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सर्दी की आहट संग शुरू हुआ सर्दी का कारोबार
Updated Tue, 13 Nov 2018 11:39 PM IST
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सर्दी की आहट के संग सर्दी से जुड़ा कारोबार भी शुरू हो गया है। गर्म कपड़ों के साथ ही गद्दा रजाई बनाने वालों के यहां लोग पहुंच रहे।
पिछले रविवार शाम से ठंडी हवाएं चलनी प्रारंभ हो गईं। इसके चलते लोगों को सर्दी से बचाव के लिए तैयारियां प्रारंभ करनी पड़ी। शरीर को सर्द हवाओं से बचाने के लिए ऊनी वस्त्रों की मांग बाजार में तेजी पकड़ रही है। वहीं रात को सर्दी से निजात पाने को लोगों ने रजाई बनवानी प्रारंभ कर दी है। नगर के झवारा, इंदार, अदरी बाजार में दुकान सजनी शुरू हो गई। कारोबार से जुड़े व्यवसायी संजय, शिवकुमार, बताते है कि उच्च वर्ग के लोग ब्रांडेड कंबल और मध्यम वर्गीय लोगों के बीच रुई से भरी रजाई आज भी काफी प्रचलित हैं। एक रजाई 1300 से लेकर 1500 रुपये तक में तैयार हो रही है। जिसमें कपड़े का खोल 200 से 400 रुपये तक का मिलता है। वहीं देशी बिनौला वाली अच्छी रूई 80 से 130 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कारीगर रुई धुनाई के लिए 15 रुपये प्रति किलो लेते है। इसके बाद तैयार रजाई की टकाई (डोरा डलवाने) के लिये 70 से 80 रुपये प्रति रजाई लग रहे हैं। रूई विक्रेता ईशा अहमद ने बताया कि महंगाई के चलते इस बार पुरानी रूई 110 से 120 रूपए और नयी रूई गाधी अश्रम की 190, सामन्य रूई 150, टेरिकाट 90 से 100 रूपए प्रति किलो बिक रही है।
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पिछले रविवार शाम से ठंडी हवाएं चलनी प्रारंभ हो गईं। इसके चलते लोगों को सर्दी से बचाव के लिए तैयारियां प्रारंभ करनी पड़ी। शरीर को सर्द हवाओं से बचाने के लिए ऊनी वस्त्रों की मांग बाजार में तेजी पकड़ रही है। वहीं रात को सर्दी से निजात पाने को लोगों ने रजाई बनवानी प्रारंभ कर दी है। नगर के झवारा, इंदार, अदरी बाजार में दुकान सजनी शुरू हो गई। कारोबार से जुड़े व्यवसायी संजय, शिवकुमार, बताते है कि उच्च वर्ग के लोग ब्रांडेड कंबल और मध्यम वर्गीय लोगों के बीच रुई से भरी रजाई आज भी काफी प्रचलित हैं। एक रजाई 1300 से लेकर 1500 रुपये तक में तैयार हो रही है। जिसमें कपड़े का खोल 200 से 400 रुपये तक का मिलता है। वहीं देशी बिनौला वाली अच्छी रूई 80 से 130 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कारीगर रुई धुनाई के लिए 15 रुपये प्रति किलो लेते है। इसके बाद तैयार रजाई की टकाई (डोरा डलवाने) के लिये 70 से 80 रुपये प्रति रजाई लग रहे हैं। रूई विक्रेता ईशा अहमद ने बताया कि महंगाई के चलते इस बार पुरानी रूई 110 से 120 रूपए और नयी रूई गाधी अश्रम की 190, सामन्य रूई 150, टेरिकाट 90 से 100 रूपए प्रति किलो बिक रही है।