ है। 30 जून से पहले खरीदी गई दवाओं से ही अब तक काम चलाया जा रहा है। यही स्थिति मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की भी है। वहां भी तक जीएसटी नंबर नहीं मिल पाया है। इसलिए जिले के सभी पीएचसी और सीएचसी पर दवाओं की भारी कमी है। जिला महिला अस्पताल में दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
पहली जुलाई से देश के साथ प्रदेश में भी गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू किया गया है। नए नियम के मुताबिक अब कोई भी सामान खरीदने अथवा बेचने के लिए जीएसटी नंबर होना अनिवार्य है। जीएसटी के लिए वाणिज्य कर कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराना भी जरूरी है। इसके बाद सामानों की खरीद-बिक्री उसी नंबर पर दर्शाते हुए करनी होगी। जीएसटी नंबर के लिए सीएमएस जिला अस्पताल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल और सीएमओ की तरफ से आवेदन तो किए गए, लेकिन अभी तक इन तीनों संस्थाओं को जीएसटी का नंबर नहीं मिल पाया है। इसके चलते दवाइयों समेत किसी सामान की खरीद नहीं हो पा रही है। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों का अभाव बना हुआ है। हाल यह है कि 30 जून के पहले तक जिन दवाओं की खरीद हो पाई थी, वही दवा मरीजों को दी जा रही है। जीएसटी लागू होने के बाद अब तक एक भी दवा की खरीद नहीं की जा सकी है। जिला अस्पताल में इन दिनों केवल पैरासिटामाल सहित कुछ मामूली दवाइयां और आई ड्राप्स ही उपलब्ध हैं। इसी तरह एंटीबायोटिक दवा के नाम पर सिर्फ सिप्रोफ्लाक्सासीन टेबलेट उपलब्ध है। इसी प्रकार जिले के सभी अस्पतालों में दवाओं के नाम पर केवल खानापूरी की जा रही है। हालत यह है कि स्टेशनरी और जरूरी पेपर उधार लेकर काम चलाया जा रहा है। कहीं पर भी लोकल परचेजिंग नहीं की जा रही है। इस बाबत जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.बृज कुमार कहते हैं कि जीएसटी के लिए अप्लाई किया गया है, प्रोविजनल मिल गया है। टिन नंबर पर जीएसटी मिल जाता है। जल्द ही जीएसटी नंबर मिल जाएगा। वैसे भी ऑनलाइन आर्डर दिए जा रहे हैं।
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अप्रैल से अब तक नहीं की गई एलपी
मऊ। सूबे की सरकार बदलने के कुछ दिन बाद ही जीएसटी लागू कर दी गई। इसके चलते पहले बजट के अभाव में एलपी प्रभावित थी। बाद में जीएसटी के कारण एलपी का कार्य बंद रहा। सीएमएस सदर अस्पताल डॉ. वृज कुमार ने बताया कि अप्रैल से अब तक कोई एलपी जिला अस्पताल में नहीं की गई है।
पहली जुलाई से देश के साथ प्रदेश में भी गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू किया गया है। नए नियम के मुताबिक अब कोई भी सामान खरीदने अथवा बेचने के लिए जीएसटी नंबर होना अनिवार्य है। जीएसटी के लिए वाणिज्य कर कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराना भी जरूरी है। इसके बाद सामानों की खरीद-बिक्री उसी नंबर पर दर्शाते हुए करनी होगी। जीएसटी नंबर के लिए सीएमएस जिला अस्पताल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल और सीएमओ की तरफ से आवेदन तो किए गए, लेकिन अभी तक इन तीनों संस्थाओं को जीएसटी का नंबर नहीं मिल पाया है। इसके चलते दवाइयों समेत किसी सामान की खरीद नहीं हो पा रही है। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों का अभाव बना हुआ है। हाल यह है कि 30 जून के पहले तक जिन दवाओं की खरीद हो पाई थी, वही दवा मरीजों को दी जा रही है। जीएसटी लागू होने के बाद अब तक एक भी दवा की खरीद नहीं की जा सकी है। जिला अस्पताल में इन दिनों केवल पैरासिटामाल सहित कुछ मामूली दवाइयां और आई ड्राप्स ही उपलब्ध हैं। इसी तरह एंटीबायोटिक दवा के नाम पर सिर्फ सिप्रोफ्लाक्सासीन टेबलेट उपलब्ध है। इसी प्रकार जिले के सभी अस्पतालों में दवाओं के नाम पर केवल खानापूरी की जा रही है। हालत यह है कि स्टेशनरी और जरूरी पेपर उधार लेकर काम चलाया जा रहा है। कहीं पर भी लोकल परचेजिंग नहीं की जा रही है। इस बाबत जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.बृज कुमार कहते हैं कि जीएसटी के लिए अप्लाई किया गया है, प्रोविजनल मिल गया है। टिन नंबर पर जीएसटी मिल जाता है। जल्द ही जीएसटी नंबर मिल जाएगा। वैसे भी ऑनलाइन आर्डर दिए जा रहे हैं।
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अप्रैल से अब तक नहीं की गई एलपी
मऊ। सूबे की सरकार बदलने के कुछ दिन बाद ही जीएसटी लागू कर दी गई। इसके चलते पहले बजट के अभाव में एलपी प्रभावित थी। बाद में जीएसटी के कारण एलपी का कार्य बंद रहा। सीएमएस सदर अस्पताल डॉ. वृज कुमार ने बताया कि अप्रैल से अब तक कोई एलपी जिला अस्पताल में नहीं की गई है।
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