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ब्लाकों में एक भी माडल आवास नहीं बना
Updated Mon, 08 Jan 2018 12:41 AM IST
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मऊ। जिस मॉडल के अनुसार प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कराया जाना है। जिले में अब तक वैसा एक भी मॉडल बनाया ही नहीं गया है। जिम्मेदार अफसरों ने इसकी जरूरत ही नहीं समझी है। ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी के बताने पर राजमिस्त्री बजट के हिसाब से आवास बना रहे हैं। शासन के निर्देश पर प्रधानमंत्रीआवास के लिए लकड़ी का एक माडल बढ़इयों से बनवाना है। उसी माडल के अनुसार प्रधानमंत्री आवास बनाए जाने हैं। जिले में दो वित्तीय वर्षों के अंदर एक भी प्रधानमंत्री आवास पूरा नहीं हुआ है। वर्ष 2016 -17 और वर्ष 2017-18 में जिले में 10163 प्रधानमंत्री आवासों का आवंटन किया गया है। आवास केो सभी लाभार्थियों को पहली किश्त जारी की चुकी है।विभागीय अफसरों का दावा है कि लगभग 96 फीसदी लाभार्थियों को आवास की दूसरी किश्त दी जा चुकी है। शासन की ओर से पिछले वित्तीय वर्ष के लिए 6508 आवास के लक्ष्य तय किए गए थे। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 3655 आवा आवंटित किए गए है। शासन की ओर से इन दोनों वर्षो के लिए कुल एक अरब 21 करोड़ 95 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है। बुनियाद के ऊपर दीवारों की जोड़ाई करने के बाद फोटो सहित अर्धनिर्मित आवासों की आनलाइन सत्यापन के बाद बीडीओ की ओर से डोंगल से लाभार्थियों के बैंक खातों में आवासों की दूसरी किश्त जारी कर दी गई है। विभाग का दावा है कि इन दो वर्षों में 96 फीसदी आवासों की दूसरी किश्त दी जा चुकी है लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। लगभग 40 प्रतिशत आवास ही दूसरी किश्त देने योग्य बन पाए हैं। इसमें कुछ तो लाभार्थियों की ओर से लापरवाही की गई जब कि जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ये आवास अधूरे रह गए। हालांकि सीडीओ आशुतोष द्विवेदी की ओर से सभी खंड विकास अधिकारियों और ग्राम प्रधानों को निर्देश देकर आवास यथाशीघ्र पूरे कराने की हिदायत दी है। फिर भी ग्राम प्रधानों की ओर से बरती गई लापरवाही से ये आवास अभी तक अधूरे हैं। इस बाबत सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी का कहना है कि सभी खंड विकास अधिकारियों को समय सीमा के अंतर्गत आवासों का निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।बोले प्रशिक्षित राजगीर मिस्त्री बनाएंगे, इस कारण मॉडल बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
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